मैं आज के इस कार्यक्रम में जो उपस्थित हैं उन सभी का आभार व्यक्त करता हूं विशेष रूप से हमारी राज्य प्रभारी बहन पुष्पांजलि जी का हमारे मंडल प्रभारी श्री तरुण भाई का और हमारे इस पतंजलि योग समिति के संरक्षक श्री राम सिंह जी का विशेष आभार व्यक्त करता हूं श्री विवेक नारायण जी का जो यहां के महापौर हैं श्री राधा रमन दास जी का विशेष आभारी हूं आरपी राजेश भाई राजीव भाई सुश्री पार सारथी बहन श्री राम प्रकाश जी और श्रीमती सुमन अग्रवाल सबका आभार व्यक्त करता हूं जिन्होंने इस कार्यक्रम के आयोजन संयोजन में भूमिका निभाई है और मुझे आपके सामने प्रस्तुत होने का मौका दिया है इसके अलावा भी जिनका नाम नहीं ले पाया ऐसे सभी कार्यकर्ता भारत स्वाभिमान के पदाधिकारी पतंजलि पीठ के पदाधिकारी जिन्होंने इस आयोजन में नगर में आया हूं मुझे बहुत आनंद की अनुभूति है और आनंद की अनुभूति का सबसे बड़ा कारण यह है कि हमारे देश के जो आजादी की लड़ाई के प्रथम पंक्ति के शहीदों में जिनकी गिनती होती है महारानी झांसी लक्ष्मीबाई उनकी कर्म भूमि पर मैं आया हूं इसका मुझे बहुत आनंद है और आते ही मुझे एक सुखद समाचार आपके महापौर जी का मिला कि यहां एक ज्योति जलाने का काम पिछले वर्ष से शुरू हुआ है उनकी समाधि पर हम हमारे प्रथम स्वाधीनता संग्राम के 150 वर्ष पूरे हुए पिछले साल उस निमित्त से यहां पर ज्योति जलाने का काम जो अखंड ज्योति है वह प्रज्वलित करने का काम हुआ है यह बहुत आनंद और सुख की बात है इस देश के शहीदों की जहां समाधिया हैं वहां पर सभी जगह ऐसा होना ही चाहिए यह तो एक सामान्य सी बात है लेकिन हम आजादी के 62 साल के बाद कुछ कुछ शहीदों को याद कर पाए और यह काम कर पाए तो यह हम अपने ही पाप को कुछ कम करेंगे ऐसा मुझे लगता है यह तो काम 1947 में ही होना चाहिए आजादी मिलते ही यह काम होना चाहिए क्योंकि जिन्होंने आजादी दिलाई है अगर उनके प्रति हम सम्मान नहीं कर सकते कृतज्ञता ज्ञापित नहीं कर सकते तो हमसे ज्यादा कृतज्ञ और कौन हो सकता है तो यह आनंद का समाचार मुझे मिला इसके लिए मैं महापौर जी को बधाई देता हूं उनकी पूरी टीम को बधाई देता हूं जिन्होंने यह काम करने में सक्रिय सहयोग दिया होगा भारत स्वाभिमान नाम का एक अभियान शुरू हुआ है पिछले जनवरी 5 से 2009 में यह अभियान संपूर्ण भारत देश में शुरू हुआ है परम पूजनीय स्वामी रामदेव जी इसके अध्यक्ष हैं आचार्य बालकृष्ण जी इसके महामंत्री हैं मुझे परम पूजनीय स्वामी जी ने राष्ट्रीय सचिव की जिम्मेदारी दे रखी है इसके अलावा इस अभियान में जिलों के जिला प्रभारी हैं 31 राज्यों के राज्य प्रभारी हैं और सारे देश में करीब 24 हज योग शिक्षक हैं जो इस अभियान के साथ तन मन धन से लगे हुए हैं हमारी ऐसी कोशिश है कि जनवरी 2010 तक इस अभियान में लगभग 11 लाख लोग पूरे देश में सक्रिय सहभागी हो जाएंगे और अगले वर्ष से परम पूजनीय स्वामी जी खुद एक एक जिले के स पर निकलने की तैयारी में है तो हमारा अनुमान है कि स्वामी जी का जो जिलें का प्रवास होगा और अगर वह दो साल चल गया तो सारे देश के करीब पाच करोड़ लोग इस अभियान से प्रत्यक्ष रूप से जुड़ जाएंगे उसके बाद हम कुछ काम करना चाहते हैं एक बार हमारा संगठन खड़ा हो जाए हमारी शक्ति हो जाए तो हम कुछ काम करना चाहते हैं और वह काम क्या करना चाहते हैं अगर एक वाक्य में कहूं तो शहीदों के अधूरे स को हम पूरा करना चाहते इसी के लिए हमने यह भारत स्वाभिमान अभियान बनाया हमारे देश के क्रांतिवीर के हमारे देश के शहीदों के हमारे देश के महापुरुषों के जो सपने हैं भारत के बारे में ऐसा भारत होना चाहिए ऐसा भारत होना चाहिए वही हम पूरा करना चाहते हैं होना तो यह चाहिए था कि यह सारे सपने सारे आदर्श जो क्रांतिकारियों ने देखे शहीदों ने देखे वोह आजादी मिलते ही पूरे होते लेकिन नहीं हो पाए हैं उसके कुछ गंभीर कारण उन कारणों की जांच पड़ताल करके उनका कोई समाधान निकालने के प्रयास में हम सब लोग हैं मुझे यह कहते हुए बहुत अफसोस है बहुत दुख है कि हमारे देश की आजादी बहुत कीमती है बहुत मूल्यवान है हमारी आजादी का मूल्य हमारी आजादी की कीमत अगर आप जानना चाहे तो दो तीन जानकारियों से आप उसको अदाजा लगा सकते हैं पहली जानकारी यह कि महारानी झांसी लक्ष्मीबाई का जो बलिदान हुआ भगत सिंह उधम सिंह चंद्रशेखर जैसे क्रांतिकारियों के जो बलिदान हुए नाना साहब पेशवा तात्या टोपे के जो बलिदान हुए ऐसे बलिदान हमारे देश में 7 32780 हुए एक दो बलिदान के बाद आजादी नहीं आई अंग्रेजी सरकार के जो रिकॉर्ड्स हैं अंग्रेजी सरकार के जो दस्तावेज हैं और जो दस्तावेज ब्रिटिश पार्लियामेंट में रखे हुए हैं जो अभी तक भारत भी नहीं लाए गए हैं क्योंकि भारत सरकार को उसमें कोई रुचि नहीं है लाने में कोई रस नहीं है मुझे तो यह भी कहते हुए बहुत अफसोस होता है कि भारत के जिन क्रांतिकारियों को लंदन में फांसी दी गई थी उनके डेथ सर्टिफिकेट और डेथ वारंट अभी तक भारत नहीं पहुंचे आजादी के 62 साल में 63 वा साल शुरू हो चुका जिन शहीदों को लंदन में फांसी दी गई ऐसे बहुत शहीद लंदन की जेलों में उनके डेथ वारंट पड़े हुए हैं डेथ सर्टिफिकेट पड़े हुए हैं कई शहीदों की अस्थियां वहां जेलों में रखी हुई वह अभी तक हमारे देश में नहीं आई यह हमारे देश के आजादी के बाद के जो नेता हैं शासक हैं उनका असली परिचय देने के लिए काफी है कि वह कैसे व्यक्ति तो जो काम शहीदों के आजादी के सपने के साथ जुड़ा हुआ है वह काम अधूरा है वह हमें पूरा करना है इसी के लिए भारत स्वाभिमान अभियान बना है हमारे शहीदों की जो शहादत है मैंने बताया 7 लाख 32780 क्रांतिकारी इस देश की आजादी के लिए अंग्रेजों की गोलियों के शिकार हुए या फांसी पर चढ़ा दिए गए यह संख्या उन क्रांतिकारियों की है इसके अलावा अंग्र ने हमारे देश के साधारण नागरिकों के ऊपर जो अत्याचार किए और उनमें जो लोग मारे गए मैं उनको भी किसी क्रांतिकारी से कम नहीं मानता वह संख्या साढ़े करोड़ साढ़े च करोड़ एक ही उदाहरण से बताता हूं आप ग्वालियर में रहते हैं ग्वालियर के नजदीक में एक बड़ा नगर है उसका नाम है कानपुर कानपुर के पास एक छोटा सा स्थान है बिठूर बिठूर वह स्थान है जहां 1857 का प्रथम स्वाधीनता संग्राम तैयारी करने के लिए बैठकें हुई हैं नाना साहब पेशवा तात्या टोपे झांसी रानी लक्ष्मीबाई नाना फड़न बस इन क्रांतिकारियों ने मिलकर जो योजनाएं बनाई सबसे पहले वह बिठूर से बनी और अंग्रेजों को बिठूर आंख में चुपता था तो अंग्रेजों ने उस बिठूर के ऊपर क्या अत्याचार किए उसकी एक ही बानगी देता हूं कि कुछ अंग्रेज अधिकारियों ने बिठूर पर हमला किया था यह 1857 के बाद की घटना है उस समय बिठूर में 24000 लोग रहते थे 24 हजार लोगों को अंग्रेजों ने मौत के घाट उतार दिया तीन महीने के बच्चे से लेकर 90 साल के बुजुर्ग किसी को नहीं छोड़ा था अंग्रेज और जिन लोगों को अंग्रेजों ने मार डाला उनको बाद में नीम के पेड़ों से पीपल के पेड़ों से बरगद के पेड़ों से फांसी लटका कर छोड़ दिया था ताकि आने जाने वाले लोग देखें और उनमें दहशत पैदा हो आतंक पैदा हो कि अंग्रेजी सरकार का विरोध करने का अंजाम क्या होता है अब बिठूर जैसे नगर में 24000 लोगों की शहादत हुई है आजादी के लिए अंदाजा लगा सकते हैं बिठूर जैसे भारत में 350 नगर थे जिन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ बगावत की थी और अंग्रेज ने पूरी ताकत से उनको कुचल दिया था अत्याचार की सारी सीमाएं उन्होंने तोड़ी तो लगभग साढ़े करोड़ भारतवासी इस तरह से अंग्रेजों के अत्याचार का शिकार होकर शहीद हुए उनकी शहादत को भी नमन है जिन क्रांतिकारियों को अंग्रेजों ने फांसी पर चढ़ाया उनको तो हम नमन करते ही हैं जिन क्रांतिकारियों को अत्याचारों से मार डाला अंग्रेजों ने उनके प्र भी हम अपने मन में श्रद्धा भाव रखते हैं नमन प्रस्तुत करते हैं दुनिया में बहुत सारे देश गुलाम हुए हैं अलग-अलग समय पर अफ्रीका गुलाम हुआ अंग्रेजों का सा स साल के लिए अफ्रीका में एक छोटा सा देश है वह अल्जीरिया गुलाम हुआ फ्रांस का लगभग 400 साल के लिए इसी तरह से लैटिन अमेरिका के बहुत सारे देश गुलाम हुए अलग-अलग समय पर जापान गुलाम हुआ है अंग्रेजों का चीन कुछ दिनों तक अंग्रेजों का गुलाम रहा है दुनया में ऐसे 50 देश हैं जो अलग अलग समय पर गुलाम हुए हैं लेकिन इन पचास देशों का इतिहास जानने के बाद जो महत्व की बात पता चलती है वह यह कि किसी भी देश की आजादी के लिए इतनी कुर्बानियां नहीं हुई हैं इतनी शहादत नहीं हुई है जो अंग्रेजों के खिलाफ भारत में हुई किसी भी देश में अफ्रीका की आजादी का इतिहास हम पढ़ते हैं पता चलता है थोड़े से लोगों ने अफ्रीका की आजादी हासिल कर ली अल्जीरिया की आजादी बहुत कम लोगों ने हासिल कर ली रोडे एशिया इथियोपिया सोमालिया इन सब देशों की आजादी थोड़े से लोगों ने हासिल कर ली लैटिन अमेरिका के देशों में थोड़े से लोगों ने अपने देश को आजाद करा लिया यह भारत अकेला देश है दुनिया के 50 देशों में जहां की आजादी लाने में हमें साढ़े करोड़ से ज्यादा लोगों के बलिदान देने पड़े हमने तो अभी इस पर कोई काम नहीं किया है कि साढ़े करोड़ लोगों के नाम क्या है उसकी कोई सूची अभी तक भारत सरकार ने तैयार नहीं की यह तो अंग्रेजी सरकार के जो रिकॉर्ड्स है दस्तावेज है जो ब्रिटिश पार्लियामेंट हाउस ऑफ कॉमनस में पढे हैं उनमें से निकालकर लाई गई छोटी-छोटी बातें हैं जिससे हमको पता चलता है तो बहुत कीमती है आजादी बहुत बड़ी कीमत हमने चुकाई है इस देश की आजादी इस देश की आजादी की कीमत क्या है अगर आप जानना चाहे तो उन शहीदों के महापुरुषों के क्रांतिकारियों के परिवारों से पूछिए जिन्होंने कुछ ना कुछ बलिदान किया है इस देश की आजादी वह बताएंगे कि क्रांति की कीमत क्या है महाराष्ट्र नाम का एक राज्य है पुणे नाम का एक शहर है वहां पर एक ही परिवार चाफेकर परिवार के तीन नौजवानों को फांसी हुई थी एक ही परिवार में तीन बेटे थे तीनों फांसी पर चढ़ गए चाफेकर बंधुओं के परिवार में जाकर आप पूछेंगे तो वो बताएंगे आजादी की कीमत क्या है स्वतंत्रता की कीमत क्या है तात्या टोपे के परिवार में अगर आप जाकर पूछेंगे तो वह बताएंगे आजादी की कीमत क्या है भगत सिंह के परिवार में जाकर पूछेंगे तो अंदाजा लगेगा आजादी की कीमत क्या है हमारे जैसे लोगों ने कम से कम मैं अपनी बात कह सकता हूं जिन्होंने कुछ नहीं खोया इस देश की आजादी की लड़ाई में जिन्होंने कुछ नहीं खोया इस देश के स्वाधीनता संग्राम में उनको आजादी की वास्तविक कीमत का अंदाजा नहीं है क्योंकि दिल में उतना दर्द होना चाहिए जज्बा होना चाहिए उसको समझने का बहुत कीमती है यह आजादी जो भी आई है लेकिन दुख उससे भी बड़ा यह है कि यह जो आजादी आई वह शहीदों के सपनों के अनुरूप नहीं आई हमारे क्रांतिकारियों के जो सपने थे उसके अनुरूप य आजादी तो नहीं है सबसे बड़ा सपना यह था कि आजादी के पहले भारत जितना बड़ा था आजादी के बाद भी भारत उतना ही बड़ा होना चाहिए भौगोलिक रूप से माने भारत की सीमाएं जहां तक लगती थी आजादी के पहले आजादी के बाद के भारत की सीमाएं भी उतनी ही होनी चाहिए थी आपको मालूम है आजादी के पहले का भारत अफगानिस्तान तक फैला हुआ था आजादी के पहले का भारत इस समय के भारत से बहुत बड़ा भारत था लेकिन आजादी मिलते ही भारत के टुकड़े हुए और इस देश की आजादी खंडित हो गई हमारे किसी भी शहीद ने यह सपने में नहीं सोचा था कि आजादी मिलते ही देश का खंड खंड बंटवारा होगा देश को तोड़ना पड़ेगा मुझे वह दिन याद आपको कराना है 1905 में अंग्रेजों ने इस देश में एक बहुत बड़ा खेल खेला था अंग्रेजों का एक अधिकारी इस देश में हुआ करता था उसका नाम था कर्जन कर्जन ने बंगाल का बंटवारा कर दिया था उस जमाने का जो बंगाल था वह आज के जमाने से बहुत बड़ा था अभी का हमारा जो पश्चिम बंगाल है वह पूरा का पूरा अभी का हमारा जो बिहार है अभी का हमारा जो उड़ीसा है झारखंड है इतना बड़ा इलाका था बंगाल का और भारत के ऊपर के जो छोटे-छोटे सात प्रदेश हैं आसाम नागालैंड मिजोरम मणिपुर त्रिपुरा वगैरह वगैरह इनको मिलाकर पूरा बंगाल था उस बंगाल को अंग्रेजों ने दो टुकड़ों में बांटा पूर्वी बंगाल और पश्चिमी बंगाल और यह बंटवारा हिंदू और मुसलमान के आधार पर हुआ पूर्वी बंगाल अंग्रेजों ने मुसलमानों को दे दिया पश्चिमी बंगाल हिंदुओं को दे दिया यह कर्जन नाम की एक अधिकारी ने 1905 में किया था माने संप्रदाय के आधार पर भारत बटे संप्रदाय के आधार पर इस देश के राज्यों का बंटवारा हो वो अंग्रेजों ने शुरू किया था 1900 5 से लेकिन हमारे क्रांतिवीर की ताकत उनका पराक्रम उनका हौसला उनकी दूर दृष्टि वह इतनी काबिले तारीफ है कि अंग्रेजों की इस चाल को उन्होंने नाकाम कर दिया जैसे ही अंग्रेजों ने 1905 में यह बंटवारा किया हिंदू मुसलमान के आधार पर लाला लाजपतराय विपिन चंद्रपाल लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ऐसे हिंदुस्तान के सारे क्रांतिकारी एक साथ एक मंच पर इकट्ठे हो कहां लाला लाजपत राय उत्तर भारत के थे कहां लोकमान्य तिलक पश्चिम भारत के थे कहां विपिन चंद्रपाल पूर्वी भारत के थे कहां अरविंदो घोष पूर्वी भारत के थे यह सारे क्रांतिकारी एक साथ इकट्ठे हो गए उत्तर दक्षिण पूर्व पश्चिम और अंग्रेजों के संप्रदाय के आधार पर बंटवारे का पूरी ताकत से विरोध किया और विरोध भी ऐसे किया कि अंग्रेजों को सरेंडर करना पड़ा इन क्रांतिवीर ने अंग्रेज को जवाब देने के लिए एक स्वदेशी आंदोलन शुरू किया और इन क्रांतिवीर का यह कहना था कि अंग्रेजों की ताकत और हैसियत इस देश में जो बढ़ी वह उनके व्यापार से बढ़ी उनका माल हमने खरीदा उनको पैसा मिला उस पैसे से उनको ताकत मिली तो इन क्रांतिकारियों का कहना था कि यह ताकत इनकी छीन लो इनका माल बिकवा इस देश में बंद करा दो और अंग्रेजों को जब पैसे नहीं मिलेंगे इस देश भारत से तो कमजोर पड़ेंगे कमजोर पड़ेंगे तब यह हमारे बात को मानेंगे सुनेंगे सारे देश में स्वदेशी आंदोलन शुरू हुआ 1905 से 1911 6 साल में स्वदेशी आंदोलन में एक करोड़ 24 लाख से ज्यादा कार्यकर्ता इकट्ठे हुए और यह उस समय के भारत की कहानी है जब भारत की कुल जनसंख्या मुश्किल से 22 करोड़ के आसपास थी और इन क्रांतिकारियों ने इन नौजवानों ने अंग्रेजी सरकार को ऐसा मजबूर किया कि 1911 में जाकर अंग्रेज सर को बंगाल का बंटवारा वापस लेना पड़ा यह अंग्रेजों के इतिहास में पहली और आखिरी घटना थी कि अंग्रेजों ने जब कोई काम किया कानून बना दिया डिवीजन ऑफ बंगाल एक्ट उस कानून को ब्रिटिश पार्लियामेंट में रद्द करना पड़ा और बंगाल का बंटवारा खत्म करना पड़ा हिंदू और मुसलमान के आधार पर देश को बांटने की जो साजिश उन्होंने की थी उसमें अंग्रेज पूरी तरह से असफल रहे और हमारे क्रांतिकारी सफल रहे सार्थक [प्रशंसा] मुझे अफसोस इस बात का है कि जिस बंटवारे को हमने 195 में खत्म करा दिया हिंदू मुसलमान के आधार पर जिस बंगाल को फिर से एक करा दिया इस देश के हिंदू मुसलमानों ने मिलकर उसी देश का बंटवारा 1947 में हम रोक नहीं पाए और वही बंटवारा हिंदू और मुसलमान के आधार पर फिर हुआ पहले बंगाल का हुआ था बाद में पूरे देश का हो गया आप पूछेंगे जी क्या कारण था क्या क्रांतिकारियों के जोश में कमी आई क्या उनका उत्साह खत्म हो गया उनके पराक्रम में कोई कमी आई ऐसा क्या हो गया कि 1905 से 1911 में हम अंग्रेजों की चाल को नाकाम करें और 1947 में अंग्रेजों की वही चाल कामयाब हो जाए उसका एक ही कारण था कि 1905 के जो क्रांतिकारी इस देश के लिए लड़ रहे थे उनके मन में सत्ता और सिंहासन का कोई लोभ नहीं था कोई लालच नहीं था उनको ना सत्ता चाहिए थी ना सिंहासन चाहिए था इस देश वह तो लड़ रहे थे किसी आदर्श की पूर्ति के लिए किसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए और आदर्श और उद्देश्य यह था कि भारत देश अखंड रहे यह टूटे नहीं किसी भी स्तर पर यह देश का बंटवारा ना हो तो आदर्श और उद्देश्य जब ऊंचे होते हैं तो ईश्वर भी उसमें मदद करता है शायद ईश्वर ने हमारी मदद की शहीदों के आदर्श बहुत पवित्र थे बहुत ऊंचे थे और 1905 का बंटवारा टालने में हम सफल रहे लेकिन 1947 तक आते-आते इस देश में महापुरुषों के चेहरे बदल चुके थे 1947 तक आते-आते कई महापुरुषों के मन में सत्ता और कुर्सी और सिंहासन का लोभ जग गया था कई महापुरुषों के मन में यह तय हो गया था कि मुझे देश का प्रधानमंत्री बनना है या उसे देश का प्रधानमंत्री बनना है यह सत्ता और सिंहासन का लोभ जब चढ़ा तो भारत के बंटवारे को हम रोक ना सके एक ही देश में दोदो लोगों ने जब दावेदारी ठोक दी कि मैं भी प्रधानमंत्री हो सकता हूं मैं भी प्रधानमंत्री हो सकता हूं उस प्रधानमंत्री पद के लालच ने इस देश को बटवारा करा दिया अन्यथा 1947 में भी यह देश बटता नहीं यह देश टूटता नहीं खंड खंड रहता माने नहीं होता सत्ता और सिंहासन का लालच आया 1947 में अपने-अपने तरीके से लोगों ने दावेदारी प्रस्तुत की और वह दावेदारी इतनी खतरनाक थी कि अंग्रेजों को समझ में आ गया कि जिनके मन में यह लोभ है अब उनको ही हम अपना इस्तेमाल करें कठपुतली की तरह से तो वही हमारे बटवारे को स्वीकार करेंगे और वही हुआ इस दो लोगों की प्रधानमंत्री पद की दावेदारी ने दो लोगों की प्रधानमंत्री पद की जिद्द ने इस देश के दो टुकड़े करा दिए एक देश में दो प्रधानमंत्री हो नहीं सकते दो देश में दो प्रधानमंत्री हो सकते हैं उस चक्कर में यह देश बटा नहीं तो बटता नहीं 1947 में भी नहीं बटता हमारे देश में यही हुआ जो गड़बड़ी का बीज डाल गया सूत्रपात कर गया 1947 के पहले के क्रांतिकारियों का सत्ता और सिंहासन का लोभ नहीं देश और आजादी के लिए सब कुछ कुर्बान यह सपना 47 तक आते आते सत्ता और सिंहासन महत्त्वपूर्ण हो जाए और अपने को कुर्बान कर देने की और अपने को बलिदान करने की बात पीछे हट जाए तो देश बटता है और वह बट गया और वहीं से खंडन शुरू हो गया इस देश के विभाजन के बीज बोए फिर विभाजन हो गया अंग्रेजों ने तो एक बहुत बड़ी चाल खेली थी कि भारत और पाकिस्तान का ही बंटवारा ना हो भारत के एक एक राज्य का अलग-अलग बंटवारा हो जाए 565 रियासतें थी हर रियासत को अंग्रेजों ने अधिकार दे दिया था कि आप चाहो तो भारत में मिलो चाहो तो पाकिस्तान में जाओ चाहो तो स्वतंत्र हो जाओ तो बहुत सारी रियासतें यह सपना देख रही थी कि हम तो अलग देश बनाएंगे जम्मू कश्मीर उसमें से एक था जूनागढ़ उसमें से एक था भोपाल उसमें से एक रियासत थी हैदराबाद उसमें से एक रियासत थी यह तैयार नहीं थे भारत में मिलने के लिए इनका सपना था कि हम अलग राष्ट्र बनाएंगे यह तो भगवान ने उस समय पर सरदार वल्लभ भाई पटेल को प्रस्तुत किया इस देश के लिए और उन्होंने 565 राजा महाराजाओं को किसी तरह से डराकर धमका कर पुछ का कर प्रेम करके मोहब्बत करके भारत में विलय करने के लिए मंजूर करा लिया वरना अंग्रेज तो बहुत खतरनाक खेल खेल रहे थे भारत को छोड़ते समय भारत के पांच 165 टुकड़े हो जाएं यह उन्होंने खेल खेला सरदार पटेल नहीं होते तो भारत आज ऐसा नहीं होता जैसा हम देख पा रहे [प्रशंसा] हैं सरदार पटेल लेकिन भारत के पाकिस्तान बनने से नहीं रोक पाए क्योंकि वहां उनकी बहुत सारी चीजें चल नहीं पाई पाकिस्तान भी नहीं बटता अगर सारी कुछ सरदार पटेल की चली होती पाकिस्तान भी अलग नहीं होता अगर सब कुछ उनकी चली होती तो जहां तक उनकी चली और जहां तक उनकी सीमा थी करने की उन्होंने भारत के बहुत सारे हिस्सों को एक कर दिया लेकिन उसके बाद की कहानी बहुत दर्दनाक है इस देश की और वह कहानी ने हमको मजबूर किया है कि हम भारत स्वाभिमान जैसा अभियान चलाए कहानी सीधी सी यह है कि आजादी आई हमारी सरकार बनी तो हमारी सरकार की प्राथमिकता क्या होनी चाहिए सीधी सधी सी प्राथमिकता यह होनी चाहिए कि शहीदों ने जो कुर्बानी देकर आजादी लाई है उनके सपने क्या हैं उनको पूरा करने के लिए सरकार काम करें यह सबसे पहली प्राथमिकता होनी चाहिए हमारे शहीदों के सपने क्या हैं छोटी-छोटी से सपने हैं उनके बहुत बड़े नहीं है मैं कुछ शहीदों के बारे में आपसे बात करना चाहता हूं एक बड़े शहीद इस देश के अमर शहीद जिनको कहा जाता है भगत सिंह उन्होंने जेल में एक डायरी लिखी आप जानते हैं भगत सिंह को फांसी की सजा हुई थी उनके दो आरोपों के आधार पर एक तो एक पुलिस अधिकारी सांडर्स को उन्होंने गोली से मार दिया था और दूसरा उन्होंने असेंबली में बम फेंका था असेंबली माने हमारी आज की यह संसद जो चलती है दिल्ली में उस जमाने में इसको असेंबली कहा करते थे तो संसद में बम फेंका था उस बम से कोई घायल नहीं हुआ था कोई मरा नहीं था बम में कोई छर्रे नहीं थे कोई गोला बारूद नहीं भरा हुआ था उसमें कुछ पर्चे भरे हुए थे कागज के और उन पर कुछ लिखा हुआ था क्या लिखा हुआ था यह लिखा हुआ था कि अंग्रेजों को भारत छोड़ देना चाहिए अंग्रेजों को भारत से चले जाना चाहिए यह लिखा हुआ था और दूसरी बात यह लिखी हुई थी कि अंग्रेजों के जाने के बाद इस देश में से अंग्रेज को भी भारत छोड़ देना चाहिए अंग्रेजों को तो भारत छोड़ना ही है उस परच में इतनी ज्यादा स्पष्टता से लिखा हुआ था कि अंग्रेजों को तो भारत छोड़ना ही है आज नहीं तो कल अगर आज अंग्रेज भारत से छोड़ते हैं तो उनकी कुछ इज्जत बची रहेगी सारी दुनिया में नहीं तो कल हम उनसे भारत छुड़वा लेंगे तो सारी दुनिया उनको थूथू करेगी जब हम उनसे भारत छुड़वा लेंगे तो दुनिया में अंग्रेजों की बेइज्जती और अपमान होगा और अंग्रेज आज अगर खुद छोड़कर चले जाएंगे तो उनका सम्मान होगा सारी दुनिया में यह स्पष्ट रूप से उस पचे पर लिखा हुआ था किसने तैयार किया था वह पर्चा हमारे देश के जो अमर शहीद भगत सिंह इनके एक सहयोगी थे मनमत नाथ गुप्त उन्होंने वो पर्चा तैयार किया था और वो पर्चा क्या था हिंदुस्तानी सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन नाम का एक संगठन बना था उस संगठन का घोषणा पत्र था इस संगठन की नीव पड़ी थी 1924 में बनारस में इसका पहला सम्मेलन हुआ था इस सम्मेलन की अध्यक्षता की थी पंडित राम प्रसाद बिस्मिल ने और चूंकि उन्होंने अध्यक्षता की थी तो उनको जीवन भर के लिए संगठन का अध्यक्ष बना दिया गया महासचिव इसके बने थे पंडित चंद्रशेखर आजाद कोषाध्यक्ष बने थे मनमत नाथ गुप्त फिर इसके प्रचार प्रसार विभाग के मंत्री बने थे सचिंद्र नाथ लाड़ी ऐसे करके क्रांतिकारियों ने यह संगठन खड़ा किया था इसका एक घोषणा पत्र जारी हुआ था कि हम यह संगठन क्यों बना रहे हैं और उस घोषणा पत्र का नाम दिया गया था द रिवोल्यूशन माने क्रांति उसमें कुछ बिंदु तय किए गए थे और वह बिंदु शहीदों के सपनों को बताते हैं पहला बिंदु यह था कि अंग्रेज भारत छोड़े दूसरा बिंदु था कि अंग्रेजों के साथ अंग्रेज भी भारत छोड़े अंग्रेजी को उन्होंने व्याख्या किया था परिभाषित किया था कि अंग्रेजों के बनाए गए सारे के सारे कानून अंग्रेजों की बनाई गई सारी की सारी व्यवस्थाएं अंग्रेजों की बनाई गई सारी की सारी नीतियां अंग्रेजों का बनाया गया पूरा का पूरा तंत्र यह भी भारत से जाना चाहिए खाली अंग्रेज भारत छोड़कर चले जाएं इतने से बात नहीं बनेगी अंग्रेजों की नीतियां अंग्रेजों के कानून अंग्रेजों के नियम अंग्रेजों की व्यवस्थाएं अंग्रेजों का सब कुछ जो तंत्र में समाहित है यह भी खत्म होना चाहिए यह भी जाना चाहिए और आजादी के बाद भारत में स्वदेशी तंत्र आना चाहिए स्वराज्य आना चाहिए स्वतंत्र होना चाहिए स्वतंत्र शब्द पर जोर था उस घोषणा पत्र में स्वतंत्र माने अपना तंत्र स्व माने अपना तंत्र माने व्यवस्था हमारी अपनी व्यवस्था होनी चाहिए हमारे अपने कानून होने चाहिए यह सब कुछ रिवोल्यूशन में लिखा गया था और यह रिवोल्यूशन जारी हुआ 1924 में यह बहुत बड़ा घोषणा पत्र है लेकिन इसका संक्षिप्त रूप शहीदे आजम भगत सिंह ने असेंबली में फेंका था बम के साथ संक्षिप्त रू और उन्होंने कहा था कि इस कार्य के लिए अगर हमको अपना बलिदान देना है कुर्बानी देना है तो भी हमें मंजूर है तो अंग्रेजी कानून अंग्रेजी व्यवस्था अंग्रेजी तंत्र सब खत्म करना था यह हमारे देश के शहीदों का सपना था खाली अंग्रेजों को भगा देना है इतने से बात नहीं बनने वाली थी महात्मा गांधी ने तो आजादी के समय 1946 में यह बात कही थी बहुत स्पष्टता से किसी अंग्रेज पत्रकार ने जो लंदन से आया था गांधी जी का इंटरव्यू लेने के लिए बीबीसी का पत्रकार था उसने जब गांधी जी को यह पूछा कि आप क्या चाहते हैं तो उन्होंने स्पष्ट कहा कि अंग्रेज चाहे तो भारत में मेहमान बन के रह सकते लेकिन हमें अंग्रेज को इस देश से विदा करना है अंग्रेज चाहे तो इस देश में रहे मेहमान बनकर जब तक उनकी इच्छा हो हम उनके मेहमान बनकर इस देश में रहने पर कोई पाबंदी नहीं लगाएंगे लेकिन अंग्रेजों ने जो तंत्र बना दिया है इस देश में गुलामी का जो कानून बना दिए हैं वह तो हमें नहीं चाहिए एक मिनट के लिए भी उसे तो हम खत्म करेंगे इस देश अब आप जानते हैं महात्मा गांधी का रास्ता था अहिंसा वाला शहीदे आजम भगत सिंह का रास्ता था हिंसा वाला दो अलग अलग रास्तों से चलने वाले क्रांतिकारी मैं इन दोनों को कैची जैसा मानता हूं कैची होती है ना उसमें दो फाले होते हैं दोनों ही काटते हैं एक हिंसा से और एक अहिंसा से यह दोनों ही तरह के क्रांतिकारी भारत की आजादी की कैची जैसे थे जो काटना चाहते थे इस पूरी गुलामी की बेड़ियों को एक अपने तरीके से दूसरा अपने तरीके से तरीके अलग थे उद्देश्य एक ही था यह कितनी अद्भुत साम्यता है कि शहीद आजम भगत सिंह 1924 में राम प्रसाद बिस्मिल 1924 में चंद्रशेखर आजाद 1924 में जो बात कह रहे हैं गांधी जी उसी को कह रहे हैं 1946 में वह कह रहे हैं हमें अंग्रेज नहीं चाहिए और 1924 में यह क्रांतिकारी कह रहे हैं हमें भी अंग्रेज नहीं चाहिए स्वतंत्रता चाहिए स्वदेशी तंत्र चाहिए स्वराज्य चाहिए इसका मतलब यह है कि अहिंसा वादी क्रांतिकारी हो या हिंसा वादी क्रांतिकारी हो सपने दो दोनों के एक ही थे कार्य दोनों का एक ही था उद्देश्य दोनों का एक ही था बस उद्देश्य को हासिल करने का तरीका अलग-अलग था हमारे देश में शहीदे आजम भगत सिंह वाले रास्ते पर चलने वाले एक और महान क्रांतिकारी हुए सुभाष चंद्र बोस 1940 में जब उन्होंने भारत छोड़ा और उनके कुछ मित्रों ने उनसे पूछा कि आप भारत छोड़कर कहां जाना चाहते हैं तो उने कहा कि मुझे कोई फौज बनानी है जो भारत पर राज कर रहे अंग्रेजों के ऊपर हमला करे और इस भारत को सशस्त्र क्रांति के रास्ते से आजाद करें इसके लिए मैं भारत छोड़ना चाहता हूं तो उनके मित्र कहा करते थे कि मात्र इसलिए कि अंग्रेजों पर हमला करें और अंग्रेज हार के चले जाए उन्होंने कहा इतना ही नहीं है अंग्रेज चले जाएं उस देश की व्यवस्था को बदलने का काम शुरू किया जाए इसके लिए मैं भारत छोड़ना चाहता हूं और छोड़ा उन्होंने भारत बनाई आजाद हिंद फौज और किया हमला अंग्रेजों के ऊपर और कुछ हद तक वह सफल और सार्थक भी हुए उसमें मैं आपके दिमाग में एक ही बात डालना चाहता हूं कि हिंसा वाले या अहिंसा वाले दोनों ही रास्ते पर चलने वाले क्रांतिकारियों के मन में एक बात स्पष्ट थी कि हमें वह भारत तो नहीं ही चाहिए जो अंग्रेजों ने अपने लिए बनाया हमें तो कुछ नया भारत चाहिए अब होना क्या चाहिए यह था आजादी मिली 15 अगस्त 1946 को 47 को माफ करिए 46 में हमारे देश में यह घोषणा हो गई थी कि अंग्रेज चले जाएंगे और उसके बाद हमारी अंतरिम सरकार बन गई थी 17 सितंबर 1946 से इस देश में एक अंतरिम सरकार का गठन हो गया था और उसने कामकाज अपना संभाल लिया था और अंग्रेजों की तैयारी थी कि यह जो अंतरिम सरकार है इसी को सत्ता का हस्तांतरण करके वह जाएंगे तो 1946 में तय हो गया अंग्रेज चले जाएंगे घोषणा भी हो गई तो सरकारों को क्या करना चाहिए था कि सारे शहीदों के वो हिंसा वाले रास्ते के हो या अहिंसा वाले रास्ते के उनके सपनों को उनके आदर्शों को उनके घोषणा पत्रों को इकट्ठा करके सरकार को अपना नीति पत्र और घोषणा पत्र जारी करना चाहिए था कि भाई आजादी के बाद तो हम तो इनके सपनों का भारत बनाना चाहते हैं और उसी के लिए हमने यह आजादी पाई है लेकिन ऐसा नहीं हुआ शहीदों के विचारों को उनकी घोषणा पत्रों को उनकी नीतियों को उनके कार्यक्रमों को सब दरकिनार कर दिया गया और भारत को एक ऐसे रास्ते पर डाल दिया गया जिस रास्ते पर जाने के लिए हमारे शहीद कभी भी तैयार नहीं अब दर्द क्या है इस देश का वह यह है कि हम भारतवासी हैं आज भी विदेशी व्यवस्थाओं में जीवित है हम एक तरफ कहते हैं आजाद हो गए हैं लेकिन गुलामी के सारे के सारे कानून अभी भी हमारे ऊपर लद एक भी कानून इस देश ने आजादी के बाद खत्म नहीं किया जो अंग्रेजों ने गुलामी के लिए लाया इसलिए भारत स्वाभिमान मानता है कि यह आजादी अधूरी है यह स्वराज्य अधूरा है यह स्वतंत्रता नहीं है यह एक तरह की परतंत्रता और गुलामी की ही स्थिति है बस अंतर इतना ही हो गया है कि पहले इस देश पर राज करने वाले गोरे अंग्रेज थे अब राज करने वाले कुछ काले अंग्रेज पैदा हो गए हैं इससे ज्यादा कोई अंतर इस देश की व्यवस्थाओं में नहीं आया मैं कुछ उदाहरण से मेरी बात स्पष्ट करना चाहता हूं शहीदे आजम भगत सिंह को फांसी हुई थी आप सभी जानते हैं उन्होंने एक अंग्रेज अधिकारी जिसका नाम था जेपी सांडर्स उसको गोली मार दी थी लाहौर में सांडर्स को गोली क्यों मारी थी सांडर्स व अंग्रेज अधिकारी था जिसने इस देश के एक महान क्रांतिकारी लाला लाजपत राय के सिर पर लाठियों से इतना वार किया था कि लाला जी को ब्रेन हेमरेज हुआ था और उनकी मृत्यु हुई सांडर्स नाम के जिस अधिकारी ने लाला लाजपत राय पर लाठी चार्ज किया वह अधिकारी को जब पूछा गया कि तुमने लाला लाजपत राय पर लाठी चार्ज क्यों किया तो उसने कहा मेरा अधिकार था मेरा कर्तव्य था उसको जब पूछा गया कि तुम्हारा अधिकार कहां से आया तो उसने कहा एक कानून इस देश में लागू है जिसका नाम है इंडियन पुलिस एक्ट उसने मुझे अधिकार दिया है लाठी चार्ज करने का तो जड़ कहां थी इंडियन पुलिस एक्ट नाम के कानून और इंडियन पुलिस एक्ट का जब कानून इस देश में बना और लागू किया गया तो वह साल था सन 1860 1860 में अंग्रेजों की सरकार ने यह कानून इस देश में लागू किया था इंडियन पुलिस एक्ट यह कानून लंदन से पास हुआ था ब्रिटिश पार्लियामेंट से इसको पास किया गया था और भारत में इसको लागू किया गया ब्रिटिश पार्लियामेंट में इस कानून के समय की जो बहस हुई थी उसके सारे दस्तावेज हमने निकाले और उनको बड़े बारीकी से और ध्यान से पढ़ा अंग्रेजों ने यह पुलिस बनाई क्यों क्योंकि 1860 के पहले इस देश में पुलिस नहीं होती थी आज हम बोलते हैं ना पुलिस कानून व्यवस्था का रक्षण करने के लिए है 1860 में जब पुलिस बनी थी तो उसका यह उद्देश्य नहीं था कानून व्यवस्था का रक्षण करना उनका उद्देश्य था भारत भारत के क्रांतिकारियों को जमकर मारना पीटना और उनके ऊपर अत्याचार करना इसलिए इस कानून में एक व्यवस्था की गई कि हर पुलिस अधिकारी को राइट टू ऑफेंस दिया गया किसी भी भारतीय क्रांतिकारी को राइट टू डिफेंस नहीं मिला इसको मैं सरल भाषा में समझाता हूं राइट टू ऑफेंस क्या होता है और राइट टू डिफेंस का मतलब क्या है अगर कोई अंग्रेज पुलिस अधिकारी के दिल में आए कि मुझे इसको लाठी से पीटना है वो पीटेगा यह उसका राइट टू ऑफेंस है मारेगा पीटेगा सिर फोड़ देगा टांगे तोड़ देगा लह लुहान कर देगा आपको यह उसका राइट टू ऑफेंस है लेकिन जो पिट रहा है अगर वह लाठी को पकड़ेगा तो उसका अधिकार उसको नहीं है राइट टू डिफेंस नहीं है उस राइट टू डिफेंस नहीं है इसका माने आप पिटते रहिए अगर आपने लाठी पकड़ी तो कानून कहता है कि आपके खिलाफ मुकदमा होगा कि आपने एक पुलिस अधिकारी को ड्यूटी करने से रोका उसकी ड्यूटी क्या है आपका सिर फोड़ देना लाठियों से टांगे तोड़ देना यह उसकी ड्यूटी है उसका कर्तव्य है और आप अगर लाठी पकड़ रहे हैं अपने बचाव के लिए तो आप उसको ड्यूटी करने से रोक रहे हैं तो मुकदमा आपके ऊपर चलेगा ना कि पुलिस अधिकारी के ऊपर ऐसा कानून इंडियन पुलिस एक्ट तो के खिलाफ जब अदालत में बात गई और सांडर्स ने यह जवाब दिया कि मुझे तो कानून ने अधिकार दिया था मैंने लाला लाजपत राय के सिर पर लाठिया मारी तो यह कानून है मैंने उसका पालन किया मैंने कोई अपराध नहीं किया और सांडर्स बाइज्जत बरी हो गया उसको कोई सजा नहीं मिली क्योंकि अदालत ने कहा कि हम तो कानून के आधार पर फैसला कर सकते हैं न्याय नहीं दे सकते न्याय देना एक अलग चीज होती है कानून के आधार पर फैसला करना बिल्कुल अलग चीज होती है न्याय तो यह कहता है कि जिस सांडर्स ने लाला जी को मारा लाठियों से सिर फोड़ दिया उस अधिकारी के खिलाफ कोई मुकदमा होना चाहिए था उसको जेल में होना चाहिए था क्योंकि लाला जी ने कोई कानून नहीं तोड़ा था इस देश का जब उनके ऊपर लाठियां बरसाई गई थी वह तो एक शांति सभा करने की तैयारी कर रहे थे कोई काम कान का उल्लंघन नहीं कर रहे थे वह हिंदुस्तान की और अंग्रेजी सरकार की किसी संपत्ति का नुकसान नहीं कर रहे थे कोई घर नहीं जला रहे थे कोई बस को नहीं तोड़ रहे थे कोई पुलिस जीप को नहीं तोड़ रहे थे किसी पुलिस अधिकारी के ऊपर कोई वार नहीं कर रहे थे वह तो शांति के साथ रोलेट एक्ट भारत में लागू ना हो उसके खिलाफ एक सभा की तैयारी कर रहे थे उस समय लाठियां बरसाई गई बिना उनको चेतावनी दिए हुए और उसमें उनकी मौत हुई मुकदमा चला तो सांडर्स बरी हो गया क्योंकि कानून अंग्रेजों का बनाया हुआ था उस कानून के आधार पर अदालत ने फैसला दे दिया कि सांडर्स का कोई कसूर नहीं है बाद में उसका प्रमोशन करने की बात हुई तब भगत सिंह को गुस्सा आया और शहीद आजम भगत सिंह को अकेले गुस्सा नहीं आया उनके जो सहयोगी थे चंद्रशेखर आजाद उनको भी गुस्सा आया और उन्होंने कहा किय अंग्रेजी शासन और न्याय व्यवस्था में हमको इतना भी न्याय नहीं मिल सकता कि हम हमारे क्रांतिवीर लाला लाजपत राय की मौत के बारे में सोच सके समझ सके और उसका कोई रास्ता निकाल सके समाधान निकाल सके इतना भी नहीं मिल सकता तो भगत सिंह ने संकल्प ले लिया कि अब मुझे कानून अपने हाथ में लेकर न्याय करना पड़ेगा और उन्होंने वह किया सांडर्स को उन्होंने गोली से मार दिया मारने की कहानी वह आप सबको मालूम है इसलिए सुनाना नहीं चाहता और गुस्सा इतना था भगत सिंह को कि एक ही गोली में सांडर्स गया था फिर भी दो गोली और चलाई उन्होंने उसके शरीर पर इतना गुस्सा और उसके बाद भगत सिंह ने ऐलान किया कि अब मुझे फांसी हो जाए तो भी कोई गम नहीं है क्योंकि मुझे लगता है कि मैंने न्याय ले लिया अब फांसी हो जाए तो कोई अपने साथियों को एक दिन मीटिंग में बात करते हुए भगत सिंह कहते हैं कि यह सांडर्स का मरना जरूरी था नहीं तो यह दूसरे किसी लाला लाजपत राय को मारता तीसरे किसी लाला लाजपत राय को मारता चौथे किसी लाला लाजपत राय को मारता और हमारे पास लाला जी जैसे लोग बहुत कम हैं जो देश की आजादी के बारे में इतना काम कर रहे हैं इसलिए हम दूसरे लाला लाजपतराय को खो नहीं सकते उससे बेहतर है कि हम सांडर्स को विदा करें इसलिए सांडर्स का मरना जरूरी था और उसके बाद की घटना तो आप जानते हैं असेंबली में बम फेंका तो वो घोषणा पत्र अंग्रेजों तक पहुंचे इसके लिए इन दोनों ही आधार पर फांसी हुई तो मुझे जो कहना है वह यह कि शहीद आजम भगत सिंह को जिस कारण से फांसी हुई वह कारण तो 15 अगस्त 1947 के बाद बदल जाना चाहिए था जिस कानून ने लाला जी के सिर पर लाठियां बरसाई वह कानून तो जला दिया जाना चाहिए था इस देश में सांडर्स जैसे अधिकारियों को जो राइट टू ऑफेंस दिया गया आजादी के बाद किसी पुलिस अधिकारी को यह राइट टू ऑफेंस कैसे दिया जा सकता है जो अंग्रेजों ने कभी दिया अपने अधिकारियों का इस पर बहस होनी चाहिए थी लोकसभा में लेकिन दुख और दुर्भाग्य इस देश का यह है कि जिस इंडियन पुलिस एक्ट के आधार पर सांडर्स ने लाला जी को लाठियां मार मार के शहीद कर दिया वह इंडियन पुलिस एक्ट आज भी इस देश में चल रहा है और उसमें कोई कॉमा फुल स्टॉप का बदलाव नहीं हुआ है इसलिए हम कहते हैं भारत स्वाभिमान की तरफ से कि आजादी अधूरी है स्वतंत्रता आई नहीं है बस अंतर इतना ही हो गया है कि पहले गोरे अंग्रेजों की पुलिस लाठी चार्ज किया करती थी अब काले अंग्रेजों की पुलिस लाठी चार्ज करती है होता है कि नहीं इस देश आप अपनी कोई संवैधानिक मांगों को मानने के लिए मनवाने के लिए आप अपने अपने मूल अधिकारों की रक्षा करने के लिए जब भी सरकार के सामने जाते हैं पुलिस बर्बरता से लाठियों से पीटती है मारती है सिर फोड़ देती है टांगे तोड़ देती है यह आज भी हो है मन में अभी थोड़े दिन पहले की एक सच्ची घटना सुनाता हूं मैं टेलीविजन बनाया है जिसका नाम है नेशनल ब्लाइंड एसोसिएशन राष्ट्रीय अंध लोगों का संगठन जो आंखों से देख नहीं सकते उन अंधे लोगों के संगठन की तरफ से दिल्ली के जंतर मंतर पर एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था कार्यक्रम कुछ नहीं था अंधों ने सरकार के सामने अपनी मांग रखनी थी और उनकी मांग बिल्कुल वाजिब थी और उनकी मांग साधारण सी थी कोई बहुत बड़ी मांग भी नहीं थी कि हर एक अंधे के साथ एक ऐसे व्यक्ति को यात्रा करने का मुफ्त अधिकार दिया जाए जो उसको सड़क दिखाता है पार कराता है साधारण सी मांग थी कोई बड़ी मांग नहीं थी इस पर जंतर मंतर पर अंधे लोग इकट्ठे हुए और उन्होंने कोई सरकार के सामने ज्ञापन रखने की बात सोची पुलिस ने उनके ऊपर बर्बरता से लाठी चार्ज किया 17 लोगों के सिर फाड़ दिए सिर फट गए 17 लोग और उस दिन का दृश्य यह था कि अंधों के साथ जिनको दिखाई देता था वह तो भाग लिए इधर-उधर की गली में क्योंकि उनको रास्ता पता था लेकिन अंधे तो भाग नहीं सकते वह देख नहीं सकते उनके तो सिर फट गए इस देश में उस दिन मैंने सोचा क्या हम स्वतंत्र हो गए हैं क्या हम आजाद हो गए हैं इस देश में कोई स्वराज्य आ गया है आजादी के 62 साल के बाद अगर यह देखना पड़ रहा है हमको अपनी आंखों से एक दूसरी घटना सुनाता हूं हमारे देश में विकलांग लोगों का एक संगठन है जैसे अंधों का है विकलांगों का जिनको कभी पोलियो हो गया जिनके पांव खराब हो गए पांव सूख गए वह चल नहीं सकते वह साइकिल रिक्शा से चलते तो विकलांग लोगों का एक एसोसिएशन उन्होंने कोई एक कार्यक्रम करने का तय किया और उस कार्यक्रम में एक उन्होंने रैली निकाली उस रैली के ऊपर पुलिस का लाठी चार्ज हुआ और विकलांग जो भाग नहीं सकते बच नहीं सकते उनके सिर फूटे उस एक तीसरी घटना सुनाता हूं आपको हिंदुस्तान में राजस्थान एक नाम का राज्य है उस राजस्थान राज्य के कुछ किसानों ने एक संकल्प लिया कि हमारे गांव को पीने का पानी मिलना चाहिए हमारे खेत को पीने का पानी मिलना चाहिए इसके लिए कोई बड़ा कार्यक्रम हो क्योंकि राजस्थान सरकार ने अभी थोड़े दिन पहले एक फैसला लिया था कि गांव-गांव में शराब की दुकाने तो खोली जाएंगी पीने का पानी मिले या ना मिले और बहुत दुख और अफसोस है कि यह फैसला जिन्होंने किया था वह वसुंधरा राज सिंधिया की सरकार थी राजस्थान उनका फैसला था कि गांव-गांव में शराब की दुकानें खुले लोगों को शराब मिले पीने को पिलाने को शराब में डुबो दो पूरे राजस्थान को यह एक ऐसी पार्टी की सरकार का फैसला था जो भारतीयता की बात करते हैं राष्ट्रभक्ति की बात करते हैं देशभक्ति की बात करते हैं संस्कृति की बात करते हैं सभ्यता की बात करते हैं भारतीय सभ्यता में शराब में डूब जाएं हम सब और डुबो दे सबको यह कौन सी पुस्तक में लिखा है कौन से वेदों में लिखा है सरकार का फैसला था किसानों ने विरोध किया किसानों ने कहा हमको शराब नहीं चाहिए हमको तो पानी चाहिए हमको शराब नहीं चाहिए हमारे खेत को पानी चाहिए उसके लिए उन्होंने कोई रैली निकाली तो पुलिस ने उस रैली के ऊपर गोलियां चलाई और बी सियों किसानों की मृत्यु हो गई उसी क्षण उस दिन मैंने अपने ने आपसे पूछा देश आजाद हो गया है देश स्वतंत्र हो गया है इस देश के अन्नदाता के ऊपर इस देश के उत्पादन कर्ता सबसे बड़े उत्पादन कर्ता किसान के ऊपर अगर इस देश की नौकर पुलिस गोली चलाती है नौकर मालिक की स्थिति में आता है और मालिक नौकर की स्थिति में आ जाता है कैसी आजादी है कौन सी स्वतंत्रता इस देश और यह राजस्थान सरकार का अकेला कहानी नहीं है बंगाल सरकार की कहानी भी ऐसी है वो बीजेपी की सरकार थी वहां कम्युनिस्टों की सरकार सिंगूर नाम का एक गांव है वहां के किसानों ने अपनी जमीन बचाने के लिए जमीन की सुरक्षा करने के लिए कोई आंदोलन छेड़ा सरकार जबरदस्ती उनकी जमीन छीनना चाहती थी किसान जमीन देना नहीं चाहते थे झगड़ा सरकार और किसानों का हुआ सरकार की पुलिस ने किसानों पर गोलियां चलाई 17 किसान एक ही दिन एक ही समय में मारे गए जमीनें छीनकर एक बड़ी कंपनी को बेची गई वहां झगड़ा हुआ और उस दिन फिर सोचने के लिए मजबूर होना पड़ा कि बीजेपी की सरकार की पुलिस हो या कम्युनिस्ट सरकार की पुलिस हो पुलिस एक ही है पुलिस का चरित्र एक ही है पुलिस का कानून एक ही है पुलिस की व्यवस्था अगर कांग्रेस की सरकार होती तो भी पुलिस ऐसे ही काम करती है इसका मतलब यह है कि सरकारें बीजेपी कांग्रेस जनता दल सीपीएम सीपीआई की भले बदलती रहे पुलिस व्यवस्था नहीं बदलती वह वैसी की वैसी ही चलती है जो 150 पने साल पहले अंग्रेजों ने शुरू की थी अगर पुलिस व्यवस्था 150 पने साल पुरानी है और पुलिस का कानून 1860 के साल का है और वह आज भी चलता है आजादी के 62 साल के बाद तो हमको भारत स्वाभिमान की तरफ से यह कहना पड़ता है कि आजादी अधूरी है स्वतंत्रता आई नहीं है स्वराज्य स्थापित हुआ नहीं है इसलिए हमको भारत स्वाभिमान की जरूरत पड़ी कब बदलेगा यह पुलिस कानून और क्यों नहीं बदलना चाहिए इसको जिस पुलिस कानून के अत्याचारों के चलते लाखों भारतवासियों को शहादत देनी पड़ी हो वह पुलिस कानून आजादी के बाद क्यों नहीं बदलना चाहिए क्यों वही कानून चलना चाहिए इस देश एक और उदाहरण देता हूं आपको अंग्रेज ने 1860 में एक और कानून बनाया था जैसे यह पुलिस एक्ट बनाया ना ऐसे एक और कानून बनाया था उसका नाम है इंडियन सिविल सर्विसेस एक्ट इसको आजकल हम कहते हैं इंडियन एडमिनिस्ट्रेटिव एक्ट कलेक्टर नाम का एक अधिकारी अंग्रेजों ने नियुक्त किया 1860 में उसका काम क्या था भारत के किसानों से पैसे इकट्ठे करना भारत के व्यापारियों से पैसे इकट्ठे करना भारत के उद्योगपतियों से पैसे इकट्ठे करना और अंग्रेजी सरकार को कोश में भरना यह काम था इसलिए उसका नाम दिया गया कलेक्टर कलेक्टर माने टू कलेक्ट द मनी पैसे इकट्ठे करने वाला अधिकारी कलेक्टर बना इस देश में अंग्रेजों ने उसके लिए कानून बना दिया इंडियन सिविल सर्विसेस एक्ट इस कानून के आधार पर एक परीक्षा ली जाती थी उस परीक्षा में अंग्रेजों को सिलेक्ट किया जाता था और भारत में कलेक्टर बनाकर नियुक्त किया जाता था उनका मूल काम था गांव-गांव गली-गली नगर नगर से धन पैसा वसूल करके अंग्रेजों के खजाने में जमा करते रहना इसके लिए वह हुआ करता था अब आजादी आ गई 15 अगस्त आ गया 1947 हो गया वो कलेक्टर तो अभी भी जिंदा है इस देश में वह कानून तो अभी भी जिंदा है इस देश में बस अंतर इतना है कि उसको पहले इंडियन सिविल सर्विसेस एक्ट कहा करते थे अब उसको इंडियन एडमिनिस्ट्रेटिव एक्ट कहा जाता है पोस्ट तो वही है अधिकार तो वही है व्यवस्था तो वही है उसमें कोई बदलाव नहीं जितने अधिकार इस देश में अंग्रेजों के कलेक्टर को हुआ करते थे उससे कुछ कम अधिकार नहीं है आजादी के 62 साल के बाद अब अंग्रेजों के समय के कलेक्टर का थोड़ा चेहरा साफ सुथरा हो जाए थोड़ा देखने में अच्छा लगे तो नाम उसका कर दिया डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट कहीं कहीं उसको कहते हैं डिप्टी कमिश्नर काम उसका वही है जो अंग्रेजों के जमाने में था व्यवस्था वही है जो अंग्रेजों के जमाने में थी और हमारे देश में यह जो नए कलेक्टरों को तैयार किया जाता है उनका पाठ्यक्रम वही है जो 1860 में था वही सिलेबस पढ़ाया जाता है उनको जो अंग्रेजों के जमाने में पढ़ाया जाता था हमारे देश में एक मसूरी नाम का छोटा सा स्थान है वहां पर एक कॉलेज चलता है यह कलेक्टर लोगों की ट्रेनिंग के लिए मैं कभी-कभी वहां व्याख्यान देने के लिए जाता हूं दुर्भाग्य से मेरे जैसे लोगों को कई बार वह बुला लेते हैं तो मैं उनसे यही पूछता हूं कि तुम पहले तैयारी करते थे अंग्रेजों के जमाने में वही तैयारी अब क्यों करते हो अंग्रेज तो चले गए इस देश से व कहते हैं राजीव भाई क्या करें कानून नहीं बदला सिलेबस नहीं बदला जो सिलेबस हम पढ़ते थे उस समय वही आज पढ़ते हैं कानून भी वही है इतिहास भी वही पढ़ते हैं जो अंग्रेज लिखकर छोड़ गए थे अपना इतिहास भी नहीं पढ़ाया जाता इसलिए लगता नहीं कि कोई आजादी और स्वतंत्रता इस देश को मिल गई और एक उदाहरण देता हूं 1860 में अंग्रेजों ने और एक कानून बनाया था उसका नाम है इंडियन इनकम टैक्स एक्ट यह 1860 में बना और इसके थोड़े दिन पहले एक कानून बनाया था सेंट्रल एक्ससाइज एकट केंद्रीय उत्पाद कर का कानून वह थोड़ा पहले आया और उसके 1860 में दूसरा आ गया इंडियन इनकम टैक्स एक्ट इन दोनों कानूनों को बनाने के समय ब्रिटिश पार्लियामेंट में लंबी बहस हुई है यह जानना बहुत जरूरी है हमको कि यह कानून आया क्यों अंग्रेजों की संसद में बात हो रही है और यह अंग्रेज अधिकारी बात कर रहे हैं वह क्या कह रहे हैं वह कह रहे हैं 1857 में भारत में जो क्रांति हुई थी उसको वह विद्रोह कहते थे क्रांति नहीं कहते थे विद्रोह कहते थे सैनिकों का विद्रोह था ऐसा वह बोला करते थे तो अंग्रेजी संसद में कह रहे हैं कि वह सैनिकों का जो विद्रोह हुआ था 1857 में उस विद्रोह ने हमारी कमर तोड़ दी यह खुद अंग्रेज कह रहे हैं अपनी संसद कमर कैसे टूटी 10 मई 1857 को शुरुआत हुई मेरठ के एक छोटे से मोहल्ले से भारतवासियों का गुस्सा इतना तेज था उबाल इतना ज्यादा था कि अंग्रेज अधिकारियों के घर जला दिए मेरठ में 10 मई 1857 की शाम 5 बजे के आसपास और कई अंग्रेज अधिकारी जलकर उसमें मर गए जो भागे घरों से निकलकर मोहल्ले और पड़ोस के लोगों ने उनको पीट पीट के मार डाला उनको हंसिए से काट डाला गर्दन काट द मेरठ में इतनी बड़ी क्रोध की अग्नि फैली थी उस सम अगले दिन दिल्ली में शुरू हो गया 11 मई 12 मई 13 मई 15 मई तक दिल्ली के सारे अंग्रेजों का कत्लेआम हो चुका था एक अंग्रेज दिल्ली में पाच दिन के बाद जिंदा नहीं ब बचा फिर जालंधर में शुरू हो गई होशियारपुर में शुरू हो गई कपूरथला में शुरू हो गई फिर यह क्रांति की लहर बरेली पहुंची शाजापुर पहुंची सहारनपुर पहुंची भारत के 350 स्थानों पर यह क्रांति 1 सितंबर 1857 तक फैल चुकी थी परिणाम क्या हुआ अंग्रेजों के दस्तावेज बताते हैं कि 3 64000 से ज्यादा अंग्रेज इसमें मारे गए इस क्रांति और भारतवासियों ने उनको हसि हों से काट दिया या लाठियों से पीट कर मार दिया ऐसी स्थिति थी माने साधारण भारतवासियों के मन में इतना गुस्सा और इतना प्रतिशोध था कि उन्होंने अंग्रेजों को खत्म किया यह गुस्सा क्यों था उसके कई कारण थे उनमें सबसे बड़ा कारण यह था कि अंग्रेज बे तहा इस देश को लूट रहे थे बेइंतहा लूट रहे थे धन संपत्ति लोगों का लूट लूट कर इस देश से लेकर लंदन जा रहे अंग्रेज कितना लूट रहे थे इस देश को एक ही उ देता हूं सारे उदाहरण देने का तो समय नहीं है वक्त नहीं है एक अंग्रेज था उसका नाम था रॉबर्ट क्लाइव उसने कलकाता लूटा था और कलकत्ते को लूटकर जो धन जमा हुआ था वह लेकर लंदन गया था रॉबर्ट क्लाइव की ब्रिटिश पार्लियामेंट में पेशी हुई थी और उसको इंग्लिश प्राइम मिनिस्टर ने पूछा कि तुम भारत से क्या लेकर आए तो उसने कहा भारत से नहीं लाया भारत के एक राज्य के एक शहर के एक इलाके से कुछ लेकर आया करेक्शन किया उसने प्राइम मिनिस्टर के स्टेटमेंट उसने कहा पूरे भारत से लाना तो मेरे बस की बात नहीं है और हम अंग्रेजों को हजार साल लगेंगे तब पूरे भारत से कुछ हम ला पाएंगे मैंने तो भारत का एक राज्य बंगाल और उसका एक शहर कलकत्ता और उसका एक छोटा सा इलाका उतना ही लूटा है और वह धन में यहां लेकर आया तो ब्रिटिश प्राइम मिनिस्टर पूछ रहा है कितना धन लेके आए उसने कहा गिना नहीं है गिनती नहीं की है तो अंदाजा बता दो तो वह कहता है कि आप अंदाजा लगाना चाहते हैं तो इससे लगा लो कि भारत से जो धन मैं लूटकर लाया हूं वह सोने के सिक्के हैं चांदी के सिक्के हैं हीरे जवाहरात हैं और बेशकीमती धातुएं हैं यह सब भर भर के लाने के लिए मुझे पानी के 900 जहाज लगे और यह घटना जिस समय की है उस समय का पानी का एक जहाज इतना बड़ा होता था कि उसमें 60 से 70 मीट्रिक टन सामान आता था आज जो पानी के जहाज है उनमें 250 से 1000 मेट्रिक टन सामान आता है कुछ-कुछ जहाज तो ऐसे भी हैं जिनमें ईती हज मेट्रिक टन सामान आता है इस समय के जहाज बहुत विशाल काए हैं लेकिन अंग्रेजों के जमाने के जो जहाज हुआ करते थे 60 से 70 मेट्रिक टन मटेरियल लेकर जाते थे अब एक जहाज में 60 से 70 मेट्रिक टन सामान आए एक मेट्रिक टन में 1000 किलोग्राम हो और ऐसे 900 जहाज भरकर सोने के सिक्के चांदी के सिक्के हीरे जवाहरात अगर एक अंग्रेज लेकर जाए तो कितनी बड़ी लूट है अंदाजा लगाइए और ऐसी लूट किसी एक अंग्रेज ने नहीं की थी जितने अंग्रेज आए सबने लूटा इस देश को दस्तावेज बताते हैं कि यह अंग्रेज आया जिसका नाम रॉबर्ट क्लाइव वो लूट के ले गया सात साल वो इस देश में रहा लूटता रहा फिर उसके बाद वॉरेन हेस्टिंग्स आया उसने लूटा फिर उसके बाद कर्जन आया उसने लूटा फिर लिलिथ को आया उसने लूटा फिर लॉरेंस आया उसने लूटा फिर डलहौजी आया उसने लूटा फिर विलियम वेंटिंग आया उसने लूटा और यह लूट का सिलसिला तब तक चलता रहा जब लॉर्ड माउंट बेटन इस देश का आखिरी गवर्नर जनरल बन के आया तो रॉबर्ट क्लाइव से शुरू होकर और माउंट बेटन तक अंग्रेजों के 84 गवर्नर जनरल इस देश में आए सबने लूटा किसी ने सा साल किसी ने 10 साल किसी ने 12 साल किसी ने साल किसी ने तीन साल और यह सारा धन इकट्ठा हो होकर लंदन पहुंच गया इस धन की ताकत पर अंग्रेजों ने औद्योगिक क्रांति की वरना इंग्लैंड के पास औद्योगिक क्रांति करने के लिए पूंजी नहीं थी एक अंग्रेज की डायरी का एक वाक्य सुनाता हूं उस अंग्रेज का नाम था जेम्स वट आपने सुना होगा भाप के इंजन का आविष्कार उसने किया जेम्स वट अपनी डायरी में लिखता है कि अगर मेरा जन्म ईस्ट इंडिया कंपनी के भारत प्रवास के पहले हो गया होता तो मैं और मेरा आविष्कार दोनों ही मर गए होते डायरी में आगे वह लिख रहा है कि मैं और मेरा आविष्कार क्यों मर गए होते तो जेम्स वट कहता है कि किसी भी आविष्कार को फलीभूत होने के लिए औद्योगिक तकनीकी में बदलने के लिए बहुत बड़े पूंजी निवेश की आवश्यकता होती है बहुत धन की आवश्यकता होती है और वह धन हमारे इंग्लैंड के पास कभी नहीं होता जो ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारत को नहीं लूटा होता अब मुझे समझ में आया यह डायरी के दो वाक्य पढ़ने के बाद कि सारे अंग्रेज आविष्कारक जो सफल हुए वो प्लासी के युद्ध के बाद ही सफल हुए जब भारत से लूटकर धन उन्होंने लंदन में जमा करना शुरू किया तब उस धन से उन्होंने उद्योग बनाना शुरू किया तब उस धन से उनके यहां औद्योगिक क्रांति आई वरना तो भुखमरी का शिकार था इंग्लैंड जब ईस्ट इंडिया कंपनी भारत आई थी तो इंग्लैंड सबसे गरीब देश था दुनिया का इंग्लैंड के इतिहासकारों ने इंग्लैंड के इतिहास में लिखा है कि 15वीं शताब्दी और 16वीं शताब्दी में इंग्लैंड में साढ़े तीन करोड़ लोग भूख से मर गए थे इतना बुरा हाल था इंग्लैंड का कुल आबादी जिस देश की 6 करोड़ हो और उसमें साढ़े करोड़ भूख से मर जाए यह कोई मामूली बात नहीं है आधी आबादी भूख से मर गई क्योंकि खाने को कुछ नहीं था पहनने को कुछ नहीं था अंग्रेजों ने कपड़ा पहनना भारत से सीखा अंग्रेजों ने कपड़ा बनाना भारत से सीखा भारतवासियों के संपर्क के पहले तो इंग्लैंड में कोई कपड़ा बनाना नहीं जानता था पहनना भी नहीं जानता नंगे रहते थे आदिवासियों की तरह से वनवासियों की तरह तो यह तो सारी की सारी कहानी है भारत के लूट की यहां का पैसा वहां गया अब यह ब्रिटिश पार्लियामेंट में बहस हुई 1860 में और यह तय हुआ कि भाई भारत की जो क्रांति हुई 1857 की उसका बड़ा कारण क्या था तो एक अंग्रेज कहता हमने लूटा भारत को यह बड़ा कारण था दूसरा कारण क्या था तो एक अंग्रेज कहता हमने मार मार के भारतवासियों को ईसाई बनाया जो वह बनने को तैयार नहीं थे दूसरा कारण यह था तीसरा कारण क्या था एक अंग्रेज कहता हमने भारत की सबसे पवित्र गाय को कत आम किया भारत में वह बड़ा कारण था आप जानते हैं सबसे पहला कतलखाना इस देश में 1760 में अंग्रेजों ने शुरू कर दिया था कलकाता में गाय कटती थी और हिंदुस्तानियों की छाती पर छुरी चलती थी गाय कटती थी तो ऐसे अंग्रेज दस्तावेजों में अंग्रेजी दस्तावेजों में यह कहानी दर्ज है कि एक एक अंग्रेज बयान दे रहा और वह बता रहा है यह कारण था यह कारण था यह कारण था इस कारण भारत में हमारे खिलाफ बगावत हुई अब एक अंग्रेज प्राइम मिनिस्टर पूछ रहा है इन सबसे कि अच्छा बताओ बगावत के लिए पैसा किसने दिया धन भी तो इकट्ठा हुआ होगा तो एक अंग्रेज जो यहां हिंदुस्तान में 17 साल रहा और किसी तरह जिंदा बचकर वापस इंग्लैंड पहुंच गया वह कहता है कि भारत की आजादी की लड़ाई जिसको भारतवासी कहते हैं हम कहते हैं बगावत और विद्रोह वह कहते हैं आजादी की लड़ाई इसमें 480 करोड़ रुपए खर्च हुआ है और यह कोई मामूली रकम नहीं है यह रकम कहां से आई तो भारत के उद्योगपतियों ने दी व्यापारियों ने दी कारीगरों ने दी किसानों ने दी लोगों ने इतना धन इकट्ठा किया था इस क्रांति के लिए इस 480 करोड़ को आज अगर समझना चाहे तो इसमें 300 का गुना कर लेना तब इसको आज समझ पाएंगे आप इतनी बड़ी क्रांति थी 1857 इस क्रांति में साढ़े करोड़ हिंदुस्तानी लड़े थे अंग्रेजों के खिलाफ अगर हर एक हिंदुस्तानी के हाथ में एक तलवार भी हो तो साढ़े करोड़ तलवारें बनी होंगी इस देश में और उन साढ़े करोड़ तलवारों को बनाने के लिए लोहा बना होगा इस देश में उस लोहे को गलाने के लिए भट्टियन बनी होंगी कितने करोड़ लोगों ने कितने करोड़ मेट्रिक टन लोहा गलाया होगा उन लोहो से तलवारें बनी होंगी बंदूकें बनी होंगी छरे बने होंगे हस बने होंगे हथौड़े बने होंगे क्योंकि भारतवासी तो इन्हीं से लड़े थे माने कोई सामान्य नहीं थी क्रांति बहुत बड़ी थी बहुत व्यापक थी और एक साथ 350 स्थानों पर हुई थी एक दो स्थान पर नहीं तो ब्रिटिश पार्लियामेंट में यह सारी बहस हो रही है तो प्राइम मिनिस्टर पूछ रहा पैसे किसने दिए तो उद्योगपति व्यापारी किसान कारीगरों ने दिए तो प्राइम मिनिस्टर कहता है कि अब आगे से इस देश में शासन चलाना है तो एक व्यवस्था करो कि दोबारा कभी भारत के लोग क्रांतिकारियों को पैसे दे ना सके उनके हाथ में पैसे छोड़ो ही मत ले लो सब छीन लो उनसे तो कैसे छीन होगे टैक्स लगा के छीन इसलिए इस देश में इनकम टैक्स आया इनकम टैक्स इसलिए नहीं आया कि देश में सरकार चलानी थी अंग्रेजों को और उसके लिए धन की जरूरत थी इनकम टैक्स इसलिए लाया गया कि भारत के नागरिकों के पास पैसे इतने बचे ही नहीं जो वह क्रांतिकारियों को दान में दे सके वह सारे पैसे अंग्रेज छीनकर अपने पास रखें इसके लिए इनकम टैक्स आया और इनकम टैक्स जब लगाया अंग्रेजों ने तो उसकी लिमिट जानते हैं क्या थी 97 पर माने 00 आप कमा रहे हैं तो ₹ अंग्रेजों को दे दीजिए और यह कहानी पूरी तब समझ में आएगी जब और एक जानकारी मैं आपको दूं ब्रिटिश पार्लियामेंट में बहस हो रही थी और बात चल रही थी कि खाली इनकम टैक्स लगाना है या दूसरे टैक्स भी लगाने तो बात हुई कि भारत के उद्योगपति और व्यापारी कोई भी सामान बनाए तो बनाने पर ही पहले उनसे टैक्स ले लो उसको उन्होंने एक्साइज ड्यूटी नाम दे दिया आप सामान बनाएं और बेचने के लिए जाएं तो बेचने पर उनसे टैक्स ले लो उसको सेल्स टैक्स नाम दे दिया फिर बेचकर मुनाफा कमाए तो मुनाफे पर टैक्स ले लो उसको इनकम टैक्स नाम दे दिया सामान को बेचने के लिए एक गांव से दूसरे गांव जाएं तो रोड टैक्स ले लो और टोल टैक्स ले लो और जिस गांव से सामान लेके जाए वहां ले लो और जिस गांव में लेकर आए वहां ले लो गांव में लेकर आ रहे हैं तो ऑक्ट्रॉय ले लो उनसे और गांव से लेकर जा रहे हैं तो एग्जिट टैक्स ले लो उनसे ऐसे बी सियों तरह के टैक्स उन्होंने लगा दिए एक्साइज ड्यूटी अंग्रेजों ने लगाई 350 पर माने 00 का सामान बनाओ तो 50 टैक्स में दे दो उनको इनकम टैक्स लगा दिया 97 पर 00 कमाई करो तो ₹ अंग्रेजों को दे दो रप बचेगा बस आपके पास सेल्स टैक्स लगा दिया 180 से 250 पर तक अलग-अलग वस्तुओं पर अलग-अलग ऑक्ट्रॉय लगा दिया 50 से 60 पर म्युनिसिपल कॉरपोरेशन का टैक्स लगा दिया अंग्रेजों ने कई कई स्थानों पर 70 से 80 पर परिणाम क्या हुआ हिंदुस्तानियों से लूट लूट कर सारा धन उन्होंने जमा कर लिया इंग्लैंड 1860 के पहले क्या होता था लूटने का काम एक ईस्ट इंडिया कंपनी किया करती थी उनके एजेंट हुआ करते थे और 1860 के बाद पूरी सरकार ही लूट खोर हो गई जिन्होंने कानून बनाकर लूटना शुरू कर दिया इस देश में अब भारतवासी चिल्लाते थे कि हमारी लूट हो रही है अंग्रेज कहते थे हम तो कानून का पालन कर रहे हैं कानून बना दिया इनकम टैक्स का कानून बना दिया सेंट्रल एक्साइज का कानून बना दिया ऑक्ट्रॉय का तो अंग्रेज कहा करते थे हम तो कानून का पालन करते हैं अब आपकी लूट हो रही है तो हम क्या करें इसमें कितनी बेईमान और कौम है यह अंग्रेजों की लूटना है तो कानून बना दो और दूसरों को उल्लू बनाओ कि हम तो कानून का पालन कर रहे हैं भरे उसकी जेब कटे उसम ऐसे लूटो ग तो बदनामी होगी सारे दुनिया के देश थूथू करेंगे कि तुम भारत को लूट रहे हो लूटने का कानून बना दो तो दुनिया को कहेंगे भाई हम तो कानून का पालन कर रहे हैं उसमें आपकी लूट होती है तो हम क्या करें यह व्यवस्था कैसे गाड़ियों में बैठकर एसी गाड़ियों में बैठकर डांडी मार्च साबरमती से निकले पा सा किलोमीटर पैदल चले गाड़ियों में भर गए डांडी से पाच सात किलोमीटर पहले उतर गए गाड़ियों से पैदल चल गए अखबार वालों को फोटो आया डांडी मार्च कर रहे हैं मैंने उस समय यही कहा था कि डांडी मार्च का पाखंड करने से अच्छा है नमक को सस्ता कर दो जो गांधी जी की आत्मा कहा करती थी वही ये देश आपको स्वीकार कर लेगा नमक ₹1 किलो और डांडी मार्च की याद दिला रहे हैं हमको हमारे जले पर नमक छिड़क रहे हैं ये सब इतने अत्याचारी और अन्याय कारी हैं कि गरीब आदमी जिसकी एक दिन की आमदनी 202 से कम है ऐसे 84 करोड़ लोग हैं इस देश में उनको ₹1 किलो का नमक खाना पड़े तो यह जले पर नमक छिड़कने जैसा है जिसकी एक दिन की आमदनी रप हो इस देश में उसको 0प किलो दाल मिले 0प किलो टिंडा मिले रप किलो की भिंडी मिले रप किलो का आलू मिले रप किलो की प्याज मिले रप किलो की चीनी मिले आप उसके जले पर नमक छिड़क रहे हैं और क्या कर रहे हैं आप मजबूर कर रहे हैं कि वह दाल को खाए नहीं सिर्फ देखकर अपना दिल बहला कि यह दाल है छू के देख लो यह सब्जी है इसकी शक्ल देख लो कैसे खाएगा रप किलो जिसकी एक 20 रप की एक दिन की आमदनी हो वह तो एक किलो आटा नहीं खरीद सकता क्योंकि एक किलो आटा ₹ रप का है मुझे यही बात दुख से और अफसोस से कहनी पड़ रही है आजादी आई नहीं है स्वतंत्रता आई नहीं है स्वराज आया नहीं है यह तो आजादी के नाम पर लूट का एक नया तंत्र बन गया है इस देश में पहले गोरे अंग्रेजों के हाथ में था अब काले अंग्रेजों के हाथ में है मैं जब भी इन नेताओं से कभी-कभी मिलता हूं पूछता हूं कि भाई 20 लाख करोड़ रुपए आप हर साल टैक्स का हमसे ले लेते हो आखिर यह जाता कहां है एक साल लिया दो साल लिया तीन साल लिया यह नहीं कि 60 60 साल में हर साल आप देते हो कहां जाता है विकास क्यों नहीं हो रहा इस देश का 84 करोड़ लोग रप से कम पर जिंदा क्यों है आजादी के मिलने के समय में एक घटना हुई थी आजादी के थोड़े दिन के बाद की घटना एक सुनाता हूं आप में से कई बुजुर्गों को शायद वह घटना याद भी होगी क्योंकि आपने तो उसका प्रत्यक्ष दर्शन किया होगा मैंने तो पढ़ा है सिर्फ उस घटना के बारे में क्योंकि मेरा जन्म नहीं हुआ था तब तक एक इस देश के महान नेता हुए आचार्य राम मनोहर लोहिया एक बार पंडित नेहरू से उनकी मुठभेड़ हो गई संसद में लोहिया जी चुनाव जीतकर एक बार लोकसभा पहुंच गए तो जब जब लोकसभा में प्रधानमंत्री नेहरू जी का भाषण होता था लोहिया जी सबसे ज्यादा प्रश्न किया करते और नेहरू जी की हालत सबसे ज्यादा खराब उन्हीं के सवालों के जवाब देने में होती थी नेहरू जी ने खुद स्वीकार किया यह बात मैं अपनी तरफ से नहीं कह रहा हूं वह कहा करते थे कि जब राम मनोहर लोहिया जी का भाषण होता है तो तो नेहरू जी की हालत खराब हो जाती है जवाब क्या दे ऐसे तीखे सवाल किया करते थे एक दिन नेहरू जी संसद में भाषण दे रहे थे और कह रहे थे कि मेरी योजनाओं ने हमारे देश की गरीबी कम की है तो लोहिया जी ने कहा कि सफेद झूठ मत बोलो नेहरू जी ने कहा वो कैसे उन्होंने कहा कि गरीबी कम नहीं है ज्यादा हुई है अंग्रेज जितनी गरीबी छोड़कर गए थे भारत सरकार ने गरीबी को बढ़ाया है कम नहीं किया तो बहस हो लोया जी और नेहरू जी में तो लोहिया जी ने कहा कि मैं सिद्ध करता हूं तुम्हारे ही आंकड़ों से कि गरीबी इस देश में बढ़ी है कि कम हुई है तो लोहिया जी ने एक अध्ययन करके संसद में प्रस्तुत किया और सारे देश को उन्होंने यह सिद्ध कर दिया कि एक आदमी की एक दिन की आमदनी ढाई आने से कम है और अंग्रेज जब छोड़कर गए थे इस देश को तब एक आदमी की एक दिन की आमदनी लगभग चार से पाच आने के आसपास थी पंडित नेहरू की नीति के चलते और पंचवार्षिक योजनाओं के चलते वह पांच आने की आमनी ढाई आना हो गई है माने गरीबी दोगनी बढ़ गई है यह लोहिया जी ने कहा और सिद्ध कर दिया नेहरू जी जवाब नहीं दे पाए उसका क्योंकि आंकड़े सरकार के थे लोहिया जी के आंकड़े नहीं थ और लोहिया जी ने कहा कि हमारी दिशा गलत है जिस दिशा में हम देश को आगे बढ़ा रहे हैं यह दिशा तो गरीबी को बढ़ाने वाली है अमीरों को अमीर बनाएगी यह गरीबों को और ज्यादा गरीबी आएगी यह ऐसी दिशा में हमने भारत को चलाना शुरू किया है और वह नेहरू जी को जब गुस्से में आते थे तो नेहरू पंडित कहा करते थे पंडित नेहरू नहीं कहते थे वह कहते थे नेहरू पंडित अभी भी संभल जाओ उल्टी दिशा में देश को तुमने चला दिया लेकिन लोहिया जी चले गए उसके बाद नेहरू जी भी चले गए अब लोहिया जी ने जो आंकड़े प्रस्तुत किए थे संसद में कि एक दिन की आमदनी एक गरीब की ढाई आने से कम है उन आंकड़ों को मैंने 2009 में थोड़ा वेरीफाई किया और मैंने सिर्फ इतना ही किया कि 60 के दशक में जो इन्फ्लेशन का रेट था मूल्य वृद्धि का जो दर थी उसको मैंने जोड़कर अगर आंकड़े निकाले तो वह ढाई आना आज भी ही है वह ढाई आना 20 हो गया है क्योंकि रुपए की कीमत गिर गई है माने लोहिया जी के जमाने में गरीब की एक दिन की आमदनी जो ढाई आना थी अब 2009 में वह ढाई आना ही है अगर आप उसमें रुपए की कीमत के घटाव को जोड़ दें तो वह ₹ निकलता है माने देश वहीं खड़ा है जहां 1960 में था और गरीबी उससे ज्यादा बढ़ी है इस देश में अंग्रेज जब देश छोड़कर गए थे तो 45 करोड़ लोग गरीब थे अब आजादी के 64 62 63 साल के बाद 84 करोड़ लोग गरीब है हम कहेंगे जी आबादी बढ़ गई इसलिए गरीबी बढ़ गई आबादी का भी हिसाब बताता हूं जब अंग्रेज भारत छोड़कर गए थे तो हम 32 करोड़ थे अब हम 115 करोड़ हो गए हमारी आबादी साढ़े तीन गुनी बढ़ गई तो गरीबी साढ़े तीन गुनी बढ़नी चाहिए तो 12 1 करोड़ लोग गरीब होना चाहिए 84 करोड़ क्यों हो गए गरीबी 21 गुनी कैसे बढ़ गई आबादी तो साढ़े तीन गुनी ही बढ़ी है गरीबी 21 गुनी क्यों बढ़ गई उसका एक ही जवाब है कि इस देश के नेताओं की लूट जो हो रही थी अंग्रेजों के जमाने में जो लूट रहे थे अंग्रेज वह अब 21 गुना ज्यादा बढ़ गया है वह लूट ज्यादा बढ़ पहले 7 हजार करोड़ लूटते थे अब 20 लाख करोड़ लूट रहे हैं इसलिए गरीबी बढ़ गई है हर वह देश गरीब होता है जिसकी लूट होती है और यह मैं नहीं कहता राजीव दीक्षित नहीं कहता यह बात गांधी ने कही कि लूट कितनी है इस देश आप सभी जानते हैं राजीव गांधी ने प्रधानमंत्री बनने के बाद 1984 में एक बात कही थी कि मैं जब दिल्ली से एक रुपया किसी गरीब आदमी के विकास के लिए भेजता हूं तो उसके पास सिर्फ 15 पैसा पहुंचता है माने 85 पैसा लूट लिया जाता है बीच में ही और वह लूट खोर कौन है तो उन्होंने कहा था कि हम सत्ता के दलाल और हमारे अधिकारी यही लूट रहे हैं इस देश को अब यह बात कही थी 1984 में जब भ्रष्टाचार कम था घोटाले बाजी कम थी अब 2009 आ गया जब भ्रष्टाचार और चरम पर पहुंच गया घोटाले बाजी और चरम पर पहुंच गई तो मुझे तो यह लगता है कि उस समय एक रुपए में से 15 पैसा पहुंचता था गरीबों तक अब तो एक रुपए में शायद 10 पैसा भी नहीं पहुंचता होगा गरीबों तक हो सकता पांच पैसा भी नहीं पहुंचता हो तो जाता कहां है यह पैसा हम तो इनकम टैक्स में दे रहे हैं हम तो सेंट्रल एक्साइज में दे रहे हैं हम तो रोड टैक्स में दे रहे हैं उसमें कोई कमी नहीं कर रहे हैं सरकार हर साल बढ़ाती जा रही है हम बढ़ा हुआ टैक्स भी दे रहे हैं अप्रत्यक्ष कर इनडायरेक्ट टैक्सेस इतने बढ़ाए हैं सरकार ने जो दुनिया के किसी देश में नहीं बढ़े होंगे वह सब बढ़ा हुआ टैक्स का पैसा हम दे रहे हैं कभी हमने कमी नहीं की लेकिन वह पैसा जा कहां रहा है विकास तो हो नहीं रहा है आजादी के 62 63 साल के बाद भी ा लाख गांव में पीने का पानी नहीं है 21 करोड़ परिवार हैं इस देश के गांव में रह उनमें से सिर्फ 7 करोड़ परिवारों को पीने का पानी है 14 करोड़ को तो पीने का पानी नहीं है 3 लाख गांव में चढ़ने की सड़क नहीं है ढाई से पौने ती लाख गांव में बिजली नहीं है इस देश में उद्योग नहीं है व्यापार नहीं है गांव उजड़ रहे हैं लोग भागकर शहर में आ रहे हैं और शहर में आकर क्या जीवन बिता रहे हैं जो गांव में रहने वाले बेरोजगार लोग थे वह शहर में आकर नौकरी की तलाश में झुग्गी झोपड़ियों में अपना जीवन बिता रहे हमारे बड़े-बड़े शहरों में झुग्गी झोपड़ियां बढ़ रही है बंबई है दिल्ली है मद्रास है कलकाता है ऐसे सारे बड़े शहरों की 65 प्र आबादी झुग्गी झोपड़ी में रहती है 65 प्र आधे से ज्यादा शहर हमारा फुटपाथ पर सोता है झुग्गी झोपड़ियों में सोता है उन झोपड़ियों में लोग रहते हैं जहां बारिश का पानी टप टप टपकता रहता है उन जुग्गी झोपड़ियों में लोग रहते हैं जहां कीचड़ में कीले बिलबिला रहते हैं उन झुग्गी झोपड़ियों में जहां आप नहीं जा सकते नाक पर रूमाल रखे बिना वहां लोगों की पीढ़ियां दर पीढ़ियां गुजर जाती हैं शादियां होती हैं बच्चे होते हैं उन्हीं झुग्गी झोपड़ इन झुग्गी झोपड़ियों में रहने वाला है कौन तो पता चला गांव का विस्थापित किसान मजदूर कारीगर जिसको गांव में कोई काम नहीं मिला वह शहर में आ गया कुछ रिक्शा चलाने के लिए रेहड़ी लगाने के लिए वही है जो रहता है और आजादी के बाद इसकी संख्या लगातार बढ़ रही है कम नहीं हो रही है इसका माने विकास कहां हो रहा है मैंने तो देखा है कि आजादी के 62 63 साल में विकास अगर हुआ है तो नेता और अधिकारियों के घरों में हुआ है उनके परिवारों में हुआ है देश में नहीं [प्रशंसा] हुआ मैंने हिंदुस्तान के कुछ नेता और अधिकारियों की जन्म कुंडली बनाई है जन्म कुंडली से मतलब वह नहीं होरोस्कोप जो ज्योतिषी बनाते हैं मुझे नहीं आता ज्योतिष ज्ञान मैंने तो दूसरी जन्म कुंडली बनाई है वो यह कि यह व्यक्ति नेता बनने से पहले इसके घर में क्या था और नेता होने के बाद क्या हो गया अधिकारी का इस पद पर आने से पहले कितना धन संपत्ति था होने के बाद क्या हो गया अभी तक लगभग 420 नेताओं की जन्म कुंडली तैयार हुई है अब यह संख्या ही ऐसी है तो मैं करूं क्या उसका लगभग 420 नेताओं की जन्म कुंडली तैयार हुई है एक-एक नेता की एक छोटी सी जानकारी देना चाहता हूं व 20 साल पहले किसी के पास भी टूटी साइकिल नहीं थी घर में और इतने पैसे नहीं थे कि वह चाय पी सके अपने जेब से पैसे निकालकर और आज 20 साल के बाद एक एक के पास 200 हज करोड़ से ज्यादा की संपत्ति मैं बिना नाम लिए कहना चाहता हूं आपको आप सब होशियार हैं तुरंत समझ जाएंगे महाराष्ट्र में एक नेता है जिसके पास 20 साल पहले फूटी कौड़ी नहीं थी अगर पुणे से बंबई आना हो तो बस का किराया नहीं था उस नेता के पास आज उस नेता के पास बंबई से पुना के बीच की हजारों एकड़ लाखों एकड़ जमीन है अकेले एक नेता के पास अकेले एक नेता के पास हजारों लाखों एकड़ जमीन एक व्यक्ति के पास 20 साल पहले एक ता था मुंबई में दादर रेलवे स्टेशन पर भाजीपाला बेचता था भाजीपाला समझते पालक मेथी वगैरह वगैरह आज उसकी संपत्ति खाली मुंबई में 28000 करोड़ के सिर्फ मुंबई 20 साल पहले एक नेता था नासिक में जो सिनेमा का टिकट ब्लैक किया करता था आज उसकी प्रॉपर्टी 22000 करोड़ की है महाराष्ट्र सभी राज्यों में नेता यह मेरा जन्म उत्तर प्रदेश का है वहां थोड़े दिन पहले एक अधिकारी पकड़ा गया सीबीआई के चंगुल में आया जो उत्तर प्रदेश सरकार का चीफ सेक्रेटरी रह चुका अखंड प्रताप सिंह उसके घर में छापा पड़ा 480 करोड़ रुपए की संपत्ति निकली मैंने अखंड प्रताप सिंह का वोह यूपी कैडर का आईएएस कैडर का अधिकारी रहा तो कैडर की पोस्टिंग से लास्ट पोस्टिंग तक की पूरी तनखा जोड़ दी मैंने वह 84 लाख रुपए बैठती है उसके पास 480 करोड़ की संपत्ति कहां से आई और 84 लाख की जो तनखा बैठती है उसमें बीवी बच्चों का खर्चा पढ़ने का पढ़ाने का रहने का कुछ तो हुआ होगा अब उसकी संपत्ति 480 करोड़ कहां से बैठ ऐसे अधिकारी और ऐसे नेता एक दो नहीं है हजारों में है और हमने अंदाजा लगाया है हमारे देश में एक रिसर्च एंड एनालिसिस विंग करके संस्था है एक सीबीआई नाम की संस्था है एक इंफोर्समेंट डिपार्टमेंट है इन सबके मिले जुले आंकड़ों से अंदाजा लगाया है लगभग 800 हज ऐसे नेता और अधिकारी हैं जिन्होंने लाखों करोड़ों रुपए लूटा है इस देश का और लूटकर भारत में नहीं विदेशों में जमा कर रखा है स्विस बैंकों में जमा कर रखा स्विस बैंक के अधिकारियों का एक एसोसिएशन है व बताते हैं कि भारत के नेता और अधिकारियों का उनके यहां 75 लाख करोड़ रुपए जमा है 1500 अरब डॉलर स्विस बैंक के अलावा दूसरे देश हैं दुनिया में जहां पर टैक्स हैवंस कहा जाता है जहां इनकम टैक्स नहीं लगता वहां 35 लाख करोड़ जमाए कुल मिलाकर 110 लाख करोड़ रुपए लूट लिया इन नेता और अधिकारियों ने मिलकर पिछले 62 63 साल अब समझ में आता है कि आप जो टैक्स का पैसा देते हैं मैं जो टैक्स का पैसा देता हूं वह विकास में नहीं लगता वह नेताओं की तिजोरिया भरता है अधिकारियों की तिजोरिया भरता है और नेता और अधिकारी इतने हैं कि किसी भी स्तर पर नीचे उतर कर आपके पैसे को लूट सकते हैं इतने हराम आप तो मध्य प्रदेश के रहवासी हैं नागरिक हैं इस मध्य प्रदेश में बहुत दिन पहले एक दुर्घटना हुई थी भोपाल में गैस कांड हुआ था उसमें में 17000 लोग मर गए थे सुप्रीम कोर्ट ने कंपनी के ऊपर मुकदमा करके कुछ पैसे वसूले थे 1500 करोड़ रुपए और बांटने का आदेश दिया था सभी नागरिकों को जिनके घर में मृत्यु हुई है यह नेता और अधिकारी उसे भी खा गए आप कल्पना कर सकते हो हमारे देश के नेता और अधिकारी किसी का कफन बेच के भी खा सकते हैं इतने निकृष्ट और नराधम किम के लोग हैं पूरी दुनिया में इतने भ्रष्ट इतने इतने नराधम अधिकारी और नेता शायद ही किसी देश में मिलेंगे जो इस भारत देश में दुनिया में समय-समय पर सर्वे होते रहते हैं अभी थोड़े दिन पहले एक सर्वेक्षण हुआ पता किया गया कि दुनिया में 200 देश हैं किस देश की नौकरशाही किस देश के अधिकारी सबसे ज्यादा भ्रष्ट हैं और किस देश के नौकरशाह और अधिकारी सबसे ज्यादा ईमानदार है वह सर्वे की रिपोर्ट कहती है कि दुनिया का बहुत छोटा सा देश है सिंगापुुर वहां के अधिकारी सबसे ज्यादा ईमानदार और कर्मठ है और दुनिया का सबसे बड़ा देश है भारत जहां के अधिकारी और सबसे ज्यादा बेईमान सबसे ज्यादा निकम में व मैं नहीं कहता अंतरराष्ट्रीय सर्वे की संस्था कहती लूट रहे हैं खसोली बैंकों में अब अब ये लूट अगर इसी तरह से चलेगी तो देश तो गरीब ही होगा और देश में नीतियां और कानून अगर ऐसे बनेंगे जो अंग्रेजों के जमाने में थे तो कुछ लोग तो अमीर हो जाएंगे और अमीर और अमीर और अमीर और कुछ लोग तो भयंकर गरीब और भयंकर गरीब भयंकर गरीब हो जाए इसी देश में मुझे बहुत अफसोस है यह कहते हुए भारत सरकार की कुछ नीतियां हैं एक नीति का नाम है उदारीकरण एक का नाम है वैश्वीकरण एक का नाम है निजीकरण पिछले 1991 से इस देश में चल रही है 2009 तक इन नीतियों का क्या असर हुआ है उसका मैं थोड़ा अध्ययन कर रहा हूं तो पता चला कि इन नीतियों का जो सबसे बुरा असर हुआ है वह यह कि जो अमीर थे वह और अमीर हो गए जो गरीब थे और गरीब हो गए मैं एक ही उदाहरण से कहता हूं कि उदारीकरण और वैश्वीकरण का सबसे बड़ा फायदा अगर उठाया तो टाटा बिरला डालमिया धीरू भाई अंबानी य वगैरह वगैरह वगैरह इन लोगों ने उठाया और इनकी आमदनी कितनी बढ़ गई है एक आदमी है मुकेश अंबानी और एक है अनिल अंबानी अभी थोड़े दिन पहले आपने अखबारों में पढ़ा होगा समाचार में सुना होगा कि इस मुकेश अंबानी नाम के व्यक्ति ने अपनी बीवी के जन्मदिन पर एक हवाई जहाज गिफ्ट कर दिया बीवी को 268 करोड़ रुपए का हवाई जहाज एक व्यक्ति अपनी बीवी को गिफ्ट में देता है और 84 करोड़ लोग एक दिन में 20 पर जिंदा रहते हैं ऐसी विद्रूपता हमको इसी भारत में दिखाई देती मुकेश अंबानी ने अपनी बीवी को गिफ्ट नहीं दिया 84 करोड़ लोगों के गाल पर कसकर तमाचा मारा है कि तुम इतनी गरीबी और जहालत में हो और मैं देखो कहां पहुंच गया उस मुकेश अंबानी की आमदनी मैंने निकाली थी एक मिनट की आमदनी उसकी 00 है एक मिनट की और भारत में 84 करोड़ लोगों एक दिन की आमदनी 20 रप से कम है ऐसा देश हमने बनाया है यह देश अभी नहीं बर्दाश्त होता यह नहीं चलेगा अभी और चलना नहीं चाहिए इस व्यवस्था को इस देश अब तो कोई बड़ी क्रांति होनी ही चाहिए इस देश में कोई बगावत होनी ही चाहिए कोई इस देश में मुझे तो कभी-कभी लगता है कि 1857 से बड़ी कोई क्रांति होनी चाहिए क्योंकि उस समय तो हम गोरे अंग्रेजों के खिलाफ लड़ रहे थे अब हमको काले अंग्रेजों के खिलाफ लड़ना है इसलिए लड़ाई थोड़ी ज्यादा बड़ी होगी और गंभीर होगी पहले तो विदेशी थे हमें दिखाई देता था यह बाहर से आए हैं लुटेरे हैं अब तो हमारे ही भाई बहन है हमारे ही जैसे हैं देखने में रंग भी हमारे जैसा कपड़े भी हमारे ही जैसे वही लूट खोर हो गए उनसे लड़ना थोड़ा मुश्किल होता है घर के भाई से लड़ना थोड़ा मुश्किल होता है बाहर के दुश्मन से लड़ना आसान होता है इसलिए लड़ाई तो कोई बड़ी होगी अब इस उस बड़ी लड़ाई की तैयारी का ही काम हम कर रहे हैं इस भारत स्वाभिमान के नाम से इसीलिए हमने यह संगठन बनाया आजादी की लड़ाई हुई 1857 की साढ़े करोड़ भारतवासी लड़े थे उसमें हमारी कोशिश है कि 5 करोड़ भारतवासी तैयार हो अब इस नई लड़ाई लड़ने के लिए कम से कम इस प्रयास में हम हम लड़ाई लड़ना चाहते हैं और क्या लड़ाई लड़ना चाहते हैं कि सारी व्यवस्थाओं को बदल देना है जो हमारे देश में अंग्रेजों के समय से चल रही है लूट की व्यवस्थाएं सबसे पहला काम हम क्या करना चाहते हैं भारत स्वाभिमान का जो संगठन हमने खड़ा किया है और इसको तेजी से आगे बढ़ाने का प्रयास जो हम कर रहे हैं उसका पहला काम जो हम करना चाहते हैं वो यही कि 62 63 साल इन काले अंग्रेजों ने जो भारत को लूटा है और भारत का पैसा विदेशी बैंकों में जमा किया है सबसे पहले इस पैसे को हम वापस लाना चाहते हैं इस देश [प्रशंसा] में आप बोलेंगे क्या यह हो सकता है हां हो सकता है मुश्किल नहीं है असंभव नहीं है करने वाला संकल्प अगर बड़ा है तो दुनिया में कोई काम मुश्किल और असंभव नहीं है मैंने तो दुनिया के देशों का इतिहास पढ़ा है एकदम से असंभव लगने वाली चीज संभव हुई है दुनिया में एक जमाना था जब कोई यह सोचता नहीं था कि पूर्वी जर्मनी और पश्चिमी जर्मनी दोनों मिलकर एक हो जाएंगे वह हो गए एक जमाना था जो दुनिया के लोग सपना नहीं देखते थे कि सोवियत संघ जैसा मजबूत देश खंड खंड टूट जाएगा टूट गया एक जमाना था कि दुनिया में कोई सोच नहीं सकता था कि कम्युनिज्म का कोई पराभव हो जाएगा वह हो गया ऐसी असंभव चीजें अगर दुनिया में हो रही हैं एक जमाना था मैंने तो यूरोप में बहुत अभ्यास किया यूरोप के देशों का इतिहास का उनकी परंपरा सभ्यता का यूरोप के सभी देश एक दूसरे के कट्टर विरोधी हैं जर्मनी फ्रांस को पसंद नहीं करता फ्रांस जर्मनी को पसंद नहीं करता जर्मनी और फ्रांस मिलकर ब्रिटेन को पसंद नहीं करते डेनमार्क नीदरलैंड को पसंद नहीं करता वह उनको पसंद नहीं करता एक दूसरे के कट्टर खिलाफ देश हैं लेकिन अब सब एक हो गए हैं और उन्होंने एक करेंसी बना ली है जिसका नाम है यूरो डॉलर जो कभी सपना नहीं था कि 24 देश मिलकर एक करेंसी बना सकते हैं वोह हो गया अब वह 24 देश मिलकर एक मार्केट बना रहे हैं कॉमन यूरोपियन मार्केट फिर कॉमन यूरोपियन पार्लियामेंट बना रहे हैं कॉमन यूरोपियन फोर्स बना रहे हैं पुलिस बना रहे हैं यह सब असंभव से होने वाले काम हो रहे हैं तो भारत में भी कुछ असंभव से दिखने वाले काम संभव हो सकते हैं और वह यही काम है कि शहीदों ने जो सपने देख खे हैं और जो आदर्श के लिए बलिदान किए हैं वो हम पूरा कर पाएं इस देश में ऐसा ही हमारा भी सपना है हम इस व्यवस्था को बदलना चाहते हैं हमारी इस बात की कोई तमन्ना नहीं है कि सत्ता में कौन आए कौन जाए बीजेपी आए कांग्रेस चली जाए कांग्रेस आए जनता दल चला जाए जनता दल आए सीपीएम आ जाए सीपीआई आ जाए सत्ता हों को बदलने से देश में कुछ नहीं हुआ 62 साल हमने करके देख लिया बस इतना ही हुआ एक नागनाथ दूसरा सांप नाथ डसा दोनों ने ही इस देश की जनता कुछ नहीं हुआ सत्ता परिवर्तन अच्छे लोगों को भी हमने देख लिया उच्च व्यवस्था में बिठाकर वह भी कुछ नहीं कर पाए डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम जैसा पवित्र आदमी इस देश का राष्ट्रपति हुआ और 5 साल में देश की अर्थव्यवस्था का 1 प्रतिशत भी नहीं बदल पाया मतलब क्या है किसी अच्छे आदमी को अगर बुरी व्यवस्था में बिठा दोगे तो वो वो भी कुछ नहीं कर सकते एक बार डॉक्टर अब्दुल कलाम के साथ यह प्रश्न हुआ था प्रश्न यह था कि आप बहुत पवित्र आदमी है बहुत ईमानदार आदमी है बहुत कर्मठ आदमी है बहुत देशभक्त आदमी है आप राष्ट्रपति भवन में चुनकर आए हैं तो कम से कम अंग्रेजों के जमाने की कुछ व्यवस्थाओं को बदल दीजिए तो क्या करना है राष्ट्रपति भवन को छोटा कर दीजिए 350 कमरे के घर में एक आदमी रहे यह देश के 84 करोड़ लोगों का अपमान है जिनके पास रहने के लिए घर नहीं है इससे बड़ा अपमान कुछ नहीं एक आदमी सा स कमरे के घर में रहे और 84 करोड़ लोगों के ऊपर छत भी ना हो रहने के लिए इस देश में लेकिन डॉक्टर अब्दुल कलाम 5 साल में भी यह काम नहीं कर पाए वह 350 कमरे का घर अभी भी है राष्ट्रपति भवन के रूप उस घर में रहने वाला तो एक है उसका झाड़ू पोंछा लगाने वाले 900 कर्मचारी हैं एक आदमी रहता है 900 लोग उसकी सेवा में हाजिर है खाना खाने वाला एक है खाना बनाने वाले 24 है कपड़ा पहनने वाला एक है कपड़े धोने वाले 18 लोग हैं और मैंने एक दिन सोचा था कि 350 कमरे के घर में एक आदमी कैसे रह सकता है दिन एक कमरे में सोए दूसरे दिन दूसरे में तीसरे दिन तीसरे में चौथे दिन चौथे में तो भी पहले कमरे का नंबर एक साल के बाद आता है राष्ट्रपति भवन की सुरक्षा में 900 गार्ड लगे हुए हैं दिल्ली पुलिस के 1500 जवान लगे हुए हैं अदर सिक्योरिटी फोर्सेस के एक आदमी की सुरक्षा पर इतना खर्चा राष्ट्रपति भवन का साल का खर्चा 350 करोड़ रुपए का है हिंदुस्तान के 84 करोड़ इतना खर्चा नहीं कर पाते पूरे साल में राष्ट्रपति अकेला करता है क्या जरूरत है इसकी क्यों नहीं छोटा किया जा सकता यह राष्ट्रपति भवन क्यों नहीं अधिकारों में कम कमी लाई जा सकती क्यों सुरक्षा पर इतना फालतू खर्चा कहते हैं जी राष्ट्रपति विशेष है तो हम सब मूर्ख हैं 115 करोड़ हम विशेष नहीं है वो एक ही आदमी विशेष है हम सब क्या अविश हैं जो लोग राष्ट्रपति को चुन रहे हैं वह सब ऐसे ही हैं साधारण और राष्ट्रपति जिनसे चुनकर जा रहा वह विशेष हो गया और राष्ट्रपति का ही खर्चा नहीं है प्रधानमंत्री का उप प्रधानमंत्री का वाणिज्य मंत्री का वित्त मंत्री का मंत्रियों का खर्चा हजारों करोड़ में है जितना विकास पर खर्च नहीं होता उससे ज्यादा तो इन मंत्रियों और अधिकारियों पर खर्च होता है मैंने एक दिन पूरे हिसाब निकाले थे राज्य सरकारों के मंत्री राज्य सरकारों के अधिकारी राज्य सरकारों में एमएलएस केंद्र सरकार के मंत्री केंद्र सरकार के अधिकारी और केंद्र सरकार के एमपीज इनका पूरा साल का खर्चा 32000 करोड़ का है और हमारे लोगों के विकास का साल भर का खर्चा मुश्किल से एक लाख करोड़ रुपए का है लोगों पे खर्चा 1 लाख करोड़ कंधों पर क्या जरूरत है इसको तो उठाकर फेंक देना ही पड़ेगा इस व्यवस्था को तो अब बदल देना ही पड़ेगा बहुत दर्द दिया है इस व्यवस्था ने बहुत दुख दिया है बहुत तकलीफ दी है अब ज्यादा दिन हमसे बर्दाश्त नहीं होता क्योंकि बर्दाश्त की भी एक सीमा होती वह सीमा अब लोगों की टूट रही है धीरज लोगों का टूट रहा है अब इसलिए लोगों का संगठन बने ताकत खड़ी हो इस व्यवस्था को बदलने के लिए हम वही कोशिश कर रहे हैं भारत स्वाभि की तरफ से और पहला प्रयास हमारा यह है कि लूट का पैसा जो नेताओं ने रखा है अपने नाम से यह भारत में वापस आए आप बोलेंगे कैसे आएगा चार रास्ते हैं इसके आने के पहला रास्ता है संसद के द्वारा प्रस्ताव पारित करा के इस पैसे को लाया जाए संसद में प्रस्ताव क्या कराना है एक लाइन का प्रस्ताव कराना है कि जो धन भारत के नेताओं ने लूटा है पिछले 62 63 साल में वह धन भारत की राष्ट्रीय संपत्ति है और राष्ट्रीय संपत्ति के लिए नियम यह है कि वह राष्ट्र की बैंकों में ही रखी जा सकती है विदेशी बैंकों में रखना उसके लिए कानूनन अपराध है तो हम संसद से यह प्रस्ताव पारित कराना चाहते हैं इसके लिए परम पूजनीय स्वामी जी रात दिन प्रयास कर रहे हैं आज सवेरे मेरी फोन पर उनसे आधा घंटे चर्चा हुई इस विषय पर बहुत सारे एमपी से बात चल रही है प्रधानमंत्री से भी बातें हो रही हैं अलग-अलग लोगों से बातें हो रही हैं किसी भी तरह से यह संसद में प्रस्ताव आए और यह प्रस्ताव जिस दिन संसद में आएगा तो आपको सूचना होगी जानकारी होगी आप जरूर देखना टेलीविजन पर और आप यह देखना कि इस प्रस्ताव का विरोध कौन-कौन नेता कर रहा है जो विरोध करेगा पक्की बात है वही है भ्रष्टाचारी वही है धन उसी का है वही ना विरोध करेगा और कौन करेगा जब हमको पता चल जाएगा कि ये ये विरोध कर रहे हैं प्रस्ताव का तो हमारा संकल्प है कि हम उनके चुनाव क्षेत्र में जाएंगे और उनकी सारी पोल खोलेंगे कि 20 साल पहले इनके पास टूटी साइकिल नहीं थी बाप दादों का छोड़ा हुआ एक रुपया नहीं था आज हजारों करोड़ इन्होंने स्विस बैंक में रखा आया कहां से और चुनाव क्षेत्र में जब उनकी पोल खुलेगी तो लोग खुद ही उनको सजा दे देंगे और अपना न्याय खुद से अपने हाथ में ले [संगीत] ले हमारी तो कोशिश है कि इस रास्ते में रोड़ा अटका वाले किसी भी नेता को छोड़ने वाले नहीं है हम अंग्रेजों को नहीं छोड़ा तो इनको कैसे छोड़ देंगे और इनके लिए कड़े कानून की व्यवस्था है क्या होना है स्वामी जी कहते हैं कि बिजली के तार से उल्टा लटकाए और नीचे आग जलाकर उसमें मिर्ची का पाउडर झुकेंगे होगा होगा आप और मैं जब एक साथ मिलकर खड़े होंगे तो सच होगा जब अंग्रेजों को भगाने का सपना सच हुआ माता की जय मारत माता की जय मारत माता की जय जब अंग्रेजों को भगाने का सपना सच हुआ तो इन काले अंग्रेजों को भी भगाने का सपना सच होगा बस कुछ समय का फेर है वह दो महीने चार महीने 6 महीने साल दो साल दो साल से ज्यादा नहीं क्योंकि भारत स्वाभिमान का संकल्प है कि सब कुछ दो साल में कर देना है अनंत काल के लिए इसको लटका कर नहीं रखना संसद में अगर नेता मान जाए प्रस्ताव पारित हो जाए कानून बन जाए तो स्विटजरलैंड से यह पैसा चुपचाप आ जाएगा और दूसरी बैंको से आ जाएगा 110 लाख करोड़ और अगर संसद से नहीं हो पाया किसी कारण से तो हमारी दूसरी तैयारी और वह तैयारी यह है कि अगर यह वर्तमान संसद हमारे इस रास्ते में रुकावट बनती है और हमारे सपने को पूरा होने से रोकती है तो पूरी संसद भवन को हम बदल देंगे और उसमें नए नेताओं को चुनकर लेकर जाएंगे जो इस काम को कर हमारी तैयारी है कि देश में से 350 से प एमपी को जिता करर लाएंगे और इस एक विषय पर संसद का प्रस्ताव पारित करवाएंगे यह भी तैयारी और इससे भी आगे की तैयारी है 31 राज्यों की विधान सभाएं रास्ते में रुकावट ना बने उन विधानसभाओं को भी बदल देंगे क्योंकि प्रजातंत्र है लोकतंत्र है अब राजा शाही नहीं है कि राजा का लड़का भी राजा हो जाए और उसका भी लड़का राजा हो जाए लोकतंत्र की शक्ति का उपयोग करेंगे संसद से करवा है यह काम वर्तमान संसद करे नहीं तो नई संसद करे फिर उसके बाद तीसरा रास्ता है और वह रास्ता है सुप्रीम कोर्ट हमारे देश में एक बार सुप्रीम कोर्ट में एक मुकदमा आया था आपको याद दिलाता हूं नरसिंहा राव इस देश के प्रधानमंत्री थे उनके जमाने में एक यूरिया घोटाला हुआ 13 करोड़ रुपए का पेमेंट किया गया यूरिया का एक दाना भारत में नहीं आया जांच हुई तो पता चला 13 करोड़ रुपए स्विस बैंक में जमा हो गया और जांच हुई तो पता चला नरसिंहा राव के बेटे के खजाने में जमा हो गया सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि जिसके खजाने में यह पैसा है उसकी गिरफ्तारी की जाए तो प्रधानमंत्री के बेटे की गिरफ्तारी हुई और वह जेल गया और आज भी जेल में है दूसरा आदेश सुप्रीम कोर्ट ने दिया कि जिनके खजाने में यह पैसा है वह पैसा राष्ट्र की संपत्ति है उनकी व्यक्तिगत नहीं है वो पैसा वापस लाया जाए तो यहां से अधिकारियों की टीम गई स्विटजरलैंड की बैंकों से 13 करोड़ रुपए निकालकर सुप्रीम कोर्ट में जमा किया गया अगर यूरिया घोटाले का पैसा वापस आ सकता है तो चारा घोटाले का भी आ सकता है बो फोर्स घोटाले का भी आ सकता है सारे घोटालों का पैसा वापस आ सकता है तो हम सुप्रीम कोर्ट में सुप्रीम कोर्ट के फैसले की याद दिलाते हुए यह काम करवाए और एक चौथा रास्ता है हमारे पास अंतरराष्ट्रीय अदालत में स्विटजरलैंड के खिलाफ हम मुकदमा करें क्योंकि स्विटजरलैंड ने बड़ा अत्याचार किया है उन सब देशों के ऊपर जिनका पैसा उन्होंने अपने यहां रखा हुआ है आप जानते हैं कितने चालाक लोग हैं यह स्विटजरलैंड की बैंकों में जहां यह पैसा जमा होता है वह बैंक उस पर ब्याज नहीं देते जमा करने वालों को उल्टा जो जमा करता है उससे सर्विस चार्ज लेते और उस पैसे को स्विटजरलैंड की सरकार दूसरे देशों को कर्जे में बांट देती है और उस पर ब्याज लेकर अपना धंधा चलाते रहते हैं इतने चालाक लोग उनकी इस चालाकी को दुनिया में एक्सपोज करने की जरूरत है क्योंकि भारत जैसे 50 देशों के भ्रष्टाचारी लोगों का पैसा उनके यहां जमा है उन 50 देशों को हम इकट्ठा करेंगे उनकी तरफ से अंतरराष्ट्रीय अदालत में मुकदमा करेंगे और उस मुकदमे के फैसले के आधार पर इस पैसे को वापस लेंगे आप बोलेंगे ऐसा कभी हुआ है अभी हुआ है एक उदाहरण बताता हूं अमेरिका नाम का एक देश है बराक ओबामा नाम का वहां एक राष्ट्रपति चुन के आया उसने यह काम किया बराक ओबामा ने अमेरिका के 4490 भ्रष्ट नेताओं का पैसा जो स्विस बैंक में पड़ा था उसको वापस मंगा लिया अभी थोड़े दिन पहले उसके लिए बराक ओबामा ने अपनी संसद में एक ही प्रस्ताव पारित किया था कि अमेरिका के इतिहास में जिन नेताओं ने यह पैसा लूटकर विदेशी बैंकों में रखा है वह अमेरिका की संपत्ति है और स्विटजरलैंड की सरकार ने 470 अरब डॉलर अभी अमेरिका को वापस दिया है तो अगर अमेरिका यह कर सकता है तो भारत क्यों नहीं कर सकता अंतर इतना ही है कि अमेरिका में एक बराक ओबामा आ गया है भारत में बराक ओबामा कोई आ जाएगा आने वाले समय में क्योंकि भारत माता की विशेषता है कि जब जरूरत पड़ती है ऐसे सपूतों को जन्म देती है यह धरती जरूरत पड़ी तो सरदार पटेल को जन्म दे दिया जरूरत पड़ी तो भगत सिंह उधम सिंह को जन्म दे दिया जरूरत पड़ी तो झांसी रानी लक्ष्मीबाई को जन्म दे दिया अब फिर जरूरत है तो फिर ऐसा कोई सपूत निकलेगा और करेगा इस काम को यह विश्वास हमें है और यह पैसा आएगा हम तो कई बार यह भी सोचते हैं कि हम चाहे तो दादागिरी करके भी इस पैसे को ला सकते हैं सारे कानून एक तरफ दुनिया में मुझे तो कभी-कभी एक मजाक सूझता है आपको कहने के लिए आप इस पर हसे नहीं बैठ जाइए चुपचाप थोड़ी देर में बात करिए कि भारतवासी अगर इकट्ठे हो जाए सब के सब और इकट्ठे होकर पेशाब भी कर देंगे तो स्विटजरलैंड बह जाएगा इतना छोटा सा देश आर्मी नहीं है स्विटजरलैंड के पास आपको मालूम है पुलिस नहीं है नेवल फोर्स नहीं है एयरफोर्स नहीं है कुछ नहीं है आप चाहे तो दादागिरी करके सारा पैसा ला सकते हैं और हम अकेले दादागिरी नहीं करेंगे 50 देश खड़े हो जाएंगे भागेगा कहां स्विटजरलैंड जाएगा कहां बैंक तो इसी दुनिया में है उनकी और अब इतना आसान है यह काम करना अंतरराष्ट्रीय संस्था है यूनाइटेड नेशन उसने प्रस्ताव पारित कर दिया है कि दुनिया के सब देश जिनके खाते स्विटजरलैंड में है वोह बंद करवाएं अपने खातों को पैसा लेकर जाएं क्योंकि एक नई जानकारी मिली है वो यह कि जिन खातों में भ्रष्ट नेताओं का पैसा है उन्हीं खातों में आतंकवादियों का भी पैसा है खाते एक ही है यह नई जानकारी अभी आई है यूनाइटेड नेशंस ने बताया और यूनाइटेड नेशंस आतंकवाद के खिलाफ बड़ा अभियान चला रहा है तो यूनाइटेड नेशन का कहना है कि वह सारे नेता आतंकवादी हैं जो धन को अपने अपने देश से लूटकर जमा कर रहे हैं स्विस बैंक में बस अंतर इतना है कि यह आर्थिक आतंकवादी हैं वो राजनीतिक आतंकवादी तो यूनाइटेड नेशन मदद करने को तैयार है हमारी हो सकता है ईश्वर की कोई योजना है वरना इतनी अनुकूलता कभी नहीं होती और ईश्वर की उस योजना में हम तो निमित मात्र हैं करवाने वाला और करने वाला तो कोई और है वह चाहता है कि भारत माता सुजलाम सुफलाम बने वह चाहता है कि भारत माता समृद्धि शली बने वह चाहता है कि भारत माता फिर से विश्व गुरु बने व चाहता है कि भारत का सम्मान फिर से दुनिया में हो इसलिए वह यह सब करवा रहा है तो यह पैसा तो आएगा आने के बाद क्या करना है उसकी पूरी योजना हमने बनाई है पूरा ब्लूप्रिंट तैयार किया है भारत स्वाभिमान की तरफ से थोड़े दिन में हम देश के सामने वह जारी करें उसके कुछ बिंदु आपसे जरूर कह सकता हूं सबसे पहला हम क्या करेंगे य 110 लाख करोड़ आएगा इसमें से सबसे पहला खर्चा करेंगे गांव में उद्योग और व्यापार का विकास करने के गांव में कोई उद्योग नहीं है जो भी उद्योग है शहरों में है इसलिए गांव के लोग भागकर शहर आते हैं और अपने जीवन जिंदगी में हमेशा दुख पाते हैं हम चाहते हैं कि गांव में उद्योग लगे आप बोलेंगे क्या उद्योग गांव में हो सकते हैं 100 ऐसे उद्योग हैं जो हर गांव में हो सकते हैं आसानी से हो सकते जैसे उदाहरण से बताता हूं हिंदुस्तान के दो लाख से ज्यादा गांव में कपास पैदा होती है कपास से चरखा चलाने का काम हर गांव में हो सकता है उसमें बिजली नहीं लगती उसमें पानी नहीं लगता बस हाथ की मेहनत लगती है अगर दो लाख गांव में चरखा चलाने का काम शुरू हो जाए तो सारी कपास का सूत हम गांव में ही बना सकते हैं और फिर सूद से कपड़ा बुनने का काम भी गांव में हो सकता है क्योंकि कपड़ा बुनने में भी बिजली नहीं लगती पानी नहीं लगता वह हाथ का ही खेल है पूरा और एक दिन मैंने हिसाब निकाला कि दो लाख गांव में सूत बनना शुरू हो जाए उस सूत का कपड़ा बनना शुरू हो जाए वह कपड़ा पहनना हम शुरू कर दें तो इसके लिए भारत स्वाभिमान ने पहला कदम उठाया कि भारत स्वाभिमान के सभी कार्यकर्ताओं को हाथ से बना हाथ से बुना खादी का कपड़ा अब पहनना ही होगा क्योंकि परम पूजनीय स्वामी जी ने खुद खादी पहनना अब शुरू कर दिया हम दूसरों से कहे तो पहले हम करें और यह काम जब हम शुरू करेंगे तो करोड़ों हिंदुस्तानी हमें देखकर शुरू करेंगे खादी की बिक्री अभी पूरे देश में सिर्फ 1 करोड़ लोगों के द्वारा होती है वह 2 करोड़ हो जाए 5 करोड़ हो जाएं 10 करोड़ हो जाएं तो रोजगार उतना ही बढ़ता जाएगा मैंने एक दिन हिसाब निकाला 15 करोड़ लोगों को रोजगार गांव में ही मिल सकता है खाली खादी का कपड़ा पहनने और उसका उपयोग करने मात्र से यह एक बड़ा उद्योग हर गांव में हो सकता है दूसरा उद्योग क्या हो सकता है हर गांव में सरसों पैदा होती है तिल पैदा होता है नारियल पैदा होता है माने तेल की व्यवस्था सारी गांव में हो सकती है जहां सरसों पैदा हो सकती है वहां तेल निकल सकता है जहां नारियल पैदा होता है वहां तेल निकल सकता है तो तेल निकालने के सारे केंद्र गांव में ही चलेंगे शहर में आकर तेल बिकेगा आप बोलेंगे तेल कैसे निकालते हैं पुराने जमाने में कोलू होता था ना उससे तेल निकलता था अभी भी हो सकता है बैल की व्यवस्था करनी पड़ेगी और बैल की व्यवस्था करने के लिए गाय को जिंदा रखना पड़ेगा बस इतनी सी बात है बल तो अभी भी हो जाएंगे कोलू तो अभी भी चल जाएंगे और कोलू का निकाला हुआ तेल हजार गुना क्वालिटी में अच्छा होता है यह जो मशीन से निकाले हुए तेल की तुलना में क्योंकि मशीनों से जो तेल निकलता है उसमें बिजली इस्तेमाल होती है घर्षण बहुत तेज होता है तेल की सारी पौष्टिकता उसमें जल जाती है क्योंकि तापमान बड़ा हो जाता है कोलू से धीरे-धीरे धीरे-धीरे तेल निकलता है उसकी पौष्टिकता बरकरार रहती है और हमने तो परीक्षण कर लिया है कोलू का तेल कोई भी आदमी खाए कभी हार्ट अटैक होने की संभावना नहीं कभी ट्राइग्लिसराइड्स बढ़ने की संभावना नहीं कभी कोलेस्ट्रॉल बढ़ने की संभावना नहीं क्योंकि उस तेल से एचडीएल बढ़ता है और यह बाजार वाले तेल से एलडीएल और वीएलडीएल बढ़ता है एलडीएल वीएलडीएल खतरनाक है एचडीएल तो जरूरी है इसलिए कोलू के तेल की व्यवस्था हर गांव में होगी तेल का बाजार 56000 करोड़ का है और इस बाजार में हम हिंदुस्तान के लाखों गांव को लगा सकते हैं फिर इसी तरह से घी है देसी गाय का घी भैंस के दूध का घी यह सब गांव में निकालने का काम हो सकता है घी निकालना ऐसी कौन सी टेक्नोलॉजी है जो किसी को नहीं मालूम दूध को दही बनाओ दही का मट्ठा बनाओ मक्खन निकालो गर्म करो घी बनाओ यूरोप में किसी को नहीं आता यह हमें तो आता है घर-घर में आता है तो घी निकालने का उद्योग तेल का उद्योग सूत का उद्योग सूती कपड़े का उद्योग फिर गांव में गेहूं पैदा होता है गेहूं से आटा हर गांव में बन सकता है चक्की हाथ की अगर चलवा दे हिंदुस्तान के करोड़ों घरों में तो आटा जो तैयार होगा उससे ज्यादा पौष्टिक आटा मिल नहीं सकता आपको जिन माताओं ने चक्की का पिसा हुआ आटा खाया है किसी भी मां को बच्चे का जन्म करने के लिए सर्जरी नहीं करानी पड़ी है सिजेरियन नहीं कराना पड़ा यह हमारा इतिहास है आजादी के बाद का चक्की चल सकती है क्यों नहीं चल सकती और चक्की चलाकर हम अपने पेट कम कर सकते हैं शरीर को कम कर सकते हैं शुद्ध आटे की पूर्ति हो सकती इसी तरह से भारत में 90 हज गांव है जहां आलू पैदा होता है तो जिन गांव में आलू पैदा होता है वहां आलू का चिप्स बनाने का उद्योग चल सकता है 65000 गांव में टमाटर पैदा होता है इस देश में जिन गांव में टमाटर पैदा हो सकता वहां टमाटर की चटनी बनाने का उद्योग हो सकता है लाख से ज्यादा गांव हैं जहां आम की भिन्न-भिन्न किस्में पैदा होती हैं आम का अचार बनाने का काम उन सब गांव में हो सकता है पापड़ है बड़ी है यह सब बनाने का काम गांव गांव में हो सकता है तो यह 100 तरह के उद्योग गांव में हमें लगाने हैं अब इन उद्योगों को लगाने के लिए पूंजी चाहिए यह पूंजी उस पैसे में से हम निकालना चाहते हैं जो स्विस बैंक से वापस आएगा और यह उद्योगों को लगाने के बाद जो बचेगा पैसा उसमें हम बिजली की व्यवस्था करना चाहते हैं भारत में लगभग ढाई लाख गांव है जहां बिजली अभी चाहिए हमने उसकी योजना बनाई है 1010 गांव के छोटे समूह बनाएं और एक मेगावाट का छोटा बिजली घर बनाएं जिसमें बिजली की खपत हो पूरी की पूरी बिजली का नुकसान हो कम से कम अभी हमारे देश में क्या होता है बिजली बनती है 1000 मेगावाट के पावर स्टेशन 1500 मेगावाट के पावर स्टेशन अब 1000 मेगावाट की बिजली बनाएंगे तो उसका वोल्टेज 11 12000 13000 पर होगा अब 11000 वोल्टेज को इस्तेमाल तो कर नहीं सकते घरों में तो स्टेप डाउन करना पड़ता है और 110 वोल्ट तक लाने के लिए सारी ऊर्जा को नष्ट करना पड़ता है फालतू में हमारी 35 प्र बिजली बर्बाद होती है इस बर्बादी को हम रोकना चाहते हैं हमारा यह कहना है कि घरों में इस्तेमाल होने वाली बिजली जो 110 वोल्ट की है उसके लिए छोटे पावर स्टेशन हो कारखानों में इस्तेमाल होने वाली बिजली जो हाई वोल्टेज की है उस पावर स्टेशन अलग कर दो दोनों को अलग-अलग करो डिसेंट्रलाइज करो तो फालतू बिजली खराब ना हो और जितनी बिजली हम बचत करेंगे वही पैदा हो जाएगी और एक मेगावाट के बिजली घर को बनाने में साढ़े करोड़ का खर्चा आता है एक लाख बिजली घर भी हम लगाएंगे तो साढे लाख करोड़ का खर्चा है और हमारे पास 110 लाख करोड़ का फंड है हो सकता है फिर सड़क बनाने का काम हो सकता है फिर हॉस्पिटल हर गांव में हो डॉक्टर हर गांव में हो दवा हर गांव में मिले मैंने तो एक दिन सोचा था कि भारत के एक एक गांव के पास इतना पैसा हो सकता है कि वह आईपीएस पुलिस अधिकारी को गांव का चौकीदार बनाकर रख सकते हैं इतना पैसा एक एक गांव के पास हो सकता इस पैसे से विकास करेंगे हम और मैंने एक दिन यह सब हिसाब जोड़ा तो पता चला कि मात्र 50 लाख करोड़ में भारत का हर गांव सोने का गांव हो जाएगा स्वर्ग जैसा गांव हो जाएगा मात्र 50 लाख करोड़ के खर्चे में और है हमारे पास 110 लाख करोड़ तो जो 60 लाख करोड़ बचेगा उसको भारत माता के नाम से एक फिक्स डिपॉजिट में जमा कर देंगे तो साल का ब्याज 6 लाख करोड़ का आ जाएगा किसी को टैक्स लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी और इस देश की पूरी अर्थव्यवस्था को जीरो टैक्स बना अंग्रेजों ने जो टैक्स लगाए हैं वो अब हम नहीं लगाएंगे कोई टैक्स की जरूरत ही नहीं है क्योंकि टैक्स से जितना पैसा आता है वह तो विदेशी पैसे को भारत में ले आए उसके ब्याज से ही आ जाता है जरूरत क्या है और टैक्स जैसे ही खत्म होंगे महंगाई अपने आप खत्म हो जाएगी आपको एक छोटी सी कल्पना देता हूं रप की चीज आपको आराम से रप में मिल जाएगी अगर सारे टैक्स खत्म हो जाए 50 र लीटर का जो पेट्रोल है ना यह 12 रप लीटर में मिल जाएगा लीटर का डीजल है 8 लीटर में मिल जाएगा टैक्स खत्म होने के बाद रसोई गैस का सिलेंडर जो 350 का है वह 45 का मिल जाएगा आपको बस में आना और जाना करते हैं अगर ग्वालियर से कहीं जाए 00 का टिकट लगे र में ही पहुंच जाएंगे आप रेल में भी वही होगा हवाई जहाज में भी वही होगा आपके बच्चे पढ़ते हैं इंजीनियरिंग में मेडिकल में सबका खर्चा 70 प्र कम हो जाए महंगाई 70 प्र एक दिन में खत्म हो जाएगी टैक्स व्यवस्था को हटाते अब महंगाई खम होगी तो गरीबों के लिए रास्ते खुल जाएंगे आराम से उनकी जिंदगी वो बिता पाएंगे और एक बड़ा काम होगा इनकम टैक्स खत्म जैसे ही होगा सारा काला धन इस देश में सफेद हो जाएगा एक झटके में अभी 36 लाख करोड़ का काला धन इस देश में है जो बंद पड़ा है तिजोरिया में फिर जब वह सफेद हो जाएगा तो कोई उसको तिजोरी में नहीं रखेगा सारा धन बाहर आ जाए या तो लोग बैंक में जमा करेंगे या उसको खर्चे में डालेंगे या उससे उद्योग और व्यापार करेंगे तीनों ही स्थिति में पैसा बाजार में घूमेगा और 36 लाख करोड़ अगर हमें मिलता है एक झटके में तो कटोरा लेकर भीख मांगने भारत को किसी देश के दरवाजे जाना नहीं पड़ेगा देश का सारा विकास स्वावलंबी होगा स्वदेशी हो तीन कारण है सबसे बड़ा कारण यह है कि नोट जितना बड़ा उसके नकली होने की संभावना उतनी बड़ी पाकिस्तान से नकली नोट आते हैं आप जानते हैं 15 से 20 प्रत करेंसी हमारी नकली हो चुकी है यह सरकार कहती है हर साल पाकिस्तान 18 20 हजार करोड़ की नकली करेंसी हमारे देश में डाल देता है और जब भी नकली करेंसी जाती है तो हज के नोट 500 के और 100 के नोट पकड़े जाते हैं 50 का नोट आज तक नहीं पकड़ा गया जानते हैं क्यों एक बार मैंने एक सीबीआई अधिकारी को पूछा था कि जब पाकिस्तानी एजेंटों को आप पकड़ते हैं नकली नोट के साथ तो उनसे पूछने में क्या पता चलता है तो उने का यह पता चलता है कि हज का नोट बनाना आसान है 500 का भी आसान है 100 का भी आसान है 50 का नोट बनाने में 53 खर्च हो जाता है इसलिए पाकिस्तान नहीं बनाता 20 का नोट बनाने में 25 खर्च हो लेते हैं इसलिए पाकिस्तान नहीं बनाता उसका पाकिस्तान का उद्देश्य ह 500 100 के नोट बनाकर नकली इस देश में डलवाना तो 1 500 100 के नोट ही बंद कर दो देखें पाकिस्तान क्या करता तो नकली करेंसी कम हो जाएगी दूसरा फायदा है कि रिश्वत कौन देगा फिर अभी 10 करोड़ की रिश्वत देनी है तो हजार हजार के नोट ब्रीफ केस में भर के दे आते हैं फिर 10 करोड़ की रिश्वत देनी है तो ट्रक भर के ले जाना पड़ेगा कौन देके आएगा देखें और कौन ले लेगा वह भी देखें रिश्वतखोरी कम हो जाएगी भ्रष्टाचार कम हो जाए और सबसे गंभीर बात यह है कि जब 84 करोड़ लोगों की एक दिन की आमनी रप है इसका माने 84 प्र हमारी करेंसी रप ही चाहिए हमको हज की क्यों करेंसी चाहिए 84 करोड़ लोगों ने हज का नोट नहीं देखा है अपनी जिंदगी में क्यों उनको 1000 का नोट पकड़ा ना उनको 20 की जरूरत है वही चाहिए तो करेंसी हमें छोटी रखनी और एक काम हम करना चाहते हैं अंग्रेजों के जमाने के बनाए हुए अर्थव्यवस्था के जो कानून है एक कानून है किसानों के लिए जो इस देश में लगा हुआ है वह यह कि कोई भी किसान अपनी फसल का भाव खुद तय नहीं कर सकता सरकार के अधिकारी तय करते हैं किसान अकेला है जो अपनी चीज का भाव तय नहीं करता बाकी सब लोग अपनी चीज का भाव तय करते जूता बनाने वाला भी जूते का भाव खुद तय करता है मुझे यही कीमत पर बेचना है किसान नहीं कर पाता क्योंकि अंग्रेजों का कानून है एग्रीकल्चरल प्राइस कमीशन एक्ट वह कानून हम बदलना चाहते हैं किसान को अधिकार देना चाहते हैं कि वह अपनी फसल का भाव खुद तय करे और फसल के भाव के निर्धारण में जो मानक है वह बदलना चाहते हैं अभी फसल का भाव जब तय होता है ना तो जमीन की कीमत उसमें जोड़ी नहीं जाती जबकि वह जमीन करोड़ों रुपए की होती है अगर आप कहीं जमीन खरीदें उद्योग चलाएं बैंक से कर्ज ले तो बैंक का ब्याज आप जोड़ लेते हैं किसान बेचारा वह भी नहीं जोड़ पाता क्यों नहीं जुड़ना चाहिए जैसे ही जमीन की कीमत आप जोड़ना शुरू करेंगे फसल का भाव बढ़ जाएगा किसान को ज्यादा पैसा अपने आप मिल जाए इसी तरह के हम कुछ कानून और भी बदलना चाहते हैं हिंदुस्तान में अंग्रेजों के बनाए हुए न्याय के कानून है आईपीसी सीआरपीसी सीपीसी इन्हें बदलना चाहते हैं क्योंकि आईपीसी सीआरपीसी सीपीसी की व्यवस्था यह है कि साढ़े करोड़ मुकदमे चल रहे हैं फैसला नहीं आ रहा है एक बार सुप्रीम कोर्ट के एक चीफ जस्टिस महोदय को मैंने पूछा कि साढ़े करोड़ मुकदमों का फैसला कब आएगा तो उन्होंने कहा अंग्रेजों के कानून अगर ऐसे ही चलेंगे तो 350 साल में फैसला आएगा ना वादी जिंदा रहेगा ना प्रतिवादी जिंदा अंग्रेजों के कानून ऐसे घन चक्कर हैं कि आप फैसला दे ही नहीं सकते यह कानून हमें हटाने कौन से कानून लाने हैं भारत में पहले एक न्याय व्यवस्था चलती थी उसका एक नाम लेकर उदाहरण देता हूं एक राजा था चंद्रगुप्त विक्रमादित्य बड़ा न्यायप्रिय था उसके दरबार में एक मुकदमा आया दो माताएं थी एक बेटा था एक मां कह रही थी मेरा बेटा है दूसरी कह रही थी मेरा बेटा दोनों झगड़ रही थी राजा ने कहा तलवार ले आओ आधा आधा काट दो आधा इसको दे दो आधा इसको दे दो जैसे ही तलवार आई तो असली मां चिल्लाने लगी नहीं नहीं इस बेटे को दूसरी मां को दे दो कम से कम जिंदा तो रहेगा राजा समझ गया कि असली मां यही है जो कटते हुए नहीं देख सकती अपने बच्चे को तो नकली मां से बच्चा छीनकर असली मां को दे दिया पूरे मुकदमे का फैसला दो मिनट में हो गया यह है भारतीय न्याय व्यवस्था अब इसी मुकदमे को आप सीआरपीसी आईपीसी और सीपीपीसी में लेकर आ जाओ अंग्रेजी न्याय व्यवस्था में मैं आपको विनम्रता पूर्वक कह सकता हूं 30 साल केस चलता रहेगा फैसला ही नहीं हो पाएगा असली मां कौन है नकली मां कौन है हो सकता है दोनों माताएं मर जाएं तो भी मुकदमा चलता ही रहेगा चलता ही रहेगा चलता ही रहेगा यह है अंग्रेजी न्याय व्यवस्था हमको यह नहीं चाहिए अंग्रेजी न्याय हमको चाहिए तुरंत न्याय मिले और न्याय मिले फैसला ना हो केस का डिसीजन नहीं करना है जजमेंट देना है इसके लिए न्याय व्यवस्था है फैसले करने के लिए नहीं है अब फैसला और न्याय में अंतर जानते हैं क्या है एक और उदाहरण से समझाता हूं एक कानून है हमारे देश में वह यह कहता है कि गाय को डंडे से मत मारो मारोगे तो जेल हो जाएगी प्रिवेंशन ऑफ एनिमल क्रुएलिटी एक्ट डंडे से मारो जेल हो जाएगी लेकिन उस साय गाय की गर्दन काट दो और एक-एक मास की बोटी बेच दो उसकी कुछ नहीं होगा क्योंकि मांस बेचने के लिए कतलखाना खोलने का इस देश में सबको अधिकार है अब गाय को डंडे से पीटो तो जेल हो जाए गर्दन से काटो तो मीट एक्सपोर्ट का आपको लाइसेंस मिल जाएगा यह न्याय यह तो अन्याय है बच्चे को जन्म लेने से पहले गर्भ में मार डालो तो गर्भपात है जन्म लेने के बाद मारो तो 302 का केस बनता है फांसी हो जाती है और गर्भपात में मार डालो तो कुछ नहीं यह न्याय हमारे देश में एक कानून है बलात्कार के खिलाफ अंग्रेजों के जमाने से चला आ रहा है वो कानून क्या है किसी भी मां बहन बेटी का बलात्कार हो तो मां बहन बेटी को सिद्ध करना पड़ता है कि बलात्कार हुआ या नहीं जिसने किया उसको कुछ सिद्ध नहीं करना पड़ता यह न्याय क्या करें इस व्यवस्था को खत्म करना है इसको तो चलाना नहीं है रखना नहीं है एक मिनट परिणाम क्या हो रहा है कि जब बलात्कारियों को सिद्ध नहीं करना है कि उन्होंने क्या किया जिसके ऊपर घटना घटित हुई है उसको सिद्ध करना है तो सारे बलात्कारी छूटने ही वाले हैं और इस हिंदुस्तान में 100 बलात्कार के मुकदमे दर्ज होते हैं तो पांच को ही सजा होती है 95 छूट जाते हैं वह दोबारा किसी मां बहन बेटी की इज्जत को तारतार करते हैं ऐसा न्याय हमें नहीं चाहिए हमें संपूर्ण न्याय चाहिए इसकी व्यवस्था हम लाना चाहते हैं इसी तरह हम शिक्षा व्यवस्था को बदलना चाहते हमारी आज की शिक्षा व्यवस्था मै कोले के समय की बनाई हुई है बहुत पुरानी है मै कोले ने अंग्रेजों के गुलामी के तंत्र को मजबूत करने के लिए कुछ क्लर्क पैदा करने हैं इसके लिए यह शिक्षा व्यवस्था लाई थी मै कोले ने खुद अपने ड्राफ्ट में लिखा है कि गुलामी की व्यवस्था को पक्का करने के लिए अंग्रेज सरकार और भारतवासियों के बीच पुल का काम करने के लिए कुछ क्लर्क की जरूरत है इसके लिए उन्होंने यह लाया इंडियन एजुकेशन एक्ट अब वही हम क्यों चला रहे हैं आजादी के 62 63 साल के बाद हमें तो गुलाम नहीं पैदा करने हमें तो क्लर्क पैदा नहीं करने हमें तो वैज्ञानिक चाहिए इंजीनियर चाहिए डॉक्टर चाहिए चार्टेड अकाउंटेंट चाहिए और दिमाग से चाहिए इसलिए शिक्षा व्यवस्था बदलनी है और शिक्षा व्यवस्था की भाषा भी बदलनी है हम अभी अंग्रेजी में पढ़ते और पढ़ाते हैं जो दुनिया का कोई देश नहीं करता आजादी के बाद कोई भी देश ने गुलामी की भाषा को अपने यहां नहीं ढोया भारत को छोड़कर सभी देशों ने अपनी मातृ भाषा लाई अपने देश छोटे-छोटे देश हैं डेनमार्क नाम का बिल्कुल पिद्दी सा देश है हमारे हिंदुस्तान के किसी मोहल्ले के बराबर का है इतनी ही आबादी है उस डेनमार्क की वह देश इतना छोटा होकर अपनी पूरी पढ़ाई डेनिश में कराता है इंजीनियरिंग डेनिश में होती है मेडिकल साइंस वहां डेनिश में है सारा काम वहां वह मातृभाषा में कराता है तो हम 115 करोड़ की आबादी के देश अपनी मातृभाषा में काम क्यों नहीं कर सकते हम इंजीनियरिंग क्यों नहीं हिंदी में पढ़ा सकते मेडिकल की पढ़ाई हिंदी में क्यों नहीं हो सकती मैनेजमेंट की पढ़ाई हिंदी में क्यों नहीं हो सकती चार्टेड अकाउंटेंसी की पढ़ाई हिंदी में क्यों नहीं हो सकती कुछ लोग कुतर्क देते हैं कि हिंदी में शब्दों की कमी है ऐसी कोई कमी नहीं है डेनिश भाषा के पास तो बिल्कुल शब्द नहीं है उससे तो हजार गुना ज्यादा हमारे पास है शब्दों की कोई कमी नहीं शब्दकोश की कोई कमी नहीं हमारे पास पर्याप्त शब्द है अंग्रेजी से ज्यादा शब्द है हमारे पास अंग्रेजी तो भाषा पांचवीं शताब्दी से आई है उसके पहले तो कोई जानता नहीं उनका इतिहास क्या है दुनिया भर के देशों से खिचड़ी बनाकर इकट्ठी की हुई है उन्होंने लैटिन से कुछ ले लिया जर्मन से कुछ ले लिया फ्रेंच में से कुछ ले लिया इटालियन में से ले लिया इससे ले लिया और बना दिया हमको तो यह नहीं करना पड़ा संस्कृत में ऐसा घालमेल करने की जरूरत नहीं पड़ी कभी इस देश को करोड़ों साल से और जितना ज्यादा शब्द संस्कृत में हो सकते हैं दुनिया की किसी भाषा में संभव नहीं है क्योंकि शब्द रूप और धातु रूप यही एक भाषा में है करोड़ों शब्द अंग्रेजी में तो अकाल है शब्दों का एक शब्द है सन एस यू एन वो अकेला ही है दूसरा है ही नहीं सूरज को बोलने का सन के अलावा दूसरा शब्द नहीं अंग्रेजी के पास और हम अगर संस्कृत और हिंदी की बात करें तो दिनकर दिवाकर रवि भास्कर मार्तंड 84 शब्द है हमारे पास एक शब्द है अंग्रेजों के पास मून वह अकेला है इकलौता है और हम चंद्रमा के अगर शब्दों की गिनती शुरू कर दें तो वह 62 63 है एक शब्द है उनके पास वाटर पानी और वह पानी चाहे नदी का हो चाहे नाले का हो चाहे तालाब का हो चाहे कहीं का वो एक ही है वाटर हमारे पास तो हर जगह के पानी के लिए अलग शब्द है नदी के पानी के लिए अलग आकाश के पानी के लिए अलग समुद्र के पानी के लिए अलग तालाब के पानी के लिए अलग शब्दों का भंडार जितना बड़ा हमारे पास है किसी के पास नहीं और जिस भाषा के पास शब्दों का भंडार हो वहां पाठ्यक्रम भी बहुत आसानी से बन सकते हैं पढ़ाए जा सकते हैं इसलिए हमें तो अंग्रेजी को छोड़ना ही है और ऐसे ही छोड़ना है जैसे अंग्रेजों को छोड़ा था अंग्रेजों को छोड़ दिया तो उनकी अंग्रेजी को छाती से क्यों लगाकर घूमे जरूरत क्या है हमें तो नहीं जरूरत है आप बोलेंगे जी अंतरराष्ट्रीय व्यापार करना है तो अंग्रेजी की जरूरत है कुछ जरूरत नहीं है जापान बिना अंग्रेजी जाने सीखे समझे अंतरराष्ट्रीय व्यापार करता है जापान का प्रधानमंत्री भी अंग्रेजी नहीं जानता चपरासी भी अंग्रेजी नहीं जानता सारी दुनिया में उनका माल बिकता है बिना अंग्रेजी के तो हमारा क्यों नहीं बिकेगा बिना अंग्रेजी के इतना व्यापार कर सकता है जर्मनी बिना अंग्रेजी के इतना व्यापार कर सकता है आपको मालूम है इंजीनियरिंग के सबसे अच्छे सामान दुनिया में जर्मनी के ही हैं और वह बिना अंग्रेजी के कर रहे हैं फ्रांस वाले बिना अंग्रेजी के अपना काम चला सकते हैं नीदरलैंड वाले बिना अंग्रेजी के काम चला सकते तो हम भी चला सकते हैं कोई दिक्कत नहीं है हमको अपनी भाषा पर स्वाभिमान और गौरव करने की बात है कमी कुछ नहीं है हमारी भाषा मुझे तो दुख होता है कि हम हिंदुस्तानी अंग्रेजी के चक्कर में फंस के ना तो हिंदुस्तानी रह गए ना अंग्रेज बन पाए बीच में हो गई खिचड़ी हमारी कुछ आजकल अंग्रेजी पढ़े लिखे अध कचरे लोगों के घरों में जब मैं जाता हूं तो बड़ी हास्यास्पद स्थिति देखता हूं पिताजी का नाम रामदयाल माताजी का नाम गायत्री देवी बेटे का नाम टिंकू अब राम दयाल और गायत्री देवी का टिंकू कहां से आ गया यही समझ में नहीं आता और जिन्होंने बेटे का नाम टिंकू रखा उनसे पूछता हूं तुमको मालूम है टिंकू का अर्थ क्या है तो उनको नहीं मालूम टिंकू का अर्थ होता है आवारा लड़का जो बाप की ना सुने मां की ना सुने वह अंग्रेजी में टिंकू होता है यहां अच्छे खासे लड़के को टिंकू टिंकू बोल बोल के आवारा बना रहे हैं क्या मूर्ख लोग हैं इस देश में पढ़े लिखे बेटी का नाम डिंपल ट्विंकल बबली ड बब्लू डब्लू क्या मतलब है बब्लू डब्लू डंकल टिंपल नामों की कुछ कमी आ गई है क्या अकाल पड़ गया इस देश में और ऐसे ऐसे मूर्ख लोग हैं इस देश में पढ़े लिखे रोब झाड़ने के लिए अंग्रेजी में बात करते हैं अंग्रेजी अंग्रेजी आती नहीं है उनको जितने लोगों को अंग्रेजी बोलते मैंने सुना है 99 प्र गलत व्याकरण और गलत उच्चारण का उपयोग करते हैं फिर भी रोब झाड़ने के लिए बोलते रहते हैं शब्दों का अर्थ नहीं मालू फिर भी बोलते रहते हैं कभी-कभी चला जाता हूं किसी के घर में तो कहते ओ राजीव दीक्षित शी इज माय मिसेस तो मैं पूछता हूं रियली शी इज योर मिसेस क्योंकि उनको मिसेस का अर्थ ही नहीं मालूम बोल रहे मिसेस किसी की धर्म पत्नी कहती ही इज माय मिस्टर मैं पूछता हूं रियली ही इ योर मिस्टर क्योंकि मिस्टर का अर्थ नहीं मालूम यह मिसेस और मिस्टर अंग्रेज सभ्यता में से पैदा हुए दो शब्द हैं हर सभ्यता की अपनी कोई विशेषता होती है ऐसे ही अंग्रेजों की एक विशेषता है और वह विशेषता है एक्स्ट्रा मेरिटल अफेयर्स पर स्त्री गमन पर पुरुष गमन इंग्लैंड में कोई ऐसा नहीं मिलेगा पुरुष जिसके 203 महिलाओं से कम से संबंध रहे हो और एक महिला नहीं मिलेगी जिसके 20 30 पुरुष से कम से संबंध रहे हो वह एक से संतुष्ट हो ही नहीं सकते उनको बीस यों लगते हैं मेरे बहुत दोस्त हैं यूरोप में 303 शादियां की हैं और 31 व करने को तैयार सवेरे शादी शाम को तलाक फिर दूसरी शादी फिर शाम को तलाक क्योंकि भरोसा ही नहीं है दोनों को एक दूसरे पर क्योंकि शादी होती ही नहीं है आत्मा से वहां तो शरीर से होती है आत्मा को तो मानते नहीं ना वह आपको मालूम है वह मानते नहीं कि आत्मा कोई चीज है वो तो कहते हैं शरीर है और शरीर का आनंद है मिले तो ठीक नहीं मिले तो जय राम जी की अलग-अलग फिर दूसरे को ले लो फिर तीसरे को ले लो तो जिन देशों में स्त्री पुरुषों के बी सियों संबंध बनते हैं वहां पर मिस्टर एंड मिसेस शब्द उपजे और इनका अर्थ क्या है मिसेस का मतलब होता है धर्म पत्नी को छोड़कर कोई भी वह स्त्री जिसके साथ आप रात बिस्तर में बिता सकते हैं वह मिसेस होती है ताली मत बजाइए और मिस्टर का माने वह पुरुष जो पति को छोड़कर है जिसके साथ आप बिस्तर में रात बिता सकती हैं यह है मिस्टर एंड मिसेस यहां धर्म पत्नी जो अग्नि को साक्षी मानकर आपके घर में आई है आप उसको मिसेस बनाने में लग गए अकल नहीं है कुछ समझ नहीं है हमको एक बहुत खराब शब्द है अंग्रेजी का जो किसी भाषा में नहीं है हो भी नहीं सकता मैडम जानते हैं मैडम का अर्थ क्या यूरोप में और इंग्लैंड में विशेष रूप से वैश्या घर को चलाने वाली जो मुख्य संचालिका होती है उसको मै कहते घर को चलाने वाली जो मुख्य संचालिका है उसको मैडम कहते और यहां हमारी सम्मानजनक मां बहन बेटियों को मैडम मैडम बोलकर हम कहते रहते हैं अकल नहीं है समझ नहीं और मां बहन बेटियां भी कहती है मैडम बोलो मुझे समझ तो लो पहले कि मैडम का अर्थ क्या है यह अध कचरा ज्ञान हमारा अंग अगर ठीक से जानी होती समझी होती पढ़ी होती अंग्रेजी का इतिहास पढ़ा होता शब्दों का इतिहास पढ़ा होता कहां से यह शब्द निकले हैं क्यों निकले हैं हर एक शब्द के पीछे कोई इतिहास है और उनकी कोई सामाजिक और सांस्कृतिक व्यवस्था है उसमें से वह शब्द पैदा होते हैं एक शब्द आया फादर इन लॉ और दूसरा मदर इन लॉ यह ससुर नहीं होता वो कोई दूसरी चीज है उनके आपको मालूम है शादी वहां कांट्रैक्ट है आत्माओं का संबंध नहीं है और हर कांट्रैक्ट कानून से बंधा हुआ होता है इसलिए फादर इन लॉ है इसलिए मदर इन लॉ है इसलिए ब्रदर इन लॉ है इसलिए सिस्टर इन लॉ है क्योंकि यह सब कांट्रैक्ट से बंधे हुए हैं और कांट्रैक्ट लॉ से बंधा हुआ है भारत में यह नहीं है हमारे यहां तो ससुर और सास माता-पिता के समान है आत्मा से हमारा बंधन है हम मूर्खों के मूर्ख फर इन लॉ बताते रहते यह ससुर है फादर इन लॉ जीभ फटती है हमारी ससुर कहने में और फादर इन लॉ कहने में गर्व मूर्खों के मूर्ख है सच में मेरा यही कहना है अंग्रेजी इस्तेमाल करो तो पूरी तरह से जान लो समझ लो फिर इस्तेमाल करो तो अपनी मूर्खता पर हंसी तो नहीं आए कम से कम मूर्खता करो तो समझ के करो और जब समझ नहीं है तो फसना क्यों उसमें कुछ मूर्खता की चीजें हैं अंग्रेजी में प्यूटी पुट ब्यूटी बुट और अगर ब्यूटी बट तो प्यूटी पट सीटी कट ब्यूटी बट तो प्यूटी पट क्यों नहीं होना चाहिए बताइए मुझे और अगर प्यूटी पुट तो ब्यूटी बुट और सीटी कुट क्यों नहीं होना चाहिए कोई उत्तर नहीं एक अंग्रेजी का शब्द है केमिस्ट्री तो सी एच ईई एम आई एस टी आर वाई केमिस्ट्री ठीक है तो यहां क्या है सी एच का है तो चोपड़ा में सी एच ओ पी ए आर ए चोपड़ा में तो कोपड़ होना चाहिए अगर केमिस्ट्री में केमिस्ट्री हो सकता है तो चोपड़ा में कोपड़ क्यों नहीं होना चाहिए और कोपड़ का चोपड़ा हो रहा है तो केमिस्ट्री का चम क्यों नहीं होना चाहिए कुछ जवाब नहीं कहीं सी का है कहीं सी चा हो जाता है कहीं सी सा हो जाता है कुछ ता ही पता नहीं है कहां सा कहां का कहां चा हमारी संस्कृत में तो नहीं होता कहीं भी हिंदी में भी नहीं होता यह अध कचरे अंग्रेजी पढ़े लिखे लोग क्या सिखाते हैं अपने बच्चों को वो सिखाते हैं मैं किसी के घर में घुसता हूं अक्सर मेरे साथ होता है कहते हैं बेटा अंकल आए जरा पोयम तो सुनाओ तो मैं कहता हूं भा ये अंकल कौन है मैं चाचा हो सकता हूं मामा हो सकता हूं ताऊ हो सकता हूं फूफा हो सकता हूं मा मौसा हो सकता हूं कुछ भी हो सकता ये अंकल कहां से हो गया मुझे तो समझ में नहीं आता अंकल है कौन चाचा मामा काका मौसा फूफा हमारे यहां तो निश्चित शब्द है ना और किसी के भी घर में घुसो मामा हो जाओ तो कितना अच्छा नहीं तो चाचा हो जाओ यह अंकल होने की जरूरत क्या है वो अपने बच्चों को कहते हैं अंकल आए तो फिर वह सुधारते हैं अच्छा भाई चाचा कहल पाएंगे मामा कहल फिर वो कहते पोयम सुनाओ कविता नहीं पोयम सुनाओ अब कविता और पोयम में जमीन आसमान का अंतर है वह बताता हूं अंतर क्या वो बच्चा टेप रिकॉर्डर की तरह से चालू हो जाता है रेन रेन गो अवे कम अगेन अनदर डे लिटिल बेबी वांट्स टू प्ले अब बच्चे को पूछता हूं तुमको मालूम है इसका अर्थ क्या है रेन रेन गो अवे कम अगेन अनदर डे कहता मालूम नहीं किसने सिखाई मम्मा ने सिखाई मम्मा को पूछा अर्थ मालूम है रेन रेन गो अवे नहीं मालूम किसने सिखाई उनके टीचर ने सिखाई टीचर को पूछो रेन रेन गो अवे अर्थ मालूम नहीं है भेड़िया धसान लगा रखा है रटा रहे हैं रटा रहे हैं रटा रहे हैं फिर बच्चे को जब मैं समझाता हूं देखो इसका अर्थ है बारिश बारिश तुम चली जाओ मत आओ क्योंकि मुझे खेलना है अब बारिश चली जाए वह यहां ना आए और यह ईश्वर से प्रार्थना के रूप में बच्चा कहे और करोड़ों बच्चे यह कहे ईश्वर ने सुन ली तो बारिश को बुला लिया वापस क्योंकि सब बच्चे कह रहे हैं रेन रेन गो अवे भाग जाओ बारिश तुम तो ईश्वर ने कहा चलो ठीक है बुला लो वापस तो बारिश तो होगी नहीं खेत में पानी तो आएगा नहीं तो अन्न तो पैदा हो होगा नहीं तो खाएंगे क्या रेन रेन गो अवे खाकर पेट भरेगा हम मूर्खों को यह पता नहीं है कि हिंदुस्तान में 14 करोड़ हेक्टेयर जमीन पर जहां खेती होती है उसमें से 5 करोड़ हेक्टेयर जमीन पर ही पानी की व्यवस्था है 9 करोड़ हेक्टेयर जमीन की खेती तो बारिश की ताकत पर होती है जिस देश की 60 प्र खेती बारिश पर होती हो वहां के बच्चे यह गाए रेन रेन गो अवे कम अगेन अनदर महा मूर्खता की यह हद है फिर उन बच्चों को मैं कहता हूं कि यह है पोयम जो आई है इंग्लैंड से क्योंकि इंग्लैंड में बारिश कभी भी होती है मौसम का भरोसा नहीं इंग्लैंड में कहते हैं तीन डब्लू है जिनका कोई भरोसा नहीं वेदर कोई भरोसा नहीं वाइफ कोई भरोसा नहीं आज है कल नहीं है हां बिल्कुल भरोसा नहीं है वाइफ का वेदर का भरोसा नहीं वर्क काम का भरोसा नहीं 20 साल आप किसी कंपनी में काम कर रहे हैं कल आपको पिंक स्लिप देंगे और कहेंगे जी चले जाओ हमारे यहां ऐसा नहीं है हमारे यहां तो वेदर एकदम पक्का है भरोसा है बारिश का सीजन है तभी बारिश होगी ठंड में तो ठंड होगी गर्मी में गर्मी ही होगी यह भारत में नहीं हो सकता और वाइफ तो इतनी पक्की है इस देश में कि एक जन्म नहीं सात सात जन्म तक का बंधन है तो हमको यह अंग्रेज में जाने की जरूरत नहीं है फिर आप बोलेंगे जी भारत के बच्चों को क्या सिखाना चाहिए कविता सिखाइए आपको एक मैं मराठी कविता बताता हूं बहुत सुंदर कविता है रे येरे पावसा तुला दे तो पैसा पैसा झाला खोटा पाऊ साला मोठा यह है भारतीय कविता बच्चे क्या कह रहे हैं बारिश बारिश तुम जल्दी आओ येरे येरे माने जल्दी जल्दी आओ येरे येरे पाऊ सा तुला दे दो पैसा देने को तैयार है बच्चा तुम आ जाओ एक बार हम बारिश को बुलाने वाले देश के लोग हैं क्योंकि 60 प्र उत्पादन बारिश की ताकत पर होता है तो यहां के जमीन से जो कविता फटेगी वो येरे येरे पावसा ही होगी इंग्लैंड की जमीन से जो कविता फूटे गी वो रेन रेन गो अवे होगी हर सभ्यता की कविताएं अलग होती हैं हर संस्कृति के वाक्य अलग होते हैं सूक्त अलग होते हैं यह समझने की जरूरत है अंग्रेजी अत में यरे यरे पावसा नहीं मिलेगा तो भारतीयता में आइए इस अंग्रेजी का पिंड छोड़िए आप दुनिया भर में बोलते फिरते अंग्रेजी अंतरराष्ट्रीय भाषा बिल्कुल नहीं है 200 देश हैं मात्र 14 देशों में अंग्रेजी चलती है और उन्हीं देशों में अंग्रेजी है जो अंग्रेजों के गुलाम है भारत पाकिस्तान बांग्लादेश ऑस्ट्रेलिया न्यूजीलैंड कनाडा वेस्ट इंडीज फिर साउथ अफ्रीका फिर स्कॉटलैंड फिर आयरलैंड यह सब अंग्रेजों के गुलाम है इसलिए अंग्रेजी बोलते हैं जो देश गुलाम नहीं हुए वहां अंग्रेजी नहीं है मैं तो आपको एक रहस्य की बात बताता हूं दुनिया की सबसे बड़ी संस्था यूनाइटेड नेशंस में अंग्रेजी नहीं चलती वहां फ्रेंच चलती है अंग्रेजी में भाषांतर करते हैं एक बार मैंने एक अधिकारी को पूछा यूएन अधिकारी को कि आप अंग्रेजी में काम क्यों नहीं करते उन्होंने कहा वोह कोई भाषा है मैं पूछा मतलब उन्होंने कहा सबसे रद्दी भाषा दुनिया की जिसका का अपना व्याकरण नहीं है जिसके अपने शब्द नहीं है सब नकल करके घेर बटोर के इकट्ठा किया तो फिर मैंने कहा आप फ्रेंच में काम क्यों करते हैं तो उसने इतना सुंदर जवाब दिया जो आपको भी पसंद आएगा उसने कहा फ्रेंच बहुत वैज्ञानिक भाषा है मैं बोला इसकी वैज्ञानिकता क्या है तो उसने कहा इसमें धातु रूप अलग होता है शब्द रूप अलग होता है मैं पूछा यह कहां से आया है उसने कहा संस्कृत में से आया क्योंकि दुनिया में एक ही भाषा है संस्कृत जिसके धातु रूप जिसके शब्द रूप और आप जानते हैं कितनी विशेष भाषा है कि आपकी क्रिया बदलती रहती है हर क्षण आपके संज्ञा के हिसाब से मैं जाता हूं वे जाते हैं तुम जाते हो तीनों में ही अलग किसी भाषा में नहीं होता इसलिए जब इतनी अच्छी भाषा अपने पास है संस्कृत और अब सब वैज्ञानिक कहने लगे कि सबसे ज्यादा वैज्ञानिकता संस्कृत में है शब्दों की संख्या संस्कृत में है तो क्यों अपनी संस्कृत को क्यों ना अपनाए हिंदी को क्यों ना अपनाए मराठी तेलुगु तमिल कन्नड़ मलयालम को क्यों ना अपनाए इस देश में क्यों विदेशी भाषा का मोह करें इस मोह को तो छोड़ना पड़ेगा और इसको तो खत्म करना ही पड़ेगा भाषा को हमारे देश में वैसे ही तय करने की जरूरत है जैसे अंग्रेजों के साथ हमने तय किया था अंग्रेज रहे तो ठीक है अंग्रेजी थी अब अंग्रेज गए तो अंग्रेजी को विदा करना ही है और जिस दिन अंग्रेजी विदा होगी उस दिन इस देश में एक नई क्रांति होगी आप जानते हैं क्या होगा इस देश के करोड़ों विद्यार्थी जो गणित में अच्छे हैं भौतिक शास्त्र में अच्छे हैं रसायन शास्त्र में अच्छे हैं अर्थशास्त्र में अच्छे हैं इतिहास में अच्छे हैं सब विषयों में पारंगत हैं लेकिन अंग्रेजी में फेल होते हैं तो उनकी जिंदगी रुक जाती है सिर्फ इसलिए कि अंग्रेजी में फेल हो गए मैं यह बात अपने आप से कहना चाहता हूं और आपसे कि उनको अंग्रेजी में ही फेल होना चाहिए क्योंकि वह उनकी भाषा नहीं है विदेशी है कौन सा अंग्रेज है जो हिंदी में पास होकर दिखा सकता है आप ले आइए और कौन से अंग्रेज परिवार के लोग हैं जो मार मार के अपने बच्चों को हिंदी सिखाते हो ले आइए हम मार मार के अपने बच्चों को अंग्रेजी क्यों सिखा रहे हैं और अंग्रेजी में फेल हो रहे हैं तो उस पर अफसोस क्या कर रहे हैं फेल तो उनको अंग्रेजी में ही होना चाहिए पास तो हिंदी में होना चाहिए संस्कृत में होना चाहिए क्योंकि विदेशी भाषा में फेल नहीं होंगे तो किसमें फेल होंगे लेकिन हमारे देश की मुश्किल क्या है कि जो विदेशी भाषा में फेल हो गया वह जिंदगी में फेल हो जाता है वह कहीं भी पास नहीं हो पाता है पूरा जिंदगी भर वह दर्द सहता रहता है अंग्रेजी का मैंने देखा है इस देश के बहुत विद्यार्थियों को जो अंग्रेजी में लिख नहीं सकते पढ़ नहीं सकते बोल नहीं सकते वह लिखते पढ़ते बोलते हैं मातृभाषा में फिर उसका भाषांतर करते हैं विदेशी भाषा में उनकी जिंदगी का छह गुना ज्यादा समय इसी भाषांतर में निकल जाता है फिर परिणाम क्या होता है दो-तीन साल में जो इंजीनियरिंग होना चाहिए वह साढ़े साल में होता है 6 साल में होता है सात साल में डेढ़ दो साल में जो मेडिकल की पढ़ाई होनी चाहिए वह पाच सात साल खिंच जाती है भाषा को बदल दीजिए मातृभाषा ले आइए सारी इंजीनियरिंग और मेडिकल की पढ़ाई डेढ़ दो साल में ही हो जाएगी चार्टेड अकाउंटेंसी की पढ़ाई छ आठ महीने में हो जाएगी मैनेजमेंट की पढ़ाई दो-तीन महीने में हो जाएगी और एक दिन मैंने मेरे ऊपर यह करके देखा कि पहली कक्षा से 12वीं तक में अंग्रेजी हटा दूं हर जगह से तो 12 साल में जितना मैंने सीखा मैं दो साल में व सब सीख सकता हूं 10 साल अपनी जिंदगी के बचा सकता हूं दूसरे काम में लगा सकता करोड़ों विद्यार्थी वंचित है इस देश में वह सिर्फ अंग्रेजी के कारण हमें इसको हटाना है मातृभाषा के आधार पर शिक्षण व्यवस्था को लाना इसके लिए भारत स्वाभिमान अभियान है और ऐसे कुल हम 60 65 काम करना चाहते हैं इस देश में छोटे बड़े कुल मिलाकर इस व्यवस्था को सुधारने के इन्हीं सब का काम के लिए भारत स्वाभिमान बनाया एक और काम हम करना चाहते हैं कि ईस्ट इंडिया कंपनी आई थी लूटने के लिए अब आजादी के 62 साल में 5000 विदेशी कंपनी आ गई लूटने के लिए पेप्सी कोला कोका कोला कोलगेट पामोल प्रोक्टर एंड गमल रेकेट एंड कोलमन यह सब विदेशी कंपनिया ऐसे ही लूट रही है जैसे ईस्ट इंडिया कंपनी लूट थी इनको भी हम भगाना चाहते हैं जैसे ईस्ट इंडिया कंपनी को भगाया वैसे य पेप्सी कोक को भी भगाना चाहते हैं उसके लिए स्वदेशी आंदोलन इस देश में फिर पैदा करना चाहते हैं एक बार स्वदेशी आंदोलन लोकमान्य तिलक ने शुरू किया था महात्मा गांधी ने किया था विनायक दामोदर सावरकर ने किया था अब वही स्वदेशी आंदोलन फिर करना चाहते हैं गांधी जीी तिलक और सावरकर ने किया था ईस्ट इंडिया कंपनी के खिलाफ हम वह करना चाहते हैं पेप्सी कोका कोला जैसी 5000 कंपनियों के खिलाफ उसमें आपका हमें सक्रिय सहयोग चाहिए आप बोलेंगे क्या गांधी जी ने तिलक ने देश को समझाया कि ईस्ट इंडिया कंपनी का सामान मत खरीदो यह भाग जाएगी हम भी आपको यही समझाना चाहते हैं कि इन 5000 विदेशी कंपनियों का सामान मत खरीदो यह भी भाग जाएंगे पेप्सी कोला कोका कोला कोलगेट हिंदुस्तान लीवर प्रॉक्टर एंड गमल रैकेट एंड कोलमैन इन कंपनियों का सामान मत खरीदिए इनके स्थान पर सिर्फ स्वदेशी सामान खरीदिए देशी सामान खरीदिए पैसा देश का बचेगा अर्थव्यवस्था में ताकत बढ़ेगी मैंने एक दिन हिसाब निकाला कि सारे हिंदुस्तानी लोग पेप्सी कोक पीते हैं एक बोतल र की मिलती है 70 पैसे में बनती है 12 की वह बेचते हैं एक बोतल पर रप उनको नेट प्रॉफिट होता है टैक्स देने के बाद 700 करोड़ बोतल उनकी साल में बिकती है 7000 करोड़ रुपए वह लूट ले जाते हैं इस देश पेप्सी कोक का पानी पिलाकर और वह पानी रप का है 300 मिलीलीटर 36 का हो गया 900 मिलीलीटर 4 रप का एक लीटर एक लीटर पानी रप का हम पी रहे हैं रप लीटर का दूध नहीं पी सकते और अपने को बहुत स्मार्ट समझते हैं और जो पेप्सी कोक का पानी पी रहे हैं उसको पीने में मजा नहीं आता नाक में जलन गले में जलन पेट में जलन आंखों से आंसू निकलते हैं फिर भी गटागट पीते रहते कुछ लोग कहते हैं कि वह बेस्ट क्वालिटी है क्योंकि अमेरिका से आए उसकी क्वालिटी एक दिन पता की तो पता चला उसमें एसिड मिलाते हैं फास्फोरिक एसिड यह वही एसिड है जिससे संडास साफ करने वाला फिनाइल बनाते हैं हमारे घर में हार्पिक बनता है फिनाइल बनता है व जिस एसिड से बनता है उसी से पेप्सी कोक बनता है एक दिन मैंने मेरे घर में परीक्षण किया कि एसिड से अगर हम फिनाइल से और हार्पिक से संडा साफ कर सकते हैं तो पेप्सी से भी होना चाहिए क्वालिटी दोनों की एक ही है मैंने कर देखा बहुत अच्छा साफ होता है बहुत अच्छा एक महीने मैंने मेरा टॉयलेट साफ नहीं किया एक बोतल पेप्सी कोला लाकर स्प्रे किया 20 मिनट के बाद पानी से धोया टॉयलेट पॉट झकाझक सफेद एकदम वाइट एंड वाइट उस दिन से मैंने एक विज्ञापन शुरू किया ठंडा मतलब टॉयलेट क्लीनर अब यह पढ़े लिखे इडियट क्लास के लोग इसी टॉयलेट क्लीनर को पीते हैं अकेले नहीं पीते घर में वाले मेहमान को भी पिलाते हैं एक तरफ कहते हैं अतिथि देवता होता है देवताओं को ही संडास साफ करने का पानी पिला कुछ अतिथि तो ऐसे घर में आते हैं घुसते ही कहते हैं ठंडा लाओ माने टॉयलेट क्लीनर पिलाओ हमको मत पीजिए अच्छा नहीं क्वालिटी बहुत खराब मैं आपको सच्ची जानकारी देता हूं मैं महाराष्ट्र के विदर्भ एरिया में बहुत दिन रहा वहां कपास की फसल होती है कपास कीड़े बहुत लगते हैं कीड़ों को मारने के लिए किसान पेप्सी कोक स्प्रे करते हैं और कीड़े मर जाते हैं क्योंकि पेप्सी कोक में खतरनाक जहर है क्लोरो पायरी फॉस एंडोसल्फान मेलाथियान डाई क्रोमेट मोनोक्रोटोफॉस जिससे कीड़े मरते हैं फसल के वह पेप्सी कोक है मत पीजिए इसको तो क्या पिए गन्ने का रस संतरे का रस मुसम्मी का रस दही की लस्सी गाय का दूध कुछ भी पीजिए 7000 करोड़ अगर गन्ने का रस पीने लगे तो करोड़ों किसानों को इतना पैसा मिलेगा कि वह गन्ना पैदा करने में ही करोड़पति हो जाए तो पैसा देश के किसान को दीजिए ना कि अमेरिका की कंपनी ऐसे य आप कॉल गट क्लोज अप मत खरीदिए यह विदेशी पेस्ट है दांत साफ करने के लिए जो आप कॉल गट क्लोजअप इस्तेमाल करते हैं कितनी लूट है 30 का 100 ग्राम है 00 किलो 00 किलो बादाम है 00 किलो टूथपेस्ट 50 किलो घी आता है गाय का 00 किलो पेस्ट है पढ़े लिखे लोग क्या करते हैं 00 किलो का पेस्ट रगड़ हैं और वश वेशन में थूकते और 50 किलो गाय का घी रोटी पर लगा के खाते हैं सस्ती चीज खाते हैं महंगी चीज थूकते हैं कहते हैं हम बहुत स्मार्ट मैं कहता हूं और स्मार्ट बनो कहते क्या करें मैं कहता हूं यह 00 किलो का पेस्ट थूकते क्यों हो इसी को रोटी पर लगा लगा के खा लो क्योंकि घी से महंगा है यह मूर्खता मत करिए कॉल गेट क्लोज अप की बंद करिए इसको आप बोलेंगे दांत कैसे साफ करें नीम का दातुन बबूल का दातुन टैक्स फ्री कॉस्ट फ्री साइड इफेक्ट नहीं है एक्सपायरी डेट नहीं गली गली गांव गांव मिलता है जो दातुन नहीं कर सकते तो दंत मंजन करिए हमारे पतंजलि योग पीठ का दंत मंजन ले लीजिए दिव्य दंत मंजन उसको खरीदेंगे तो पैसा हमारे ट्रस्ट में आएगा और हमारे इस भारत स्वाभिमान के काम में लग जाएगा यह कॉल गट क्लोज अप का पैसा तो अमेरिका जाएगा बंद करिए उसको दंतमंजन घर में बना लीजिए थोड़ा नमक थोड़ा तेल बस और थोड़ी हल्दी तीनों मिलाकर दांत पर घिस लीजिए दंत मंजन यह विदेशी फालतू में साबुन मत खरीदिए लक्स लाइफ बॉय लिरिल रेक्सोना मुझे तो यह दुख होता है 4 रप का 100 ग्राम एक साबुन आता है इस देश में डफ 00 किलो और लोग नहाते और पानी में बहाते हैं उसको 400 रप किलो दो स रुप किलो बादाम नहीं खा रहे हैं 400 रुप किलो साबुन रगड़ रहे क्यों फालतू पैसा खर्च कर आप बोलेंगे नहाए कैसे चने के आटे से नहाए बेसन से मुल्तानी मिट्टी से नहाए दूध से नहाए हमारे देश में महाशिवरात्रि आती है तो शंकर जी को दूध से नहला हैं कि नहीं तो भगवान नहा सकते हैं तो भक्त क्यों नहीं नहा सकते दूध से और जब बुजुर्गों के पांव छुओ तो एक ही आशीर्वाद देते हैं दूधों नहाओ पूतो फलो कुछ तो मानो बुजुर्गों की दूध से नहाओ कोई बुजुर्ग यह नहीं कहता लक्स लगाओ पूतो फलो लाइफ बॉय लगाओ पुत्रियां फलो सब कहते हैं दूधों नहाओ पूतो फलो दूध से नहाओ मैंने हिसाब निकाला हम सब दूध से नहाने लगे तो बिक्री दूध की बढ़ेगी मुनाफा किसानों को मिलेगा पैसा देश का बचेगा गाय बैल पालने पड़ेंगे तो गोबर और मूत्र ज्यादा होगा तो खेतों में भी वह डल पाएगा तो यूरिया डीएपी भी बंद हो जाएगा लाखों करोड़ का खर्चा बच जाएगा दे दूध से नहाए और दाढ़ी भी दूध से बनाइए शेव करते हैं ना दूध से थोड़ा दूध ले लीजिए लगाइए रेजर चलाइए बहुत क्लीन शेव बनती है मैं 15 साल से करता हूं चार फायदे हैं पहला फायदा दूध लगाओ चिकना हो जाता है चेहरा तो रेजर बहुत आसानी से चलता है तो ब्लेड ज्यादा दिन काम करता है दूसरा फायदा दूध लगाओ तो दूध गंदगी निकाल देता आपको मालूम है दूध बेस्ट क्वालिटी क्लींजिंग एजेंट है बड़े-बड़े ब्यूटी पार्लर्स में मिल्क क्लींजिंग ही होता है 00 में करते हैं मैं फोकट में बता रहा हूं आपको दूध लगाओ तो गंदगी निकलती है चेहरा साफ होता है तो कील मुहा से नहीं होते और दूध लगाओ चेहरा साफ हो तो चेहरा चमकता है फोकट में स्मार्ट बनने का रास्ता बता रहा हूं आपको कल से शुरू कर दो दूध से दाढ़ी बनाओ दूध से नहाओ और फायदा हो तो पड़ोसियों को बताओ सारे देश में यह हमें फैशन बनाना जिंदगी को थोड़ा बदलो कपड़े पहनने हैं तो सूदी पहनो खादी के पहनो जूते चप्पल खरीदने हैं तो मोची से खरीदो बाटा का मत खरीदना बहुत लूट खोर कंपनी बाटा क्या करता है आगरे में जूता बनवा है आपको चलकर दिखा देता हूं कहीं दूर से नहीं आगरे से बनवा है 00 का जूता और मोहर लगाता है 9995 पैसे आपको लगता है यह तो बड़े ईमानदार हैं 00 नहीं लेते वोह लूट लेते हैं आपको छ गुना 00 का जूता है वो तो अपने मोची से खरीद लो मोच हों को रोजगार मिल जाएगा बाटा को पैसे क्यों दे रहे हैं तो माने विदेशी माल बिल्कुल खरीदना बंद कर दो आप स्वदेशी खरीदो स्वदेशी बनो आप पूछोगे पता कैसे चलेगा एक पुस्तक हमने बनाई है उसका नाम है जीवन दर्शन परम पूजनीय स्वामी रामदेव जी ने खुद लिखा है उस पुस्तक में पीछे के चार पन्ने पर यही जानकारी है क्या सामान स्वदेशी क्या विदेशी क्या स्वदेशी क्या विदेशी वो ले लो आप हमारे पतंजलि चिकित्सालय से मिल जाएगी इनके हाथ में है यह पुस्तक है जरा खड़े होकर दिखा दो यह पुस्तक मात्र रप की है आप इसको ले लो पीछे इसमें चार पन्ने हैं जब आप खोलोगे तो सबसे पीछे उसमें सूची है क्या वस्तु स्वदेशी क्या विदेशी उसको संभाल के रखो बाजार जब भी आप जाओ तो यह सूची देखकर जाओ और स्वदेशी सामान ही लेके आओ अपने जीवन में एक संकल्प ले लो कि हम भारतीय हैं तो भारतीय वस्तुओं का ही उपयोग करेंगे हम भारतीय हैं तो भारतीय भाषाओं का ही उपयोग करेंगे हम भारतीय हैं तो भारतीय भोजन का ही उपयोग करेंगे हम भारतीय हैं तो भारतीय औषधियों का ही उपयोग करेंगे जो भी होगा हम भारतीय भाषा भूषा भोजन भेषज सब कुछ भारतीय होगा तब जाकर हम शहीदों के सपनों को सच्चा कर पाएंगे इसी के लिए उन्होंने कुर्बानी दी है इसी स्वदेशी आंदोलन को करते-करते लोकमान्य तिलक चले गए महात्मा गांधी चले गए सावरकर चले गए वही आंदोलन अब हमें फिर जिंदा करना है इसके लिए यह भारत स्वाभिमान है तो आप सब इसमें हमारा सहयोग करेंगे ऐसी मैं विनम्र अपेक्षा लेकर आया एक तो आप हमारे सदस्य बनिए भारत स्वाभिमान के हमको इस समय सदस्यों की बहुत जरूरत है संख्या बढ़ाना है सबसे बड़ा काम 5 करोड़ लोग हमें इकट्ठे करने हैं हमारी पार्टियों के पास चार करोड़ लोग हैं हम जिस दिन 5 करोड़ हो जाएंगे हम जो कहेंगे पार्टियां वही करेंगी इस देश में नियम वही बनेगा कानून वही बने संख्या बढ़ानी है हमको तो आप हमारे ट्रस्ट में जुड़ जाइए हमारे अभियान में जुड़ जाइए जुड़ने का तरीका बहुत सरल है एक फॉर्म बनाया गया है वह आप ले लीजिए उसको दे दीजिए साधारण लोग जो सदस्य बनेंगे उनको ₹ रप उसका दान राशि है और जो विशेष बनेंगे वह 1100 है यह दान राशि हमारे भारत स्वाभिमान ट्रस्ट में जाएगी इसका एक पैसा भी किसी के व्यक्तिगत कार्य के लिए खर्च नहीं होता सारा देश के कार्य के लिए पैसा खर्च हो रहा है तो आप धन देंगे हमारे ट्रस्ट के काम आ और स्वदेशी वस्तुओं का उपयोग करेंगे तो देश है देश को स्वदेशी बनाना है खुद को स्वावलंबी बनाना है देश को भी स्वावलंबी बनाना है और संपूर्ण स्वतंत्रता और स्वराज्य इस देश में लाना है जो अभी तक आया नहीं है इन्हीं उद्देश्यों की पूर्ति के लिए हम सब प्रयास करें एक साथ मिलकर ईश्वर हमारे प्रयासों को जरूर कामयाब करेंगे क्योंकि जो अपनी मदद करते हैं ईश्वर उनकी मदद जरूर करते हैं जो खुद खड़े होते हैं ईश्वर उनको जरूर मदद करते हैं खड़ा करवाने में और मुझे ऐसा लग रहा है कि आने वाला समय कुछ ईश्वर की योजना का हिस्सा है कि ऐसी शक्तियां इकट्ठी हो रही हैं एक सन्यासी को क्या जरूरत थी यह सब करने की वह तो योग प्राणायाम में अपने लगे हुए थे उनको लगता है कि नहीं देश भी अच्छा होना चाहिए योग प्राणायाम से हम अच्छे हो जाए फिर देश को भी अच्छा बनाना है फिर उनके साथ दूसरे लोग जुड़ना शुरू हो गए अभी 70 से ज्यादा संगठन है जिन्होंने भारत स्वाभिमान को पूरी तरह से अपना सहयोग देने का संकल्प व्यक्त किया है थोड़े दिन में वह 100 हो जाएंगे 1 स हो जाएंगे संख्या बढ़ती जाएगी आप भी इसमें आ जाइए तो आपकी आत्मा को भी थोड़ा संतोष होगा मेरा तो आपसे विनम्रता पूर्वक एक ही कहना है कि आप हमारे साथ आ जाएंगे हम यह काम थोड़ा जल्दी कर पाएंगे आप नहीं आएंगे तो भी काम तो हम करेंगे यही बस इतना है कि थोड़ा में होगा आप आएंगे जल्दी होगा नहीं आएंगे तो भी होगा देर में होगा आप आ जाएंगे तो गर्व से आप कह पाएंगे कि जब भारत स्वाभिमान का अभियान चला था तो हम भी इसमें शामिल थे जैसे हम आज गर्व से कहते हैं ना मेरे दादाजी 1942 की लड़ाई में जेल गए थे छाती चौड़ी करके बोलते हैं ना ऐसे ही आपके बच्चे बोलेंगे कि मेरे मामा माता-पिता भी भारत स्वाभिमान के अभियान में शामिल थे और जो शामिल नहीं हुए तो आपकी बच्चे आपको गालियां देंगे और आप जवाब नहीं दे पाएंगे कि तुम क्या कर रहे थे जब भारत स्वाभिमान चल रहा था आपको तय करना रास्ता बिल्कुल स्पष्ट है या तो आप साथ में आ जाइए नहीं तो हमारे विरोधियों के साथ चले जाइए हमें कोई गम नहीं है क्योंकि हमें मालूम है जीत हमारी होने वाली है सार्थकता हम लाने वाले हैं सफलता हमको मिलने वाली यह बोलकर मैं आपका आभार व्यक्त करता हूं धन्यवाद देता हूं आपने बड़े ध्यान और शांति से सुना एक छोटी सी जानकारी देना चाहता हूं कि सदस्य बनने के लिए फॉर्म यहां मौजूद है हमारी स्थानीय पतंजलि समिति के पास ले लीजिए भरपूर है कोई कमी नहीं है जीवन दर्शन पुस्तक भरपूर है वह ले लीजिए कोई कमी नहीं है स्टॉल भी है तो वहां से भी मिल जाएंगे और यह स्वदेशी विदेशी का सूची पत्रक निकाल के घर में संभाल के रखिए बाजार से सभी सामान स्वदेशी लेकर आइए जो कुछ मैंने बोला है इस वि पर अगर बार-बार कुछ और सुनना हो मेरे विचारों को इन्हीं सूचनाओं को तो इसकी कुछ सीडी बनाई है एमपी3 फॉर्मेट में है आप इस तरफ बाहर जाएंगे तो मेरा एक सहयोगी है उसके पास है आप एक दो दो चार सीढ़ियां ले लीजिए उसकी हजारों कॉपियां करवा लीजिए मेरा कोई कॉपीराइट किसी सीडी पर नहीं है सबको कॉपी करने का कंप्लीट राइट है क्योंकि मैं मानता हूं ज्ञान पर किसी का अधिकार नहीं है मैंने कहीं से ज्ञान लिया आपको दिया आपने मुझसे लिया किसी और को दिया तो उसकी हजारों कॉपी कर कर के घर-घर बटवा दीजिए यह विचार जितनी तेजी से और जितनी जल्दी घरों में पहुंचेगा उतनी ही जल्दी भारत स्वाभिमान का अभियान और हमारा प्रयास सफल और सार्थक होगा यह कहकर आप सबका आभार बहुत-बहुत धन्यवाद
Rajiv Dixit
Rajiv Dixit Lecture
pallavi priya prakashan
