Rajiv Dixit Lecture 26 June 2009



 साथियों भारत देश में एक बड़ा अभियान चल पड़ा है भारत स्वाभिमान का उसके बारे में आपसे बात करने आया हूं और मेरा आनंद दोगुना आज इसलिए भी है कि मेरे ऊपर आशीर्वाद देने के लिए मेरे गुरु तुल्य माता-पिता भी दोनों मेरे साथ यहां मौजूद है उनकी उपस्थिति को प्रणाम करता हूं भाव से शरण स्पर्श करता हूं भारत स्वाभिमान का जो अभियान चला है परम पूजनीय स्वामी रामदेव जी ने शुरू किया है यह अभियान 5 जनवरी 2009 को स्थापित हुआ है और बहुत तेजी के साथ पूरे देश में फैल रहा है लगभग छ महीने अभी हुए हैं इस अभियान को शुरू हुए और ढाई लाख से ज्यादा हमारे कार्यकर्ता पूरे देश में तैयार हुए हैं और अगले छ महीने में करीब 11 ख हज कार्यकर्ता तैयार हो जाएंगे ऐसा विश्वास है इसके अलावा परोक्ष रूप से हमें काम में मदद देने के लिए सहयोगियों की संख्या करोड़ों में है इस देश में लगभग 5 करोड़ से ज्यादा हमारे सहयोगी तैयार हो रहे हैं इस काम में हमारे लिए तन मन धन से मदद देने के लिए इस अभियान को क्यों शुरू किया है इसकी जरूरत क्या है भारत देश की आजादी के 62 साल के बाद इस तरह का काम करने का महत्व क्या है यह सब बड़े प्रश्न है कोशिश करूंगा कि मेरे व्याख्यान से उनका जवाब मिल सके और मेरे व्याख्यान के बाद में आपको भरपूर समय दूंगा प्रश्न उत्तर करने के लिए आप जितनी देर यहां प्रश्न करना चाहेंगे मैं यहां बैठूंगा आपके प्रश्नों का उत्तर देने की कोशिश करूंगा भारत स्वाभिमान का अभियान जो शुरू हुआ है वह क्यों हुआ है और यह अभियान क्या है हम क्या करना चाहते हैं हमारा उद्देश्य क्या है हमारी नीतियां क्या है इन सब बातों को शुरू करने से पहले देश के बारे में थोड़ी जानकारी आपसे कहना चाहता हूं अपने भारत देश की आज की जो वर्तमान परिस्थिति है बड़ी भयावह है देश की दशा और दिशा दोनों ही ठीक नहीं हमारे भारत की जो दशा है बहुत खराब आजादी के 62 साल के बाद इतनी खराब स्थिति किसी देश की हो सकती है यह सुनकर बहुत अफसोस मन में होता है और यह एक ऐसे देश के बारे में अफसोस होता है जिस देश में महात्मा गांधी सरदार भगत सिंह उधम सिंह चंद्रशेखर आजाद तात्या टोपे नाना साहब पेशवा नाना फड़न बीस झांसी रानी लक्ष्मीबाई रानी झलकारी बाई कित्तूर नम्मा रानी दुर्गावती ऐसे महान महान क्रांतिवीर की जन्म स्थली कर्म स्थली जो देश रहा उस देश के बारे में यह जान और सोचकर बहुत अफसोस होता है कि इतनी खराब हालत है हमारे महापुरुषों के नाम लेना शुरू करें तो श्री राम श्री कृष्ण महावीर गौतम बुद्ध नानक साहब हमारे देश में दक्षिण में हुए त्रर वल्लुवर सूरदास तुलसीदास कबीर दास ऐसे अनेक अनेक महापुरुषों की जन्मस्थली और कर्मस्थली भारत उसकी आज की दशा देखकर बहुत अफसोस और दुख होता है कभी इस देश में राम राज्य रहा कभी इस देश में कृष्ण राज्य रहा राम राज्य के बारे में आप सभी जाते जानते हैं दहिक दैविक भौतिक तापा राम राज्य में कद न व्यापाराम की राज्य की स्थिति ऐसी रही है कि दैविक दुख दहिक दुख और भौतिक दुख कभी किसी को नहीं रहा और यह तीन तरह के ही दुख जीवन में सबसे बड़े होते हैं कभी नहीं रहे देश में ऐसा राज्य कभी चलता रहा जिस देश में आज उस राज्य में हर व्यक्ति को दैहिक दुख हर व्यक्ति को दैविक दुख हर व्यक्ति को भौतिक दुख हो गया तो यह तो बिल्कुल उल्टा हो गया क्या हो गया हमारे देश को कौन सी ऐसी बपता ने घेरा कौन सी ऐसी हमारी कर्म हीनता की स्थिति बनी है क्या हो गया है जो हम इतनी दारुण स्थिति में है जिस भारत में श्री राम ने कभी शासन किया और राम राज्य में कभी कोई गरीब नहीं भुखमरी का शिकार नहीं कोई चोरी नहीं करता कोई डकैती नहीं डालता किसी को फांसी नहीं देनी पड़ती कोई अपराध नहीं होता ऐसा आदर्श राज्य जिस देश में रहा हो उस देश के आज के राज्य की व्यवस्था बहुत शोचनीय है बहुत ज्यादा दुर्गति पूर्ण है कुछ छोटी छोटी बात आंकड़े में करूं तो वह कुछ ऐसी बातें हैं 115 करोड़ की आबादी का देश है और इस 115 करोड़ की आबादी के देश में करोड़ लोग इतने गरीब हैं जिनके पास एक दिन में खर्च करने के लिए 20 रुप नहीं इतनी दारुण स्थिति है इस देश हमारे भारत देश की जो सरकार चल रही है इस समय उसके प्रधानमंत्री हैं डॉक्टर मनमोहन सिंह डॉक्टर मनमोहन सिंह के एक बहुत अच्छे मित्र हैं उनका नाम है प्रोफेसर अर्जुन सेन गुप्ता बहुत बड़े अर्थशास्त्री हैं आर्थिक विषय के बड़े विशेषज्ञ माने जाते हैं प्रोफेसर अर्जुन सेन गुप्ता हमारे देश की सरकार का एक बड़ा विभाग होता है जिसका नाम है योजना विभाग प्लानिंग डिपार्टमेंट पंचवार्षिक योजनाएं जहां से बनती हैं उस विभाग के सालों साल उपाध्यक्ष रहे प्रोफेसर अर्जुन सेन गुप्ता श्रीमती इंदिरा गांधी जब इस देश में प्रधानमंत्री हुआ करती थी तो उनके आर्थिक सलाहकार रहे प्रोफेसर अर्जुन सेन गुप्ता बंगाल की सरकार के सालों साल वित्त मंत्री रहे प्रोफेसर अर्जुन सेन गुप्ता दुनिया के कम से कम 25 से ज्यादा विश्वविद्यालयों के विजिटिंग प्रोफेसर हैं प्रोफेसर अर्जुन सेन गुप्ता ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में लेक्चर के लिए जाते हैं कैंब्रिज में जाते हैं पेंसिल्वेनिया में जाते हैं बफेलो में जाते हैं स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में जाते हैं दुनिया भर के जितने बड़े विश्वविद्यालय आप जानते हैं हर जगह उनकी क्लास होती है उनके लेक्चर होते हैं इतने विद्वान व्यक्ति को भारत की सरकार ने एक जिम्मेदारी दी थी थोड़े साल पहले लगभग पा साल हो गया और उनको यह कहा था कि भारत की आजादी के 62 साल के बाद गरीबी की स्थिति क्या है इसका पता लगाइए इस पर अध्ययन करिए प्रोफेसर अर्जुन सेन गुप्ता ने 5 साल अध्ययन किया अध्ययन करने के बाद एक बड़ी रिपोर्ट तैयार की है जो करीब 700 पेज की है पूरी रिपोर्ट तो नहीं सुना सकता समय की बहुत कमी है लेकिन उस रिपोर्ट का सबसे मुख्य अंश मैं आपसे कहना चाहता हूं वह यह कि प्रोफेसर अर्जुन सेन गुप्ता ने रिपोर्ट में लिखा कि मुझे इतनी हैरानी है इतना अफसोस है इतना दुख है यह कहते हुए कि आजादी के 62 साल के बाद इस देश के विकास का काम बिल्कुल ना के बराबर हुआ है यह एक बहुत विद्वान प्रोफेसर कह रहा उनका किसी पार्टी से कोई लेना देना नहीं है इस समय वह कह रहे हैं कि विकास का काम बल ना के बराबर हुआ है लगभग विकास नहीं हुआ क्यों वह यह कहते हैं कि जब आजादी आई 1947 में तो 4 करोड़ लोग गरीब थे और जनसंख्या उस समय लगभग 33 करोड़ थी अब आजादी के 62 साल के बाद जनसंख्या 115 करोड़ हो गई और गरीबों की संख्या 84 करोड़ हो गई माने आजादी के 62 साल में गरीबी बहुत तेजी से बढ़ी है इस देश में अंग्रेजों के जमाने में गरीबी आई थी उसका कारण था कि अंग्रेज हिंदुस्तान का धन और संपत्ति सब लूट कर ले गए इसलिए गरीबी आ गई इस देश में लेकिन अंग्रेजों के जाने के बाद क्या हो गया इस देश को इतनी गरीबी कहां से आ गई इस देश में अगर गरीबी को हम ऐसा मान ले कि जनसंख्या के हिसाब से बढ़ती है हमारे देश में कुछ अर्थशास्त्री हैं जो यह तर्क देते हैं कि जितनी संख्या बढ़ेगी लोगों की उतनी गरीबी बढ़ेगी तो जनसंख्या हमारी साढ़े तीन गुनी बढ़ी है लगभग तीन से साढ़े तीन गुनी बढी है तो गरीबी भी तीन साढ़े तीन गुनी बढ़नी चाहिए तो 12 करोड़ लोग गरीब होने चाहिए अब 84 करोड़ कहां से आ गए और 84 करोड़ लोगों की गरीबी भी इतनी भयंकर है कि इनमें से लगभग 20 करोड़ लोग तो इतने गरीब हैं जो र एक दिन में खर्च नहीं कर सकते लगभग हमारे देश में 20 करोड़ लोग एक दिन में र खर्च नहीं कर सकते 12 करोड़ लोग ऐसे हैं जो एक दिन में रुप खर्च नहीं कर सकते और करीब करब 10 से 11 करोड़ ऐसे हैं जो एक दिन में पा रुप खर्च नहीं कर सकते इतनी गरीबी हमारे देश में अगर जनसंख्या की हिसाब जोड़े 34 करोड़ की जनसंख्या डबल कर दो 78 करोड़ हो जाती है तो आजादी के समय में जितनी जनसंख्या थी उससे दुगने से ज्यादा तो अभी गरीब है इस देश में तो प्रोफेसर अर्जुन सेन गुप्ता ने अपनी रिपोर्ट में एक बहुत बड़ा सवाल खड़ा किया है इस देश की प्रशासन व्यवस्था पर कि 62 साल में हमारे शासन और प्रशासन ने किया क्या गरीबी कम होने की बजाय और तेजी से बढ़ गई हमारे देश की सरकार हर 10 साल पर जनसंख्या का आकलन कराती है जिसको आप जनगणना कहते हैं जनगणना जब पिछली बार हुई 2001 में और अब होगी 2011 में तो 2001 की जनगणना के समय सरकार ने कहा कि इस देश में 20 करोड़ लोग हैं जो बेरोजगार है जिनके पास कोई काम नहीं है और 40 करोड़ लोग ऐसे हैं जो अर्ध बेरोजगार है अर्ध बेरोजगार से मतलब किसी को साल में एक महीने काम मिल जाता है किसी को साल में दो महीने काम मिल जाता है किसी को साल में तीन महीने काम मिल जाता है जब फसल की कटाई होती है तो कुको मजदूरी मिल जाती है जब फसल को शहरों से माने गांव से मंडियों में पहुंचाना होता है तो बैलगाड़ी में ढोढो करर ले जाने वालों को थोड़ा काम मिल जाता है कभी गांव में कुछ काम नहीं है तो लोग ईंट के भट्टे पर जाकर नौकरी कर लेते हैं साल में दो-तीन महीने चार महीने उनको वहां काम मिल जाता है कभी रिक्षा चला लेते हैं कभी ठेला लगा लेते हैं कभी रेहड़ी लगा लेते हैं कभी फुटपाथ पर अपनी दुकान सजा लेते हैं इस तरह का काम करने वाले 40 करोड़ लोग हैं इस देश में उनको अर्ध बेरोजगारों में गिना जाता है तो अर्ध बेरोजगार 40 करोड़ हैं पूर्ण बेरोजगार 20 करोड़ हैं माने लगभग 60 करोड़ लोग हैं जिनको कोई सम्मान नहीं है इस देश में जिंदा रहने के लिए क्योंकि रोजगार नहीं है कोई सम्मानजनक में वो लोग शामिल हैं जिनको आजकल हमारी सरकार के द्वारा कुछ काम दिया जाता है 00 रोज का तीन महीने तक साल में आप जानते हैं कि योजना चल रही है भारत सरकार की ग्रामीण विकास के लिए तो उसमें तीन महीने काम मिलता है और वह काम भी ऐसा विचित्र है खड्डा खोदो फिर मिट्टी डालो फिर खड्डा खोदो फिर उसी में मिट्टी डालो इसी का काम दे देते हैं 00 रप रोज का इतना अपमानजनक है वही खड्डा खोदा थोड़ी देर में उसी पर मिट्टी डलवाती रहते क्योंकि उनके पास सच में कोई उत्पादक काम नहीं है किसी तरह से बेगार टालने वाली स्थिति है वो भी इन्हीं 60 करोड़ में शामिल है तो आजादी के बाद हमने किया क्या है इस देश के साथ 60 करोड़ लोगों को आज तक हम काम नहीं दे पाए रोजगार नहीं दे पाए फिर आप बोलेंगे कुछ लोगों को तो रोजगार मिला हुआ है इस देश में हां मिला हुआ है हमारे देश की सेना में काम करने वाले जो सैनिक हैं थल सेना जल सेना वायु सेना में लगभग 20 लाख के आसपास है कुल 14 लाख तो आर्मी में है बाकी एयरफोर्स और नेवी में फिर अर्ध सैनिक बल है हमारे देश में बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्सेस और सीआरपीएफ वगैरह है वह 35 से 40 लाख हैं फिर हमारी रेलवे में 15 लाख लोग काम करते हैं फिर बैंकों में करीब 17 लाख लोग काम करते हैं फिर बीमा कंपनियों में कुछ 12 1 लाख लोग काम करते हैं फिर भारत के पब्लिक सेक्टर में कुछ लोग काम करते हैं फिर सरकारी नौकरियों में काम करते हैं फिर राज्य सरकारी नौकरियों में काम करते हैं ऐसे कुल लोग अगर मिला दिए जाएं ऊपर से नीचे तक प्रधानमंत्री से लेकर और चतुर्थ क्लास कर्मचारी तक तो भारत के 35 राज्यों में कुल जमा दो करोड़ लोग हैं ऐसे बस दो करोड़ लोग हैं जिनको परमानेंट नौकरी है परमानेंट जिनकी कहीं नौकरी जाने वाली नहीं है भले उनकी तनखा के लिए कर्ज लेकर सरकार को काम करना पड़े लेकिन उनकी तनखा बदत रहने वाली है और यही दो करोड़ लोग हैं इस देश में जिनको टीए मिलता है जिनको डीए मिलता है जिनको एचआरए मिलता है और उनका टीए डीए एचआरए समय के हिसाब से बढ़ता रहता है अगर हमारे देश में इंफ्लेशन बढ़ गया मुद्रा स्मिति जिसको आप कहते हैं तो उनका टीए बढ़ जाएगा अगर इंफ्लेशन बढ़ गया तो डीए बढ़ जाएगा अगर इंफ्लेशन बढ़ गया तो एचआरए बढ़ जाएगा उनके दूसरे एलाउंसेस उनको मिल जाएंगे मतलब कहने का सीधा सा यह है कि 115 करोड़ के हिंदुस्तान में दो करोड़ लोगों की जिंदगी बड़े मजे की ऐश की आराम की और आनंद की दो करोड़ लोग बाकी सब भिखमंगा मिल कर रखा है टाटा बिरला डालमिया धीरू भाई अंबानी नसली वाडिया गोयनका मुकेश अंबानी अनिल अंबानी इनको भी शामिल कर रखा है अब कैसा हिंदुस्तान बना है 62 साल की आजादी में एक दिन में रिलाय कंपनी के बैलेंस शीट पढ़ रहा था उनके कुछ डाटा निकाल रहा था आंकड़े निकाल रहा था तो पता चला कि मुकेश अंबानी और अनिल अंबानी दोनों की एक मिनट की आमनी 00 रुप एक मिनट की आमनी मिला के नहीं अलग अलग मुकेश अंबानी की एक मिनट की आमदनी 200 हज है एक मिनट की तो पूरे दिन की आमदनी 12 से 13 लाख के आसपास निकलती अब मुकेश अंबानी और अनिल अंबानी है जिनकी एक मिनट की आमदनी 200 हज है और 84 करोड़ लोग इस देश में हैं जिनकी एक दिन की आमनी रप से कम ऐसा देश हमने बनाया अगर इसको किसी मुहावरे में कहना पड़े तो कुछ ऐसा ही देश है यह कि संपत्ति और समृद्धि के कुछ थोड़े बहुत टापू बन गए हैं बाकी गरीबी का महासागर और दलदल इस देश में लहरा रहा है आप में से भी जो लोग यहां बैठे हैं काफी 80 से 90 प्रत आप में से वही लोग हैं वह जो दो करोड़ वाली श्रेणी में आते हैं हां आप लोग 84 करोड़ वालों में से नहीं है उनको तो सुबह को खाकर शाम की जी और शाम को खाकर अगले सुबह की इसी च चता में जिंदगी बीती है तो हमने किया क्या है इस देश में आजादी के बाद यह बड़ा प्रश्न खड़ा हुआ है और हमारे देश की संसद अब इस मुद्दे पर बहस करने को तैयार नहीं है प्रोफेसर अर्जुन सेन गुप्ता को मैं दो बार मिला यह रिपोर्ट आने के बाद और मैंने उनसे कहा कि आपकी रिपोर्ट आ गई हां आ गई आपने संसद को दे दिया हां दे दिया प्राइम मिनिस्टर को दे दिया हां दे दिया आगे क्या तो उन्होने कहा आगे क्या वोह कूड़े की टोकरी में चली गई आगे क्या जैसे सब रिपोर्ट आती है और चली जाती है तो मैंने कहा अगर कूड़े की टोकरी में ही डालना था तो आपने 5 साल इतनी मेहनत क्यों की तो उन्होंने कहा मैंने मेहनत सिर्फ इसलिए की कि देश के लोगों की आंखें खोल सकूं कि हुआ क्या 62 साल में हम तो 62 साल में यह मान के बैठे हैं कि देश ने बड़ी तरक्की कर ली है बड़ा विकास कर लिया है इस देश ने और हमारे तरक्की और विकास को हम नापते कहां से हैं बड़े-बड़े फ्लाई ओवर बन गए हैं छह लेन की सड़क बन गई है प्रधानमंत्री सड़क योजना चतुर्भुज वह जो है गोल्डन क्वाड्रीलेटरल और फिर गोल्डन ट्रायंगल यह सब बन गए हैं बड़े-बड़े फाइव स्टार होटल बन गए हैं बड़े-बड़े मॉल्स बन गए हैं शॉपिंग कॉम्प्लेक्टेड चलने लगी है कहीं मोनो रेल चलने लगी है हवाई जहाज आसानी से उड़ने लगे हैं हवाई जहाज में यात्रा करने वाले लोग बढ़ने लगे हैं रेल में एसी क्लास में सफर करने वालों की संख्या बढ़ गई है तो हम तो यह सब देख के कहते हैं देश ने बड़ा विकास कर लिया लेकिन अगर जनसंख्या की बढ़ोत्तरी के हिसाब से इसको निकाल कर देखना शुरू करें तो यह बिल्कुल शून्य के नजदीक नजर आता है नेगलिजिबल नजर आता है जनसंख्या वृद्धि के हिसाब से देखें तो दूसरा हिस्सा ही है जो बहुत बड़ा नजर आता है गरीबी भूखमरी बेकारी तो प्रोफेसर अर्जुन सेन गुप्ता कमीशन की रिपोर्ट पढ़ने के बाद मेरे की मेरी तो बहुत बेचैनी बढ़ गई कि यह हुआ क्या हमारे यहां हम तो यह मानते थे कि 62 साल सरकार ने बहुत काम कर दिया लेकिन रिपोर्ट ने तो सरकार की सारी पोल खोल दी और वो रिपोर्ट कोई ऐसे आदमी की होती जो साधारण है कोई राजनेता अगर उस रिपोर्ट को बनाता तो मैं कतई आपके सामने यह बात कहने के लिए नहीं आता क्योंकि राजनेताओं की बातों पर भरोसा कर पाना अब हमारे लिए संभव नहीं रहा हां किसी पार्टी के अध्यक्ष ने यह कहा होता उपाध्यक्ष ने कहा होता संसद में बैठे हुए एमपीज या पहले इस विधायिका में बैठे हुए उन्होंने कहा होता हम कभी बात ही नहीं करते क्योंकि उनकी बातों पर तो बात करना ही मूर्खता है लेकिन एक बड़े विद्वान व्यक्ति के द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट जिसने सारी दुनिया में अपना लोहा मनवाया है और वह ईमानदार और निस्वार्थ भाव से इस बात में लगा हुआ है कि आजादी के 62 साल इस देश में हुआ क्या यह जानना चाहिए वह बताने के लिए यह रिपोर्ट उन्होंने तैयार किया गरीबी मिटी नहीं बहुत बढ़ गई बेरोजगारी खत्म नहीं हुई बहुत बढ़ गई लोगों की भुखमरी भी कम नहीं हुई बहुत बढ़ गई आपको शायद मालूम है या नहीं 20 करोड़ लोग इस देश में भूखे पेट सोते हैं रोज रात को हमारी सरकार के आंकड़े हैं और उस रिपोर्ट में भी यह जानकारी 20 करोड़ लोग भूखे सोते हैं आधे से ज्यादा बच्चे जो जन्म लेते हैं इस देश में वह अपनी उम्र के तीसरे महीने में मर जाते हैं क्योंकि उनकी मां उनको दूध पिलाने की स्थिति में नहीं होती क्योंकि मा के शरीर में दूध नहीं बनता क्योंकि मां को संपूर्ण भोजन नहीं मिलता खुराक नहीं मिलती आधे से ज्यादा बच्चे तीसरे महीने उम्र तक पहुंचते मर जाते हैं आजादी के 62 साल हो गए हमारे देश की 50 प्र आबादी अभी भी अनपढ़ है निरक्षर है जिसको पढ़ाई लिखाई के बारे में कुछ पता नहीं क्योंकि स्कूल नहीं कॉलेज नहीं हमारे देश में अगर आंकड़ों में आप देखेंगे तो स्कूलों की संख्या लगभग 13 लाख है लेकिन जब मैंने ज्यादा बारीकी से देखना शुरू किया तो इन 13 लाख स्कूलों में 90 प्र स्कूल ऐसे हैं जहां विद्यार्थियों के लिए टॉयलेट और बाथरूम की व्यवस्था नहीं है मूत्रालय नहीं है संडास घर नहीं जिन स्कूलों में मूत्रालय ना हो संडास घर ना हो वहां बिल्डिंग कैसी होगी आप अंदाजा लगा सकते हमारे देश में जितने विद्यार्थी कक्षा एक में पढ़ने के लिए भर्ती होते हैं कक्षा आठ तक आते आते आधे विद्यार्थी उसमें से निकल जाते हैं जिनको अंग्रेजी में कहते हैं ड्रॉप आउटस आधे से ज्यादा और जो उच्च शिक्षा के द्वारा तैयार होकर निकल आते हैं 35 से 40 लाख विद्यार्थी हर साल इस देश में ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट होते हैं वह बेरोजगारों की भीड़ में शामिल हो जाते हैं क्योंकि उनके पास रोजगार की कोई व्यवस्था नहीं इससे भी ज्यादा दारुण की स्थिति दुख की स्थिति इस देश में यह है कि जनसंख्या की सबसे ज्यादा बढ़ोत्तरी ग्रामीण इलाके में है गांव में जनसंख्या ज्यादा बढ़ रही है और वहीं पर काम करने के अवसर सबसे ज्यादा खत्म हो रहे हैं दिन बदन हर साल हमारे देश में एक करोड़ 80 लाख नए लोग बढ़ जाते हैं माने बच्चे पैदा हो हो जाते हैं साल में 1 करोड़ 80 लाख का मतलब है एक ऑस्ट्रेलिया हर साल इस देश में जुड़ जाता है ऑस्ट्रेलिया की पूरी आबादी 1 करोड़ 80 लाख की है तो एक ऑस्ट्रेलिया नाम का देश हर साल इस देश में जुड़ जाता है 1 करोड़ 80 लाख नए बच्चे पैदा हो जाते हैं और हर साल हमें 1 करोड़ 80 लाख नए रोजगार की जरूरत है लेकिन हर साल इस देश में 25 से 30 लाख रोजगार जो पहले से मिले हुए हैं वह खत्म होते जाते हैं नए रोजगार तो सवाल ही नहीं अब समस्या क्या है गांव में जनसंख्या ज्यादा बढ़ती है खेती योग्य जमीन गांव में है नहीं 14 करोड़ हेक्टेयर कुल जमीन है जहां पर खेती होती है इस देश में 70 करोड़ एकड़ के बराबर अब 70 करोड़ एकड़ जमीन पर हर साल एक करोड़ 80 लाख लोगों का बोझा बढ़ता जाए तो यह जमीन कितने दिन बर्दाश्त कर कर हमारे देश में हर किसान के हिस्से में एवरेज एक एकड़ जमीन आती है करीब 70 करोड़ किसान है और 70 करोड़ एकड़ जमीन है तो एक किसान के पास एक एकड़ है हर साल एक करोड़ नए किसान तैयार हो जाते हैं इस देश में उनके लिए जमीन कहां से आए खेती करने के लिए तो परिणाम क्या होता है गांव में बोझा बढ़ता है जमीन पर तो लोग गांव से शहर भागते हैं रोजी रोटी की तलाश में शहर में झुग्गी झोपड़ियां बढ़ती चली जाती गांव से जो लोग विस्थापित होकर शहर में आते हैं वह झुग्गी झोपड़ियों की संख्या बढ़ाते हैं और हमारे हर बड़े शहर में आप जाकर देख सकते हैं एक विशाल झुग्गी झोपड़ी रहती है कभी बंबई जाने का मौका मिले तो चले जाइए एशिया खंड की सबसे बड़ी झुग्गी झोपड़ी बंबई में ही है धारावी और बंबई शहर की 65 प्र आबादी झुग्गी झोपड़ी में रहती दिल्ली चले जाइए मद्रास चले जाइए बेंगलोर चले जाइए हर शहर में आपको दिखाई देगा 60 प्र 65 प्रत आबादी या तो फुटपाथ पर है या झुग्गी झोपड़ी में ऐसे स्थान पर हमारे देश की 65 प्र आबादी रहती है जिस स्थान पर आप एक मिनट खड़े नहीं हो सकते इतनी गंदगी होती है झुग्गी झोपड़ियों की जिंदगी एक मिनट आप बिना रुमाल नाक पर रखे खड़े नहीं हो स सते इतनी तेज बदबू होती है इतना कीचड़ होता है कुत्ते भी वही होते हैं कीचड़ भी वही होता है आदमी भी वही होते हैं और वह लोग साल दल साल अपनी जिंदगी बिताते रहते हैं सड़क के किनारे बड़े बड़े पाइप पड़े रहते हैं सरकार की कुछ योजनाओं में काम आने के लिए उन पाइप में रहकर 20-2 साल गुजारे हुए परिवारों को मैंने देखा है पाइप में रहकर वो गोल पाइप कंक्रीट के सड़क किनारे पड़े रहे बारिश आती है तो आप जैसे लोग बहुत खुशी मनाते हैं कि भगवान की कृपा हो रही है जो फुटपाथ पर रहते हैं वह रात दिन भगवान को गाली देते हैं कि वह सोए कहां 65 प्रतिशत आबादी ऐसी है जो बारिश आने पर खुश नहीं होती वह भगवान को गाली देते हैं क्योंकि सोने वाली जमीन उनकी गीली हो जाती है हुआ क्या फिर इस देश में क्या हुआ 62 साल हमने इतने विकास की योजनाएं बनाई क्या हो गया इस देश को बुनियादी जरूरतों के बारे में भारत सरकार की एक रिपोर्ट तैयार हुई थी आज से चार पाच साल पहले कि कितने लोगों को बुनियादी जरूरतें पूरी करने का मौका मिलता है 7 करोड़ परिवार हैं सिर्फ जिनकी बुनियादी जरूरतें पूरी होती हैं बुनियादी जरूरतें माने उनके पास बिजली है उनके पास शिक्षा है उनके पास बीमार होने के बाद डॉक्टर की व्यवस्था है इलाज की व्यवस्था है सिर्फ 7 करोड़ परिवार बाकी 14 से 15 करोड़ परिवारों के पास तो वह भी नहीं है बुनियादी जरूरतें पूरी करने का कोई रास्ता नहीं ना उनके पास शिक्षा है ना स्वास्थ्य है ना चिकित्त्सा है ना डॉक्टर है ना दवाएं 638 365 गांव हैं इस देश में मुश्किल से ढाई ती लाख गांव हैं जहां बिजली है मुश्किल से ढाई ती लाख मुश्किल से डेढ़ दो लाख गांव है जहां चलने को सड़क है बाकी सड़क ही नहीं है कुछ नहीं तो बार-बार मन में प्रश्न आता है कि क्या हुआ इस देश को हमने इतनी योजनाएं बनाई गरीबी मिटाओ गरीबी हटाओ इस देश की हर सरकार के लिए प्राथमिक सूत्र है आपको मालूम है 62 साल आजादी के बाद जितनी भी सरकारें आई सबका प्रमुख उद्देश्य है गरीबी हटाओ लेकिन गरीबी बढ़ती जा रही है हर सरकार कहती है गरीबी हटाओ किसी भी प्रधानमंत्री को आप पूछेंगे आपकी योजना की प्राथमिकता क्या है तो वो कहेंगे गरीबी हटाओ कब से सुन रहे हैं हम यह गरीबी हटाओ आप में से तो कई लोग बुजुर्ग हैं आपने तो पंडित नेहरू को देखा होगा पंडित नेहरू के जमाने से लोग सुन रहे हैं गरीबी हटाओ गरीबी हटाओ गरीबी हटाओ अब तक हटती नहीं बेरोजगारी मिटाओ बेरोजगारी मिटती नहीं भुखमरी हटाओ भुखमरी मिटती नहीं बच्चों को पढ़ाओ बच्चे पढ़ नहीं पाते क्या हो क्या रहा है यह गंभीर प्रश्न है और उस प्रश्न का उत्तर ढूंढने की कोशिश जब हम लोगों ने की तो पता चला कि आजादी के 62 साल इस देश में कुछ खास नहीं हुआ कुछ नहीं हुआ मैं आपको एक पुरानी घटना सुनाता हूं यहां कुछ बुजुर्गों को देख रहा हूं इसलिए दिल में आया यह बात कहूं एक इस देश में बड़े नेता हुआ करते थे उनका नाम था आचार्य राम मनोहर लोहिया बड़े तेजस्वी आदमी थे जब संसद में भाषण देते थे तो पिन ड्रॉप साइलेंस होता था और हमारे देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित नेहरू जी ने लिखा है अपनी पुस्तकों में कि जिस दिन लोहिया जी का भाषण होता था नेहरू जी सब काम छोड़कर उसे सुनने के लिए जाते थे खुद प्रधानमंत्री लोहिया जी का भाषण सुनने के लिए जाते थे एक बार क्या हुआ नेहरू जी का लोहिया जी का संसद में टक्कर हो गई नेहरू जी पंचवार्षिक योजनाओं की विशेषताओं पर भाषण दे रहे थे और संसद को बता रहे थे थे कि मेरी पंचवार्षिक योजना माने फाइव ईयर प्लेन से इतनी गरीबी दूर होगी इतनी बेकारी दूर होगी इतनी भुखमरी दूर होगी तो लोहिया जी ने एक सवाल पूछ लिया था संसद की दस्तावेजों में दर्ज है रिकॉर्ड्स में दर्ज है सवाल यह पूछ लिया था प्रधानमंत्री महोदय से कि इस देश के सबसे गरीब आदमी की आमदनी बता दो कितनी है प्रधानमंत्री से पूछा था सबसे गरीब आदमी की एक दिन की आमदनी बता दो तो प्रधानमंत्री परेशान हो गए थे उन्होंने कहा तत्काल तो नहीं बता सकता तो उन्होने कहा दो महीने में बता दो तीन महीने में बता दो बता दो तो दो ढाई महीने के बाद संसद में प्रधानमंत्री का जवाब आया कि देश के सबसे गरीब आदमी की एक दिन की आमनी ढाई आना है आना तो आप समझते हैं 16 आने का एक रुपया और ढाई आना है और यह बात चल रही है 60 की 60 के दशक में यह चर्चा चल रही थी हमारी संसद तो उस समय ढाई आना आमनी थी एक गरीब आदमी की जो सबसे अंतिम माना जाता था एक दिन की मैंने हिसाब जोड़ा अर्जुन सेन गुप्ता कमीशन की रिपोर्ट आने के बाद कि 2009 में सबसे गरीब आदमी की एक दिन की आमनी रप और 1965 के आसपास सबसे गरीब आदमी की एक दिन की आमनी ढाई आना है तो ढाई आना 1965 का 2009 के 20 के के ही बराबर है आप बोलेंगे वो कैसे वो ऐसे कि हमारे रुपए का पिछले 4045 सालों में बहुत अवमूल्यन हुआ है डिवेलु एशन हुआ है तो 1965 66 के दौर का ढाई आना 2009 का 20 बैठता है इसका मतलब यह है कि हमारा देश 1965 में जाकर ठहर गया है एक कदम आगे नहीं बढ़ पाया यह है वास्तविक स्थिति अब थोड़ा पीछे चले सरकार के पास जब यह प्रश्न जाता है तो वह यह उत्तर दूसरे तरह से देते हैं वह कहते हैं जी तब से लेकर तो हमने इतनी पंचवार्षिक योजनाएं लगाई है चलाई है एक पंचवार्षिक योजना बनती है तो उसका खर्चा 10 लाख करोड़ का होता है एक पंचवार्षिक योजना एक फाइव ईयर प्लान और 11 फाइव ईयर प्लान बन चुके 10 लाख करोड़ का एक होता है तो सीधा-सीधा हिसाब निकलता है 110 लाख करोड़ रुपए तो सरकार ने खर्च कर ही दिए अब 110 लाख करोड़ रुपए जिस देश की पंचवार्षिक योजना में खर्च हो चुके हैं वहां 84 करोड़ लोग गरीब कैसे हैं यह समझ में नहीं आता एक दिन मैंने सोचा कि यह 110 लाख करोड़ रुपए को एक एक आदमी को ऐसे ही बांट देते तो हर आदमी इस देश में लखपति हो जाता है क्योंकि 115 करोड़ की तो जनसंख्या है और 110 लाख करोड़ रुपया खर्च हो चुका है करोड़ से करोड़ को काट दो 110 लाख बचता है और 110 लाख में 110 का भाग दे दो हर आदमी पर एक लाख तो निकल ही आता है ना तो हर आदमी लखपति हो जाता अगर यह योजनाएं ना होती सीधे रुपया उनको दे दिया जाता माने गरीबी से तो बाहर आ ही जाता हर आदमी लेकिन योजनाएं सरकार ने बनाई तो गरीब तो वहीं के वहीं रहे और ज्यादा बढ़ गए योजना चलाने वालों की गरीबी जरूर दूर हो गई जिन्होंने योजनाए बनाई और जिन्होंने योजनाएं चलाई सब करोड़पति 10 करोड़पति अरबपति खरबपति हो सब के सब और जिनके लिए योजनाएं बनाई वह सब वहीं के वहीं रोडपति हैं अभी भी मतलब सीधा सा यह है कि जो व्यवस्था के हिस्से हैं अंग हैं व्यवस्था बनाई गई योजनाओं को चलाने के लिए वह व्यवस्था तो करोड़पति अरबपति खरबपति हो गई लेकिन जिनके लिए वो चलाई गई थी वो वहीं के वहीं खड़े हैं इसका मतलब इस व्यवस्था में खोट है इस व्यवस्था में दोष है और यह बात मैं नहीं कहता इस देश के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने कही सारे देश की आंखें खुल गई उन्होंने 1984 में संसद में कहा कि जब मैं गरीब आदमी के विकास के लिए एक रुपया भेजता हूं तो उसके पास 15 पैसा ही पहुंचता 85 पैसा व्यवस्था खा जाती है भ्रष्टाचार और लूट खोरी में चला जाता है यह 1984 में उन्होंने कहा था जब भ्रष्टाचार बहुत कम था अब 2009 आ चुका है भ्रष्टाचार और बढ़ गया है हो सकता है अब एक रुपया दिल्ली से आता हो तो नीचे पांच पैसा भी नहीं पहुंचता हो मतलब सीधा सा है कि हमने जो व्यवस्था बनाई है गरीबी भुखमरी बेकारी मिटाने के लिए देश के दुख दर्द मिटाने के लिए वह व्यवस्था ही इन सब का कारण है गरीबी का भुखमरी का बेकारी का हमारे दुख दर्दों का माने व्यवस्था में दोष है व्यवस्था में खोट है और वह दोष क्या है राजीव गांधी ने कहा कि इस पूरी व्यवस्था में भयंकर लीकेज है उन्होंने एक शब्द इस्तेमाल किया लीकेज कहानी कुछ ऐसी है कि एक घड़ा है आपके पास उसमें आप पानी भरना चाहते हैं और जगह-जगह से छेद हैं उसमें तो 10 साल 20 साल 50 साल 100 साल घड़े को भरते ही रहिए कभी नहीं बढ़ेगा क्योंकि छेद है उसमें ऐसी हमारी व्यवस्था है कितना भी हम विकास के लिए पैसे को खर्च करते जाएं करते जाएं करते जाएं विकास होगा नहीं क्योंकि व्यवस्था में जगह-जगह लीकेज है इसका मतलब इस व्यवस्था को बदलना चाहिए सत्ता बदलने से कोई ला नहीं होगा हम कहां फंसे हैं हम यहां फंसे हैं एक पार्टी की सरकार आई दूसरे को बिठा के देखो दूसरे की आई तीसरे को बिठा के देखो तीसरे की आई चौथे को बिठा के देखो काम तो सब एक ही तरह से करते हैं तरीके सबके एक ही जैसे हैं नाम का फर्क है नीतियां सबकी एक ही जैसी है मुझे नहीं लगता कि कोई हिंदुस्तानी यह बात दम ठोक के कह सकता हूं कि इस सरकार में भ्रष्टाचार कम था उसमें ज्यादा था मुझे तो जितने लोग मिलते हैं वो कहते हैं पुरानी सरकार अच्छी थी उसमें कुछ कम था अब तो और ज्यादा और इसके आगे कोई आएगी तो कहेंगे अब और ज्यादा है सीधा सा मतलब है कि जो व्यवस्था चलाने वाली सरकारें हैं दोष और खोट वहां पर है जब तक उस दोष और खोट को आप मिटाते नहीं तब तक इस देश में ग गरीबी बेकारी भुखमरी दूर होती नहीं सत्ता बदलने से कुछ नहीं होता एक को हटाओ दूसरे को बिठा दूसरे को हटाओ मेरा कुछ ऐसा मानना है कि अगर कोई गाड़ी खराब है तो कितने दिन ड्राइवर बदल के चलाओगे आप उसे गाड़ी ही खराब है आपने कहा भाई इसको ड्राइवर बना लो उसने चलाकर देखा उसने कहा एक पा साल चलाकर छोड़ दिया वो कहता खटा रहा है बेकार है अब दूसरे को बना लो तीसरे को बना लो ड्राइवर बदलने से कुछ नहीं होगा गाड़ी को ही बदलना पड़ेगा यह जो व्यवस्था है ना यह गाड़ी के जैसी है 62 साल से हम चला रहे हैं खटारा गाड़ी और यह दुर्भाग्य से खटारा गाड़ी 62 साल से नहीं 250 साल से चल रही है जब अंग्रेज थे तब वह भी यही गाड़ी चलाते अंग्रेजों के जमाने से यह गाड़ी चल रही है आज तक चल पाई है क्योंकि वह है ही खटारा और अंग्रेजों ने यह गाड़ी बनाई थी अपने हिसाब से अपने चलाने के लिए हमने उसी को चलाने की कोशिश की हम उसे चला नहीं पाए क्यों क्योंकि हमको अंग्रेजों जैसा भी शऊर नहीं है हमारी समस्या एक ही है कि हम जिस व्यवस्था में जी रहे हैं वही पूरी खराब है कंडम है दुर्भाग्यपूर्ण है दोषपूर्ण है भ्रष्ट है करप्ट है जो शब्द आप इस्तेमाल करना चाहे उसको जब तक आप ठीक नहीं करते तब तक सत्ता हों के बदलने से सिंहासन बदलने से कुछ नहीं होता हमको यह बात समझ में आई है बहुत अध्ययन बहुत अभ्यास करके तो इसलिए भारत स्वाभिमान का जो गठन हमने किया उसका पूरा का पूरा एक ही उद्देश्य है कि इस देश की व्यवस्था में आमूल चूल परिवर्तन करना जड़ से पूरी व्यवस्था को बदलना यह हमारा प्रमुख उद्देश्य है क्या बदल करना कैसे बदल कर और कितना बदल करना अब सबसे बड़ा बदल जो हम करना चाहते हैं वह इस लीकेज का बदल करना चाहते हैं हम हमारी सरकार को टैक्स के रूप में हर साल लाखों करोड़ रुपए देते हैं अगर ठीक-ठीक बात करूं तो 6 लाख 14000 करोड़ रुपए हम सरकार को टैक्स के रूप में देते हैं दिल्ली सरकार को राज्य सरकारों की बात करें मध्य प्रदेश उत्तर प्रदेश आंध्र प्रदेश वगैरह वगैरह 35 राज्यों को और राज्य सरकारों को दिया गया या कुल पैसा जोड़ दें और केंद्र सरकार का भी उसमें जोड़ दें तो कुल साल में 20 लाख करोड़ रुपए हम सरकार को देते हैं राज्यों को केंद्र को जिला सरकार को स्थानीय सरकार अब जिन सरकारों को साल में 20 लाख करोड़ रुपए लोगों के खून पसीने की कमाई के टैक्स का मिलता हो और वह सरकारें दांत निकाल के खी खी करें और हंसे कि भाई गरीबी हमसे दूर नहीं होती बेकारी दूर नहीं होती भुखमरी दूर नहीं होती तो इसका माने दोष कहीं वहां पर है बड़ा हम तो दे ही रहे हैं अपनी ईमानदारी से इस हिंदुस्तान में आज तक के इतिहास में एक समय भी ऐसा नहीं गया जब सरकार ने लोगों का टैक्स माफ किया हो कोई एक साल ऐसा नहीं गया बड़ी-बड़ी विपत्तियां आई है इस देश पर सरकार ने टैक्स कभी माफ नहीं किया माने हम बराबर ईमानदारी से टैक्स दे रहे हैं पहले अंग्रेजों को देते थे अब काले अंग्रेजों को दे रहे हैं दे रहे हैं बराबर पूरी ईमानदारी से इनकम टैक्स दे रहे हैं सेंट्रल एक्साइज दे रहे हैं वैल्यू एडेड टैक्स दे रहे हैं लोकल टैक्सेस दे रहे हैं रोड टैक्स दे रहे हैं रोड पर और टोल टैक्स दे रहे पहले हम रोड टैक्स दे देते हैं फिर ऊपर से टोल टैक्स देते हैं हर 20 25 किलोमीटर चलने का टोल टैक्स अलग से देते हैं मन में कभी सवाल नहीं उठता आपको कि जब हमने रोड टैक्स दे दिया तो यह टोल टैक्स क्यों देना या तो हम रोड टैक्स नहीं भरे तब समझ में आता है रोड टैक्स भी दे रहे हैं फिर टोल टैक्स क्यों हमारे ही रोड टैक्स के पैसे से रोड बन रही है फिर उसी पर चलने के लिए और टोल टैक्स क्यों और हर 20 25 50 किलोमीटर पर क्यों एक दिन मैंने हिसाब निकाला था दिल्ली से कोलकात्ता अगर गाड़ी से आप चले जाएं तो डीजल के खर्चे से ज्यादा टोल टैक्स का खर्चा है दिल्ली से कोलकात्ता सड़क रास्ते से आप चले जाए तो हम हिंदुस्तान की सरकार को इनकम टैक्स के रूप में कॉर्पोरेट टैक्स के रूप में एक्साइज ड्यूटी के रूप में वैल्यू एडेड टैक्स के रूप में सेल्स टैक्स के रूप में सेंट्रल सेल्स टैक्स के रूप में रोड टैक्स के रूप में टोल टैक्स के रूप में प्रॉपर्टी टैक्स के रूप में हाउस टैक्स के रूप में 64 तरह के टैक्स के रूप में हर साल हम 20 लाख करोड़ दे देते हैं 61000 करोड़ केंद्र सरकारों को और बचा हुआ सब राज्य सरकारों को 35 राज्यों में फिर हमारी गरीबी भुखमरी बेकारी क्यों होनी चाहिए इतना टैक्स हम दे देते हैं 20 लाख करोड़ पता है कितना धन होता है आप गिन नहीं सकते साल भर तक अगर हजार के नोट आपको दे दिए जाए सब मिला के 20 लाख करोड़ की रकम इतनी बड़ी है कि कैलकुलेटर पर लिख नहीं सकते आप फेल हो जाता कैलकुलेटर क्योंकि कैलकुलेटर में 12 अंक आते हैं और इसको लिखने में 16 अंक लगते हैं 20 लिखना उसके आगे जी 14 बार जीरो लगाना पड़ता है इतनी बड़ी रकम है अगर इस रकम का सोना खरीद ले हम तो यह इतनी बड़ी रकम है कि मध्य प्रदेश के एक एक राज्य की सड़क को सोने से बना सकते हैं इतनी बड़ी रकम है अब इतनी रकम हमने दे दी केंद्र सरकार को राज्य सरकार को स्थानीय सरकारों को फिर भी वह गरीबी भुखमरी बेकारी दूर नहीं कर कर पाते तो कहां जा रही है यह रकम हो क्या रहा है इसका तब ध्यान में आता है कि अरे राजीव गांधी ने कहा था कि इस रकम का 85 प्र तो घूसखोरी लूट खोरी में ही चला जाता है और वह 84 में कहा था हो सकता है 2009 में इस रकम का 90 प्र घूसखोरी लूट खोरी और भ्रष्टाचार में चला जाता हो 10 प्र ही काम में आता हो तो हमारे समझ में बात आ गई व यह आ गई कि इस पूरी की पूरी रकम का इस देश के नेता और अधिकारियों में बंदर बांट होता है घूसखोरी रिश्वत कोरी के नाम और यह बंदर बांट करने वाले नेता और अधिकारी करोड़पति 10 करोड़पति अरबपति 10 अरबपति खरबपति 10 खरबपति होते ही जा रहे कुछ नेताओं के बारे में मैं केस स्टडी कर रहा और पता यह चल रहा है कि आज से 152 साल पहले उनके घर में टूटी साइकिल नहीं थी और आज उनमें से एक एक के पास 20 हजार करोड़ 25 हजार करोड़ की संपत्ति है एक एक के पास कुछ नेताओं पर जब मैंने केस स्टडी की तो पता चला कि 12 1 साल पहले वह बंबई के दादर रेलवे स्टेशन पर पालक बेचते थे मैथी बेचते थे बथुआ बेचते थे मराठी में इसको भाजीपाला कहते हैं पत्ते वाली सब्जी और आज उन तीनों नेताओं की बंबई में पांच से 7000 करोड़ की प्रॉपर्टी एक नेता पर मैंने केस स्टडी किया तो पता चला 151 साल पहले उसकी जेब में इतना भी पैसा नहीं होता था कि वह चाय खरीद के पी सके आज उस नेता के पास बंबई से पुना तक की सारी जमीन उसने खरीद के रखी हुई मु से पुना के बीच की सारी जमीन हजारों हेक्टेयर की जमीन एक नेता के कब्जे में ऐसे ऐसे इस देश में हजारों हैं एक दो नहीं और जब नेता लूटेंगे तो अधिकारी पीछे कैसे हटेंगे अधिकारियों ने भी लूटा है इस देश को मेरा जन्म स्थान उत्तर प्रदेश है उत्तर प्रदेश की सरकार में अधिकारी हुआ उसका नाम है अखंड प्रताप सिंह चीफ सेक्रेटरी था उत्तर प्रदेश की सरकार का इससे ऊंचा कोई पद नहीं होता आईएएस अधिकारियों के लिए चीफ सेक्रेटरी के ऊपर कोई पोस्ट नहीं है वहां आते आते सब रिटायर हो जाते हैं वह चीफ सेक्रेटरी के पद से रिटायर हुआ उसके घर में सीबीआई ने छापा मारा तो 400 करोड़ रुपए कैश मिले थे 400 करोड़ एक अधिकारी के के घर में और सीबीआई वालों का कहना है कि यह तो उसके कुछ घरों में छापा पड़ा है अभी कई घर तो पता ही नहीं है फिर उत्तर प्रदेश के जो आईएएस अधिकारी हैं ना उनकी एक एसोसिएशन है उस एसोसिएशन ने उस अधिकारी को महा भ्रष्ट आईएस अधिकारी का नाम देके उसको घोषित किया लेकिन तब किया जब सीबीआई का छापा पड़ा उसके पहले नहीं अपने नाम को बचाने के लिए तब तक वह उसी के साथ चाय पीते थे उसी से गपशप मारते थे आप अंदाजा लगा सकते हैं एक चीफ सेक्रेटरी अपनी जिंदगी में 40 साल चीफ सेक्रेटरी रहे 40 साल हालांकि रह नहीं सकता लेकिन 40 साल चीफ सेक्रेटरी रहे और उसकी मैक्सिमम तनखा उसको मिलती रहे और एक रुपया भी वह उसमें से खर्च ना करे तो उसको कुल 0 लाख रुपए होना चाहिए 400 करोड़ कहां से आया ऐसे इस देश में हजारों अधिकारी एक दो नहीं हजारों हजारों तो नेता है उनके साथ अधिकारी हैं लूट में आकंठ डूबे हुए दोनों हाथों से ऐसे लूट रहे हैं कल्पना नहीं हो सकती आपको मुझे बड़ा अफसोस है यह कहते हुए कि थोड़े साल पहले हम यह सोच के परेशान होते थे डाकू माधव सिंह डाकू मोहर सिंह डाकू जालिम सिंह यह आते थे और घरों को लूट के ले जाते थे तो हम हाय तौबा करते थे यह डाकू मोहर सिंह माधव सिंह जालिम सिंह तो मरे नहीं वह तो सब जिंदा है नाम बदल गए उनके कोई नहीं मरा मुझे तो कई बार लगता है कि माधव सिंह मोहर सिंह जालिम सिंह की आत्मा ही हमारे नेताओं में प्रवेश कर और सड़क चलते नहीं है पार्ल में बैठे हैं विधायिका में बैठे हैं आपको मालूम है हमारी संसद में 300 से ज्यादा सांसद हैं जिनकी कम से कम इनकम 10 करोड़ से ऊपर है 300 से ज्यादा सांसद इस देश की संसद में वर्तमान ऐसी स्थिति इस देश में है तो बात अब समझ में आ रही है व यह कि 62 साल की आजादी में हमने एक ही काम किया गोरे अंग्रेजों को भगाया काले अंग्रेजों को बिठाया गोरे अंग्रेजों ने लूटकर पैसा लंदन में जमा किया इन काले अंग्रेजों ने लूट लूट कर पैसा स्विस बैंकों में जमा किया बस इतना ही अंतर है ब और कोई बड़ा अंतर नहीं हमारे नेताओं ने 62 साल खूब पैसा लूटा है विकास के धन का भ्रष्टाचार में डुबोया पूरा पैसा और यही कारण से उनकी संपत्ति दिन दुगनी रात चौगुनी बढ़ी है एक साधारण एमएलए हो हो जाता है साधारण एमपी हो जाता है देखो क्या संपत्ति आती है और एमएलए एमपी तो छोड़ दो कॉरपोरेटर हो जाता है तो देखो कितनी संपत्ति आती है यह सारी संपत्ति आती है आपके मेरे खून पसीने की कमाई के दिए गए टैक्स के पैसे को लूटकर वहां से आती है यह संप तो हमारे देश में ये जो प्रजातंत्र चल रहा है माफ करिएगा यह लूट तंत्र है तंत्र नहीं है और हर 5 साल के बाद नाटक होता है इस देश में मैं लूटू या तू लूटेगा तय कर ले [प्रशंसा] [संगीत] भाई एक पार्टी होती है सत्ता में जो लूट रही होती है पा साल से सामने वाली दूसरी तैयार बैठी है कि अब हमारा नंबर है तुमने लूट लिया पा साल अब हमको दे दो यह गद्दी और वह आपके सामने आते हैं उल्लू बनाने के लिए कि भाई वोट दे दो विकास करेंगे भाई 62 साल से तो किया नहीं तुम क्या करोगे फिर कहते जी वोट दे दो आपकी सेवा करेंगे तो सेवा करने के लिए वोट ही क्यों लगता बिना वोट के भी सेवा होती है तो वोट देकर वह सेवा का नाम जो लगाते हैं व उनको पद चाहिए प्रतिष्ठा चाहिए ताकि लूट में हिस्सा उनका बरकरार रहे मुझे कई बार अफसोस से कहना पड़ता है कि जब आप किसी नेता को एक वोट दे देते हैं तो आप खुद उसको लूट का लाइसेंस दे देते हैं कि जा पा साल के लिए तेरी मौज जो लूट सके तू लूट और 5 साल आपके पास कोई ताकत नहीं है उसको वापस बुलाने की तो जितना मन में आता है वह लूटता है और उसे मालूम है कि दोबारा चुन के आया नहीं आया तो एक बार में सब घर भर लो तो अभी तो इनकी संपत्ति की जांच अगर आप करा दें हिंदुस्तान के नेताओं और अधिकारियों की तो आंखें फ जाए मैं बिना नाम लिए कह रहा हूं एक व्यक्ति इस हिंदुस्तान की पॉलिटिक्स में स्विस बैंक में उसका खाता है 7 हजार करोड़ रुपए एक व्यक्ति एक व्यक्ति स्विस बैंक में उसका खाता है 72 हजार करोड़ रुपए कल्पना कर सकते हैं एक व्यक्ति तो 62 साल आजादी के जो कुछ इस देश में प्रजातंत्र के नाम पर हुआ है उसने लूटा है लोगों के पैसे को धन को संपत्ति को और लूट लूट कर विदेशी बैंकों में सुरक्षित रखा है क्योंकि हमारी बैंकों में वह रख नहीं सकते क्योंकि कभी भी इनकम टैक्स की या सीबीआई की रेड पड़ सकती है तो ले जाकर वह खाता खोलते हैं स्विटजरलैंड में स्विटजरलैंड दुनिया का अकेला एक देश है जहां पर कितने भी लूट का पैसा जमा करो वह पूछते नहीं कि कहां से लाए कितना भी जमा करो कभी नहीं पूछते क्यों क्योंकि उस पैसे पर उनको ब्याज तो देना नहीं तो पूछने का क्या ब्याज देना होता तो पूछते वह ब्याज देते नहीं कितना भी उनके यहां जमा करो वह ब्याज नहीं देते उल्टा जमा करने वाले से सर्विस चार्ज लेते हैं तो जो जमा करता है ना वह बैंक को ब्याज भरता है बैंक नहीं देता कुछ और बदले में बस इतना ही है कि वह गुप्त रखते हैं आपका नाम नहीं बताएंगे बस इतना ही तो नेता सब ले जा ले जा के लूट का पैसा वहां भरते हैं अब यह जो पैसा वहां रखा हुआ है इसके बारे में जब हमने काफी खोजबीन की आसानी से तो यह पता नहीं चलता क्योंकि सीक्रेसी के कानून है फिर भी पता चल गया कि नेताओं ने पिछले 62 साल में लूट लूटकर स्विस बैंकों में 72 लाख 800 हजार करोड़ जमा करके रखा हुआ और स्विटजरलैंड के अलावा कुछ और देश हैं दुनिया के वहां पर करीब 30 लाख करोड़ रखा हुआ है कुल मिलाकर 110 लाख करोड़ रुपया इस देश के खून पसीने की कमाई का विकास के लिए जो खर्च होना चाहिए था वह लूटकर विदेशी बैंकों में पहुंच गया इससे हमें पता चलता है कि देश किस दिशा में जा रहा है यह जो धन गया लुटने के बाद यह विदेशी बैंकों में जमा हो गया अब अफसोस की बात क्या है इस पूरे धन पर हमको तो कुछ फायदा नहीं है देश को जहां जमा है वह इस पैसे को घुमा रहे हैं स्विस बैंकों में जो पैसा जमा कर दिया अपने नेताओं ने या अधिकारियों ने स्विस बैंक वाले वह दुनिया भर को कर्जे में दे रहे हैं कर्जे का ब्याज ले रहे हैं ब्याज मजे से खा रहे हैं और जिन्होंने जमा किया उनसे सर्विस चार्ज ले रहे हैं कितने होशियार लोग एक बार इस देश में स्विटजरलैंड के प्रेसिडेंट आए थे दिल्ली में उनकी प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई तो उस प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा पूछा नहीं किसी ने उनसे उन्होंने खुद कहा उन्होंने कहा कि भारत जैसे देश को गरीबी का रोना नहीं रोना चाहिए और भारत जैसे देश को दुनिया में किसी के सामने भीख नहीं मांगनी चाहिए तो पत्रकारों ने पूछा क्यों तो उन्होंने कहा आपके लोगों का इतना पैसा हमारे यहां रखा है उसी को आप वापस मंगा लो तो आपको तो कर्ज लेने की जरूरत ही भीख मांगने की जरूरत नहीं है किसी के सामने हाथ फैलाने की जरूरत नहीं तो पहली बार पता चला जब स्विटजरलैंड के प्रेसिडेंट ने दिल्ली में आकर यह कहा तब पता चला फिर हमारे जैसे लोग लग गए इस खबर के पीछे तो धीरे-धीरे सब बात खुली और यह बात खुली तो इसमें कई तरीके से हमने वेरिफिकेशन किया वेरिफिकेशन कैसे किया जिन नेताओं ने वहां खाते जमा किए हैं जिन अधिकारियों ने पैसे जमा किए वो कौन है उनके नाम क्या है पता कैसे किया जाए क्योंकि स्विटजरलैंड नाम बताने को तैयार नहीं व यह कहता है कि भारत सरकार अगर हमसे संधी करें तो हम नाम बताएंगे ऐसे नहीं बताएंगे तो हमें पता करना है तो हमने फिर दूसरा रास्ता अपनाया रास्ता क्या अपनाया हमने यह जानकारी लेने की कोशिश की कि हिंदुस्तान से स्विटजरलैंड कौन-कौन जाता है यह पता लगा क्योंकि स्विटजरलैंड जाने के लिए एयरपोर्ट से ही जाना पता हवाई जहाज इस्तेमाल करना पड़ता पानी के जहाज से जा नहीं सकते क्योंकि रास्ता नहीं हवाई जहाज ही एक रास्ता है और एयरपोर्ट इस देश में कितने हैं वह पक्के हैं दिल्ली है मुंबई है बेंगलोर है जहां से स्विटजरलैंड की फ्लाइट छूटती है उन एयरपोर्ट से कौन-कौन जाता है उसकी सूची निकलवाई हम फिर उसमें से छांटना शुरू किया कि कितने ऐसे लोग हैं जो यात्रा करने के लिए आनंद लेने के लिए स्विटजरलैंड जाते हैं हनीमून मनाने जाते हैं कितने ऐसे लोग जो स्विटजरलैंड का सौंदर्य देखने के लिए जाते हैं तो जब सूची में छांटना शुरू किया तो बहुत थोड़े से हैं क्योंकि जो भी स्विटजरलैंड गया है देखने के लिए उनका यह कहना है कि एक बार देखने के बाद दोबारा देखने का मन नहीं करता क्योंकि कुछ है ही नहीं वह यह कहते हैं उससे सुंदर तो अपना पंचमणि है उससे सुंदर तो जम्मू कश्मीर है उससे सुंदर तो उत्तराखंड है उससे सुंदर तो हमारे देश का बहुत सारा इलाका है और व यह कहते हैं कि दो घंटे की कार चलाओ देश खत्म हो जाता है दूसरे देश में घुस जाओ इतना छोटा सा ज्यादा देर घूम भी नहीं सकते हर दो तीन घंटे की ड्राइव में देश की सीमा खत्म हो जाती है तो पता चला कि जो यात्रा करने के लिए जाते हैं वह 8 10 परट है वह बार-बार नहीं जाते फिर यह बारबार जाने वाले कौन है हर महीने जाते हैं महीने में दो बार जाते हैं कोई तो हफ्ते में एक दो बार चले जाते हैं कोई दो-तीन महीने में जाते हैं इनकी सूची बनाई तो पता चला वह 8 हज लोग हैं जो बार-बार स्विटजरलैंड जाते हैं बार-बार जाते हैं बार-बार जाते हैं बारबार जाते हैं कभी-कभी तो एक महीने में चार बार चले जाते और उस सूची में ऐसे बड़े-बड़े नाम है कि जब खुलेगा तो आपकी आत्मा हिल जाएगी अंदर से आप कहेंगे अरे इनको तो हम बड़ा पवित्र मानते थे अच्छा मानते थे यह भी स्विटजरलैंड जाते हैं ऐसे ऐसे नाम आपको एक बात बताता हूं कि जब हमारे यहां कोई सरकार गिरती है ना और नई सरकार आती है तब सबसे ज्यादा जाते हैं उसी दौर में क्यों क नई सरकार बनानी है तो रकम चाहिए कि नहीं चाहिए एमपी को खरीदना है एमएलए को खरीदना तो रकम कहां से आएगी वहीं से निकाल के लाते और इनमें से कुछ तो ऐसे हैं जो गए स्विटजरलैंड अपनी रकम निकालने के लिए कुछ नेता ऐसे भी हुए हैं नाम नहीं लेता उनका दो नेता बड़े प्रमुख इस देश में हुए हैं जिनके जॉइंट अकाउंट थे स्विटजरलैंड दोनों ने मिलकर खोला म क्या हुआ कि एक नेता ने दूसरे को बिना बताए सब निकाल लिया बताया नहीं निकाल लिया और उस एक नेता ने अपने नाम से किसी दूसरी बैंक में ट्रांसफर कर दिया अब दूसरा नेता जब मुख्यमंत्री के पद से उतरा तब उसको याद आई कि मेरा तो खाता भी है तो गया तो पता चला रकम तो गायब परिणाम जानते हैं क्या हुआ बैंक की लिफ्ट में ही हर्ट अटैक आया और वह मर गया वहां उसकी लाश यहां पर आई थी और वह मुख्यमंत्री पद पर बैठा हुआ व्यक्ति था इस देश ऐसे भी किस्से कि दो नेताओं ने जॉइंट अकाउंट खोले एक ने सब निकाल लिया पता ही नहीं चला तो यह सब घोटाले बाजी घपले बाजी करने वाले हमारे नेता और उनके साथ अधिकारी इन्होंने 62 साल देश के विकास का लूट लूट कर सारा पैसा वहां रख दिया व रकम 72 खज करोड़ हो गई 800 अकाउंट का तो पता चल चुका है हो सकता है 10 20 हज और निकले क्योंकि यह सूची अभी खत्म नहीं हुई है आप बोलेंगे जी बताओगे कब थोड़े दिन बाद बताएंगे अभी तो हम तैयारी कर रहे हैं तैयारी क्या कर रहे हैं हमारी कोशिश यह है कि पहले यह सारा धन वापस आ जाए फिर इनका नाम उजागर हो हमारी कोशिश य है इसलिए हम बताएंगे तो सही थोड़े दिन के बाद अब वह थोड़े दिन साल भर हो सकता है दो साल हो सकता है ढाई साल हो सकता है कुछ भी हो सकता है और दूसरा हमारी कोशिश यह है कि सुप्रीम कोर्ट बताए इसको हम क्यों बताए संसद बताए इसको हम क्यों बताए हम संसद को मदद करेंगे कि देखो यह सूची है आप क्रॉस वेरिफिकेशन कर लो सरकार को देने को हम तैयार हैं सरकार जिस दिन मांगेगी दे देंगे सरकार घोषणा करे ना यह लोग हैं संसद घोषणा करे सुप्रीम कोर्ट कहे यह लोग हैं हम तो जब कोई नहीं कहेगा तब कहेंगे यह लोग है तब तक हम कोशिश करेंगे कि इन सबको सुधरने का मौका दें और यह ईमानदारी से अपने पैसे वहां से निकालकर भारत में वापस ला इसी काम के लिए भारत इसी काम के लिए भारत स्वाभिमान अभियान हमने शुरू किया है यह हमारे अभियान का सबसे प्रमुख उद्देश्य है जिसके लिए यह बना है आपने स्वामी रामदेव जी का व्याख्यान सुना हो तो बार-बार वोह कहते हैं भ्रष्टाचार की समाप्ति आर्थिक और राजनैतिक हम हमा एजेंडे में सबसे ऊपर है हम चाहते हैं भ्रष्टाचार खत्म हो और भ्रष्टाचार के लिए जो लूट हुई है 62 साल यह लूट का लाभ देश को वापस मिले जिससे देश वंचित हो गया आप बोलेंगे यह कैसे होगा क्या यह पैसा वापस आएगा क्या देश को फिर मिल पाएगा क्या इससे देश का विकास हो सकता है आएगा अगर आप चाहेंगे तो हमने चाहा है और आपको बताया है अब आप भी चाह लेंगे तो आ जाएगा कैसे आ जाएगा हमारे देश की संसद के पास इस पैसे को वापस लाने की ताकत है और हमारे देश के सुप्रीम कोर्ट के पास भी इस पैसे को वापस लाने की ताकत है मैं आपको एक पुरानी बात बताता हूं आपको याद है एक प्रधानमंत्री हुए उनका नाम था पीवी नरसिंहा राव उनके जमाने में एक यूरिया घोटाला हुआ था मालूम है 133 करोड़ रुप का एडवांस पेमेंट हुआ यूरिया का एक दाना भी देश में नहीं आया यह था यूरिया घोटाला पैसे दे दिए यूरिया नहीं आया पेमेंट हो गया यूरिया नहीं आया जब जांच हुई तो पता चला कि बहुत बड़ा घोटाला है और वह 133 करोड़ का जो पेमेंट हुआ वह स्विटजरलैंड की बैंक में जाकर जमा हो गया हां तब दिल्ली के हाई कोर्ट में और बाद में भ के सुप्रीम कोर्ट में दो याचिकाएं दायर हुई पब्लिक इंटरेस्ट पिटीशन और उस पर हाई कोर्ट का फैसला आया फिर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आया कि यूरिया के पेमेंट में जो पैसा गया वह भारत की राष्ट्रीय संपत्ति है तो या तो यूरिया आना चाहिए या पैसा वापस आना चाहिए सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के आने के 15 दिन के अंदर 13 करोड़ रुपया स्विटजरलैंड से भारत में वापस आ गया हमारा यह कहना है कि अगर यूरिया घोटाले का पैसा आ सकता है तो सभी घोटालों का पैसा आ सकता है और अगर सुप्रीम कोर्ट यूरिया घोटाले के पैसे को राष्ट्रीय संपत्ति घोषित कर सकता है तो आजादी के 62 साल में जितने घोटाले हुए हैं सभी के धन को राष्ट्रीय संपत्ति घोषित कर देना चाहिए तो इसको वापस लाने का एक उपाय है कि यह धन राष्ट्रीय संपत्ति घोषित हो जाए आप बोलेंगे इसमें मामला क्या है मामला सीधा सा यह है कि अंतरराष्ट्रीय कुछ कानून है उनमें से एक यह है कि किसी भी देश का राष्ट्रीय धन दूसरे देश में जमा नहीं हो सकता यह अंतरराष्ट्रीय नियम है सब देश इसका पालन करते हैं हर देश का राष्ट्रीय धन उसी देश की बैंकों में जमा हो सकता भारत का राष्ट्रीय धन भारत की बैंकों में जमा होगा पाकिस्तान का पाकिस्तान की बैंकों में यह नहीं हो सकता कि भारत का धन राष्ट्र का स्विटजरलैंड में जमा हो जाए तो इसका हमें लाभ उठाना है हमें क्या करना है या तो हमारे सुप्रीम कोर्ट में हम मुकदमा करें भारत स्वाभिमान की तरफ से उसकी तैयारी हम कर रहे हैं जनहित याचिका पब्लिक इंटरेस्ट पिटीशन कि यह 72 लाख 800 हजार करोड़ जो गया 62 साल में यह भारत की राष्ट्रीय संपत्ति है और कोर्ट में हम आसानी से इसे सिद्ध कर देंगे इसमें देर नहीं लगेगी क्यों हम तो नेताओं की जन्म कुंडली कोर्ट के सामने रख कि देखो 15 साल पहले इनके पास क्या था अब क्या है 10 साल पहले क्या था अब क्या है 20 साल पहले क्या था अब क्या है पूछ लो इनको बुला बुला के और जो सही जवाब ना दे तो सबका नारको टेस्ट करवा उसमें तो बताएंगे आपको मैं एक सच्ची बात बताता हूं आपने एक नाम सुना अब्दुल करीम तेलगी वो एक आदमी ने 36 हज करोड़ का घोटाला किया 36000 स्टंप घोटाला उसका नारको टेस्ट हुआ उसने 19 नेताओं के नाम बताए 19 और उसमें से तीन तो ऐसे हैं जो इस समय केंद्र सरकार में मंत्री इस समय तीन नाम तो ऐसे और 11 नाम ऐसे हैं जो महाराष्ट्र की राज्य सरकार में मंत्री तीन केंद्र सरकार में मंत्री और बाकी दूसरे नेता है तो अब्दुल करीम तेलगी ने सबके नाम बता दिए अब सरकार की हालत खराब यह हो रही है कि उनको उजागर कैसे करें क्योंकि सरकार उनके समर्थन से चल रही अब सरकार इंतजार कर रही है कि अब्दुल करीम तेलगी मर जाए हां सरकार ही प्रार्थना कर रही है कि यह मर जाए और मामला रफा दफा हो जाए जिनके नाम है वह वहीं दबे रह जाए वो उजागर ना होने पाए यह है स्थिति तो मतलब कहने का यह है कि कोई अब्दुल करीम तेलगी 36 हज करोड़ का घोटाला तब कर पाता है जब उसको 19 नेताओं का समर्थन और सहयोग मिलता है मतलब सीधी सी बात है कि इस देश में चोरी और डकैती करने वालों को राजनीतिक संरक्षण मिलने के बाद ही वह करते हैं ऐसे ही नहीं होता तो हम तो अब्दुल करीम तेलगी जैसे लोगों का नारको टेस्ट करवा लेंगे तो सबके नाम निकल आएंगे या इनका ही करवा देंगे तो सबके नाम निकल आएंगे नाम निकालना कोई महत्व की बात नहीं महत्व की बात यह है कि इन्होंने जो लूटा हुआ धन है वह वापस आना चाहिए वह देश का धन है राष्ट्र का धन है देश के हित में काम उसको होना चाहिए तो इसके लिए एक रास्ता तो हमने अप हर साल 18 20 हजार करोड़ का नुकसान करते हैं फिर हम माइका बेचते हैं उसमें भी यही नुकसान होता है हम बहुत बड़े पैमाने पर हिंदुस्तान से चूना पत्थर बेचते हैं चूना पत्थर आप समझते हैं कैल्शियम जिससे चूना बनाते हैं दुनिया के देश हमसे खरीदते हैं क्योंकि उससे सीमेंट बनता है उसमें भी यही नुकसान होता है गेहूं बेचते हैं तो यही नुकसान होता है बासमती चावल बेचते हैं तो यही नुकसान हमको होता है आपको सुनकर ताज्जुब होगा कि बासमती चावल आप बाजार में खरीदें तो आपको 50 किलो से कम नहीं मिलेगा यही बासमती चावल रुपए का अवमूल्यन होने के कारण दो रुपए किलो में चला जाता है अमेरिका यही बासमती चा चीनी हमन बनाते हैं इस देश में दो तरह की चीनी बनती है एक तो छोटे दाने की और एक बड़े आ क्यूब वाली जो चीनी होती है ना बहुत महंगी होती है 3 4 रप किलो की लेकिन अवमूल्यन के कारण छ सात रुप किलो में ही बेचनी पड़ती है हर साल हम जो निर्यात करते हैं उसमें लाखों करोड़ों रुपए का घाटा होता है हमारा एक साल का निर्यात करीब 5 लाख करोड़ रुपए का है इस समय अगर रुपया और डॉलर बराबर हो तो यही निर्यात 50 लाख करोड़ का होता है एक साल इतना नुकसान हम उठा रहे तो यह नुकसान अब हम ज्यादा दिन नहीं उठाना चाहते हम चाहते हैं कि रुपया और डॉलर बराबर हो जाए रुपया और कब बराबर होगा जब हमने लिया हुआ विदेशी कर्ज चुका दिया जिस दिन हम विदेशी कर्ज चुकाएंगे रुपया डॉलर बराबर हो जाएगा रुपया डॉलर बराबर होते ही निर्यात की आमनी 50 गुनी बढ़ जाएगी और आयात का खर्चा 50 गुना घट जाएगा और दोनों मिला दे तो यह देश तो दो तीन साल में ही सोने की चुड़िया हो जाएगा चीन तो हमसे टक्कर नहीं ले पाएगा इतना आगे हम निकल जाएंगे आज दुनिया में यह कहा जाता है चीन सबसे तेजी से विकास करने वाला देश है अमेरिका भी चीन से अब पीछे रह गया है हम चीन के आगे निकल जाएंगे क्योंकि हमारे पास ट्रेड सरप्लस होगा डेफिसिट नहीं होगा और कुछ बात बताता हूं अगर रुपया डॉलर बराबर हुआ तो आपकी जिंदगी में क्या परिवर्तन आएगा जो चीजें आप बाजार से खरीद रहे हैं सब सस्ती हो जाएंगी जो डीजल आप इस समय खरीदते हैं 55 लीटर य यह हो जाएगा 10 से 12 रप लीटर जो पेट्रोल आप खरीदते हैं 50 रप लीटर यह हो जाएगा 1 18 रप लीटर जो रसोई गैस का सिलेंडर आप लेते हैं 50 का यह हो जाएगा 4 का जिस लड़के या लड़की को इंजीनियरिंग पढ़ाने में आपका ढाई ती लाख खर्च होता है वह 25000 में ही इंजीनियरिंग पढ़ लेगा जिसको मेडिकल के एग्जामिनेशन से लेकर डॉक्टर बनाने तक 5 सा लाख खर्च होता वो मुश्किल से 500 के खर्चे में हो जाएगा आप अगर दिल्ली से न्यूयॉर्क जाए और न्यूयॉर्क से वापस दिल्ली आए मुश्किल से सात आ हजार रप में आपका किराया हो जाएगा जो इस समय 9 हज तक खर्च होता है सारी कीमतें गिरगी क्योंकि रुपए की कीमत बढ़ेगी डॉलर की कीमत गिरेगी और भारत की जो संपत्ति है अंतरराष्ट्रीय बाजार में 50 गुनी ज्यादा हो जाएगी इसी कीमत पर आमनी 50 गुनी बढ़ जाएगी सब चीजों में बढ़ोत्तरी होगी अगर रुपया और डॉलर बराबर हो और यह तब बराबर होगा जब हम कर्ज वापस करें कर्ज वापस तब करेंगे जब 18 लाख करोड़ हमारी जेब में हो यह आएगा कहां से यह स्विस बैंक का पैसा वापस लाने के बाद ही आएगा तो एक तो उस पैसे से कर्ज चुकाना है दूसरा गांव का विकास करना है गांव का विकास करने में 50 लाख करोड़ चाहिए कर्ज देने में कम से कम हमको 18 लाख करोड़ चाहिए तो करीब-करीब आप समझ लो 68 लाख करोड़ 70 लाख करोड़ खर्च हो जाएगा फिर भी हमारे पास करीब करब 60 लाख करोड़ बचेगा और उस 60 लाख करोड़ को अगर हम फिक्स डिपॉजिट में रख दें भारत माता के नाम से फिक्स डिपॉजिट कर दें और 10 पर का ब्याज उस पर मिलता रहे तो साल का ब्याज करीब सवा साल 65 लाख करोड़ का होगा माने पूरा बजट हम बना सकेंगे बिना एक पैसा किसी पर टैक्स लगाए हुए पूरी अर्थव्यवस्था को टैक्स फ्री कर [प्रशंसा] सकते टैक्स सब हटा सकते हैं इनकम टैक्स हटा सकते हैं कॉर्पोरेट टैक्स हटा सकते हैं सेंट्रल एक्साइज हटा सकते हैं सारे टैक्स खत्म कर सकते और टैक्स खत्म होते ही हर चीज 70 प्रतित सस्ती हो जाएगी जो पेन आपको अभी र का मिलता है यह रप का हो जाएगा जो घड़ी आपकी 00 की है ये 00 की हो जाए हर चीज 60 से 70 प्र सस्ती होगी टैक्स हटते तो देश चलाने का खर्चा कहां से आएगा टैक्स नहीं लगाएंगे तो हमने बता दिया स्विस बैंक के बचे हुए पैसे को फिक्स डिपॉजिट में रख दो साल के ब्याज से ही देश चल जाएगा और दूसरा एक रास्ता है अपने पास कि सब टैक्स खत्म कर दो एक टैक्स लगाओ सिर्फ ट्रांजैक्शन टैक्स और वह भी टोटल ट्रांजैक्शन का 2 पर सिर्फ हमारे देश में बैंक में लेनदेन होता है साल में महीने में और हर दिन और ड्राफ्ट के द्वारा जो लेनदेन है वह 125000 करोड़ हर एक दिन का है साल का लेनदेन 400 लाख करोड़ का और कैश का लेनदेन इसमें जोड़ दे तो व चेक और ड्राफ्ट से ज्यादा आपको मालूम है हम कैश में ट्रांजैक्शन ज्यादा करते हैं चेक और ड्राफ्ट की तुलना सारे काम हम कैश में करते हैं सब्जी कैश में खरीदते हैं अपने घर की नौकरानी को कैश में पैसा देते हैं कोई चेक से नहीं देता कोई ड्राफ्ट से देता है नौकरों को नौकरा नियों को सब कैश में देते हैं सब्जी खरीदते हैं दुकान पर जाते हैं सब कैश में करते हैं माने चेक से ज्यादा हमारा कैश का व्यवहार है तो कैश के व्यवहार को या तो चेक में ले आओ या सारे व्यवहार को ओपन कर दो वाइट कर दो और यह वाइट कब हो जाएगा आप इनकम टैक्स हटा दो यह सारा व्यवहार अपने आप ओपन हो जाएगा सब वाइट हो जाएगा यह छुपाना तब पड़ता है जब इनकम टैक्स का डर रहता है आप इनकम टैक्स हटा दो डर खत्म हो जाएगा इनकम टैक्स इसलिए भी हटाना जरूर अंग्रेजों के जमाने का लगाया हुआ टैक्स है वह हमारा नहीं है 1860 में अंग्रेजों ने यह टैक्स लाया था और अंग्रेजों की योजना यह थी कि भारतवासियों से लूट लूट कर पैसा लंदन लेकर जाना इसलिए यह टैक्स उन्होंने लगाया था अंग्रेजों ने टैक्स पता है कैसे लगाए थे वह यह कहते थे कि भारत का आदमी कोई भी चीज का उत्पादन करे तो उसके उत्पादन परही टैक्स लगा दो एक्साइज ड्यूटी फिर उस उत्पादन को व बेचने के लिए बाजार में जाए तो बेचने पर टैक्स लगा दो सेल्स टैक्स फिर बेचकर मुनाफा कमाए तो उसके मुनाफे पर टैक्स लगा दो इनकम टैक्स फिर उस सामान को एक गांव से दूसरे गांव में लेकर जाए तो दोनों गांव में टैक्स लगा दो एक में एंट्री टैक्स एक में एग्जिट टैक्स फिर अंग्रेजों की सड़क पर से लेके जाए तो वहां टैक्स लगा दो टोल टैक्स फिर ऑक्ट्रॉय लगा दो ऐसे करके बीस यों टैक्स उन्होंने प्लान किए आजादी के 62 साल के बाद यह टैक्स क्यों चलने चाहिए क्योंकि अंग्रेजों ने तो लूटने के लिए लगाए थे तो हम खत्म करना चाहते हैं सारे टैक्स खत्म कर दो हिंदुस्तान का हर आदमी ईमानदार हो जाएगा क्योंकि बेईमानी इस देश के लोगों को टैक्स डिपार्टमेंट ने सिखाई है इस देश का आदमी बेईमान नहीं है यह तो इनकम टैक्स सेंट्रल एक्साइज सेल्स टैक्स के डिपार्टमेंट्स हैं और कानून है जो बेईमान बनाते हैं इस देश के लोगों को आपने ₹1 कमाया उसमें से ₹ इनकम टैक्स में दे दिया तो ₹ आपका वाइट है नहीं दिया तो ₹1 ब्लैक है रुपया तो रुपया है वह ब्लैक एंड वाइट नहीं होता यह तो कानून गलत है जो कुछ पैसे को वाइट कहता है कुछ को ब्लैक कहता है और इस कानून का दुश्चक्र पता है कितना खतरनाक हो गया है कि इस देश की अर्थव्यवस्था में जो कुल उत्पादन होता है जिसको जीडीपी कहते हैं जो 48 लाख करोड़ का है उसका 70 प्र हिस्सा ब्लैक इकॉनमी में चलता है 66 लाख करोड़ रुपए ब्लैक में चलता है इस देश में घूमता है और लोग ब्लैक में ट्रांजैक्शन कर क्यों रहे हैं इनकम टैक्स के डर के कारण लोगों ने पैसा छुपा के क्यों रखा हुआ है इनकम टैक्स के डर के कारण हटा दो इनकम टैक्स लोगों ने जितना पैसा छुपा के रखा हुआ सब बाजार में आ जाएगा और सारा ट्रांजैक्शन वाइट में हो जाएगा हर आदमी ईमानदार है और ईमानदारी से जीना चाहता है टैक्स डिपार्टमेंट उसको ईमानदार नहीं रहने देता हम चाहते हैं यह इनकम टैक्स खत्म हो जाए सेंट्रल एक्साइज सब खत्म हो ट्रांजैक्शन जो हो रहा है इस पर 2 पर टैक्स लगा दो तो साल का इकट्ठा होता है रप 18 ख 20 हज करोड़ जो इस समय के कलेक्शन से तीन गुना ज्यादा है सारे टैक्स हम खत्म कर और 18 लाख 20 हजार करोड़ हमें मिले तो हम तो बजट 18 लाख 20 हजार करोड़ का बनाएंगे अभी तो 10 लाख करोड़ का बंद बिना किसी से भीख मांगे हुए बिना किसी से दान मांगे हुए अपने पैरों पर इस देश को खड़ा करेंगे स्वावलंबी बनाएंगे और जो स्वावलंबी होता है वही स्वाभिमानी हो सकता [संगीत] है हमें एक स्वाभिमानी भारत का निर्माण करना है इसीलिए भारत स्वाभिमान अभियान हमने शुरू किया और इस स्वाभिमानी भारत के निर्माण का यह रास्ता है अब आप बोलेंगे जी हम क्या करें आप इसमें हमारी मदद करो तभी यह होगा आपकी मदद के बिना नहीं होगा हम अगर अकेले कर लेते इस काम को तो मैं हरिद्वार से 2000 किलोमीटर चलकर आपके बीच में नहीं आता अकेला अगर कर लेता मैं इस काम या स्वामी रामदेव जी कर लेते अकेले तो मैं नहीं आता क्या जरूरत है हम अकेले नहीं कर सकते क्यों क्योंकि प्रजातंत्र में कोई भी काम करवाना हो तो बहुमत चाहिए हमको इस काम के लिए बहु चाहिए तो आप हमारा बहुमत बने कैसे हमारी ताकत बने ताकत आ आप हमारी कैसे बनेंगे हमारे इस अभियान में आप जुड़ जाएं जुड़ने का रास्ता क्या है बहुत सरल है इस अभियान में सदस्य बनने के लिए एक फॉर्म है वह भर दे यहां की जो स्थानीय समिति है ना होशंगाबाद की पतंजलि योग समिति यह आपको फॉर्म दे देगी भारत स्वाभिमान समिति से फॉर्म ले लीजिए यह अजय भाई और ये सब लोग यहीं के संचालक हैं इनसे फॉर्म ले लीजिए भर के इनको दे दीजिए उसमें कुछ मेंबरशिप फीस है साधारण सदस्य बनना है तो रप देना है बस और असाधारण बनना है तो 00 देना तो मेंबरशिप आप कर दीजिए तो हमें थोड़े फंड्स मिल जाएंगे काम करने के लिए और आप हमसे जुड़ जाए हमारी शक्ति जैसे-जैसे बड़ी होती जाएगी यह सब काम हम आसानी से करा लेंगे क्यों संघे शक्ति कलयुग कलयुग में संगठन की शक्ति ही बड़ी होती है सतयुग जब होता हो तब राजा की शक्ति बड़ी होती थी अब कलयुग में संगठन की शक्ति बड़ी है तो हमें संगठन की शक्ति खड़ी करनी है हमें पा करोड़ सा करोड़ 10 करोड़ लोग ऐसे जमा करने हैं हिंदुस्तान की सभी राजनीतिक पार्टियों के पास कुल मिलाकर 4 करोड़ सदस्य हैं सबके पास बीजेपी कांग्रेस जनता दल सीपीएम सीपीआई समाजवादी पार्टी बहुजन समाज पार्टी 40 और आठ 48 पार्टियों के पास चार करोड़ मेंबर है हमारी कोशिश है कि पा करोड़ हमारे पास हो जाए वोह 48 एक तरफ हो जाए तो भी हमारी लाइन उनसे बड़ी हो और जिस दिन पा करोड़ हो जाएंगे तब इनकी नाक में हम नकेल डाल देंगे यह सब वही करेंगे जो हम कहेंगे कुछ और कर ही नहीं सकते हम डिक्टेशन देंगे और यह नियम बनाएंगे नीतियां बनाएंगे ऐसी स्थिति हम इस देश में लाना चाहते सरकार किसी की भी हो हमें कोई फर्क नहीं पड़ता बीजेपी की या कांग्रेस की हम बताएंगे यह कानून बनाओ तो वह बनाएंगे हम कहेंगे ऐसी नीति चलाओ तो वह चलाएंगे नहीं चलाएंगे कान पकड़ के उतारेंगे दूसरे को बिठाए हम नहीं बैठेंगे वहां जा भारत स्वाभिमान का स्पष्ट कहना है कि हमें सत्ता और सिंहासन नहीं चाहिए लेकिन हमारा दूसरा भी स्पष्ट कहना है कि सत्ता और सिंहासन पर बैठे हुए लोग अगर इसी मद में चूर रहे लूटते रहे घोटाले करते रहे भ्रष्टाचार करते रहे तो एक मिनट उनको चैन की नींद सोने नहीं देंगे वो अब खबरदार हो जाए और इसी के लिए यह सारा अभियान है तो आप हमारे संगठन से जुड़िए थोड़ी हमारी ताकत बड़ी होगी और इस ताकत की ताकत पर या इसके दम पर यह काम हमें करना है पूरे देश में और एक छोटी सी अपील कहक मैं खत्म करता हूं मेरी बात को फिर आपके प्रश्नों के उत्तर दूंगा कि आप अपने व्यक्तिगत जीवन में भी एक काम करें उससे भी देश को थोड़ा फायदा हो जाए तो अच्छा है यह तो हम सार्वजनिक जीवन में जो करेंगे वह बात मैंने कही आपके व्यक्तिगत जीवन में थोड़ा बदलाव करें थोड़ा चेंज करें इस देश के फायदे के लिए क्या बदलाव करें आप पूछेंगे तो सीधी सी बात है कर्ज बहुत है देश पर अब जब ज्यादा कर्ज हो जाता है किसी देश पर तो क्या करना चाहिए इसको ऐसे सोचने की कोशिश करिए हमारे घर पर बहुत कर्ज हो गया अब हम क्या करें तो हम दो ही काम करेंगे या तो घर के खर्चे घटाए या घर की आमदनी बढ़ाएंगे दो ही काम करेंगे ना घर के ऊपर अगर कर्ज बढ़ता तो घर के खर्चे घटा हैं और आमनी बढ़ाते हैं तो देश हमारा बड़ा घर है इसके ऊपर बहुत कर्ज हो गया है तो देश के खर्चे घटाए और देश की आमनी बढ़ाइए यह मेरी आपसे व्यक्तिगत अपील तो आप बोलेंगे इसके लिए क्या करें इसके लिए अपनी जिंदगी में थोड़ा बदलाव करिए थोड़ा थोड़ा ज्यादा नहीं देश का खर्चा घटाना माने एक एक देश का नागरिक उसका खर्चा घटाना तो क खर्चा घटेगा तो आप अपनी जिंदगी को सवेरे से शाम तक देखिए आप क्या-क्या फालतू खर्चा ऐसा कर रहे हैं जिसको बचाया जा सकता है फालतू खर्चा क्याक कर तो मैं आपको बता सकता हूं क्याक फालतू खर्चा आप कर रहे जिसके बिना आपका जीवन बहुत अच्छे से चल सकता है ना खर्च करें वह पैसा तो भी जीवन चल सकता है सबसे बड़ा फालतू खर्चा यह जो देश कर रहा है चाय पीने में सवेरे से लेकर शाम तक हम जितनी चाय पी जाते हैं एक साल में वह 70 करोड़ किलोग्राम होती है और एक किलो चाय 50 रुप की आती है तो 70 करोड़ किलोग्राम चाय को गुणा करेंगे तो 90 हज करोड़ से ऊपर का बिल बैठता है चाय पीने का इस देश का ऐसे मूर्ख लोग हैं इस देश में उठते ही चाय हां कुछ भी काम बाद में करेंगे चाय पहले पिएंगे संडास और टट्टी भी बाद में जाएंगे चाय पहले पिएंगे कहते हैं टट्टी उतरती नहीं बिना चाय पिए उठते ही चाय पीते और सोते चाय और सरकारी दफ्तरों में तो चाय के अलावा कुछ होता ही नहीं है जब कभी चले जाओ कहां गया भाई आदमी चाय पीने गया कहां गया चाय पीने गया सारे रिश्वत के काम चाय के नाम पर सारे घूसखोरी के काम चाय के नाम पर चाय पीने चलो दे दो पैसे वो कहते हैं ना कोई भी कर्मचारी कहेगा जी चाय पीने चलो समझ लो पैसे मांग रहा है तो खर्चा पानी सब चाय के नाम पर यह चाय बंद करो और यह चाय इसलिए बंद करो कि यह हिंदुस्तानी नहीं है अंग्रेजों की लाई हुई है अंग्रेजों के पहले इस देश में कोई चाय पीता नहीं था क्योंकि हमें जरूरत ही नहीं चाय पीने की चाय तो गर्म देश के सॉरी ठंडे देश के लोगों को पीने की चीज है क्योंकि गर्मी लाती है ब्लड प्रेशर बढ़ा है और ठंडे देश तो यूरोप और अमेरिका और कनाडा के हैं हम तो गर्म देश वाले हैं हम क्यों पिए हम तो दूध पिए दही पिए लस्सी पिए छाज पिए मट्ठा पिए नींबू की शिकंजी पिए नारियल का पानी पिए संतु का रस पिए मुसम्मी का रस पिए अपने पास तो पीने के लिए इतनी चीजें हैं हमको क्यों पीना चाहिए आयुर्वेद में चाय निषिद्ध है आपको मालूम और आप इसे बार-बार पीते हैं तो बड़ा नुकसान है सबसे बड़ा नुकसान है कि पेट की एसिडिटी बढ़ाती है अम्लता बढ़ाती है चाय में केमिकल जितने भी हैं वह सब एसिडिक है और पेट की अम्लता बढ़ेगी तो खून की अम्लता बढ़ेगी रक्त की एसिडिटी बढ़ेगी तो रक्त में फिर 80 तरह के रोग पैदा होंगे और उन रोगों से लड़ने के लिए फिर आपको और हजारों करोड़ खर्च करने पड़ेंगे तो चाय पियो उसमें 700 हज 90 हजार करोड़ खर्च हो फिर चाय से जो रोग पैदा हो उसमें और हजारों करोड़ खर्च हो क्यों फालतू खर्च कर रहे हैं बंद कर दो जरूरत नहीं है इसको पीने की और यह नशा है रोज पियो फिर एक दिन ना पियो तो सिर में दर्द होता है नशा है बिल्कुल ये शराब की तरह का बंद करो इसको आप मत पियो किसी मेहमान को भी मत पिलाओ हां जो आप नहीं करो तो मेहमान को क्यों करवाना तो फिर आप बोलोगे फिर क्या करें विकल्प मैं बताता हूं दूध पियो मैंने एक दिन हिसाब लगाया कि 90 हज करोड़ की जो हम चाय पी रहे हैं इतने ही करोड़ का दूध पी ले 90 हज करोड़ का तो देश की तो दशा ही बदल जाएगी 90 हज करोड़ का दूध पिएंगे तो 20 करोड़ गाय पालनी पड़ेगी तब इतना दूध आएगा और जो 20 करोड़ गाय पालनी पड़े तो गाय का कतल आज और अभी से बंद कराना पड़ेगा तभी 20 करोड़ गाय बचेगी नहीं तो नहीं बचेगी तो कतल होने के लिए जो गाय जा रही है यह रुक जाएगी और यह जो गाय 20 करोड़ हो गई हर गाय साल में कम से कम एक बछड़ा या एक बछिया देती है तो तो कितने बैल हो जाएंगे और इतने बैल हो गए तो खेती के काम आएंगे तो ट्रैक्टर खत्म हो जाएगा डीजल का खर्चा पूरी तरह से बंद हो जाएगा किसानों का और जो बैल और गाय बढ़ गए तो गोबर बहुत हो जाएगा और गोबर इतना हो जाएगा कि हर खेत में डालने के लिए मिल जाएगा यूरिया खरीदना नहीं पड़ेगा डीएपी डालना नहीं पड़ेगा यूरिया डीएपी का 480000 करोड़ का खर्चा बच जाएगा और जो गाय बैल बहुत हो गए तो उनका मूत्र भी बहुत होगा उस मूत्र को इकट्ठा करके छिड़क रहे तो फसल पर कीड़े नहीं आएंगे तो कीड़े मारने की जो दवाएं डालनी पड़ती हैं एंडोसल्फान मेलाथियान पैराथू यह सब बंद हो जाएंगी इसका दो लाख करोड़ और बच जाएगा देश को कितने फायदे हैं देखो आप बस एक काम करो चाय मत पियो दूध पियो दूध एक कप दूध पी लो और आप दूध पियोगे तो पैसा किसी किसान के ही हाथ जाने वाला है चाय पियोगे तो पैसा ब्रुक बंड कंपनी के हाथ जाएगा लिपटन के हाथ जाएगा टी सिटी के हाथ जाएगा गॉडफ्रे फिलिप्स के यह सब विदेशी कंपनियां है लूट के पैसा अपने देश में ले जाएंगी हम वही ठन ठन गोपाल पहले ईस्ट इंडिया कंपनी लूट थी अब यह लूटेंगे तो बंद कर दो आप इसे तुरंत बंद कर दो फिर पीना क्या है दूध पी लो जिनको दूध अच्छा नहीं लगता वो नींबू की शिकंजी पी ले नारियल का पानी पी ले संरे का रस पी ले मुसम्मी का रस पी ले और कुछ नहीं अच्छा लगता तो पानी को खूब गर्म करके चाय की तरह से पी ले पानी ही पी लो चाय की तरह से तुलसी की पत्ती डाल लो अदरक डाल लो परम पूजनीय स्वामी जी ने एक फार्मूले से एक दिव्य पेव बनाया वह पी लो चाय से अच्छा है वो हृदय घात के रोगियों के लिए भी ब्लड प्रेशर के रोगियों के लिए भी डायबिटिक लोग सबके लिए अच्छा है और उसका एक फायदा और है कि चाय पीकर जो जहर इकट्ठा हो गया वह जहर को फ्लश आउट करके बाहर निकाल देता दिव्य प तो वही पी लो उसको पियोगे तो पैसा हमारे ट्रस्ट में आएगा हमारा ट्रस्ट यही काम करने वाला है कुछ और नहीं करने वाला है तो आप तो बंद कर दो कल से कोशिश करो आपका जीवन बदलना शुरू होगा देश के लिए हम बदल रहे हैं देश के लिए यहां से शुरू दूसरा एक बदलाव और हो जाए तो बहुत अच्छा है फालतू का एकदम खर्चा हम करते हैं बीड़ी सिगरेट गुटका तंबाकू और दारू का फालतू खर्चा बी सियों हजार करोड़ रुपए हम बर्बाद कर देते एक गुटके का पाउच है चार पाच रुपए का मुश्किल से उसमें 10 ग्राम निकलता है अब तो 5 ग्राम ही हो गया 10 ग्राम आन रुप का माने हज रुप किलो का हम टका घटक हैं र किलो का काजू खा लो 00 किलो का बादाम खा लो हजार रुप किलो का गुटका क्यों खा रहे हो और गुटका खाकर गाल गलेगा कैंसर होगा मरोगे आप सब 20 लाख लोग मरते हैं हर साल इस देश में कैंसर से गुटका खाके बीड़ी पी के सिगरेट पी के बंद करो यह भी फालतू खर्चा बीड़ी का सिगरेट का गुटका का दारू का शराब का बंद करो यह खर्चा बचाओ फिर आप बोलोगे जी छूटता नहीं है छोड़ने के तरीके मैं बता सकता हूं गुटका जो किसी का छुड़ाना हो तो उसकी सबसे अच्छी दवा है अदरक अदरक है ना उसके छोटे-छोटे टुकड़े करो उसमें नींबू का रस मिलाओ थोड़ा नमक मिलाओ और धूप में सुखा लो सुखा के जेब में भर के रखो जब भी गुटका खाने की तलब लगे अदरक का एक टुकड़ा मुंह में रख के चूसो चूसते रहो चबाना नहीं गुटका खाने की याद ही नहीं आएगी बहुत सरल है बहुत आसान ऐसे बीड़ी सिगरेट छोड़ना है तो उसमें भी अदरक काम आता है शराब छोड़नी है तो भी काम आता है अदरक में है क्या एक केमिकल है उसका नाम है सल्फर यह व्यसन करने वालों के शरीर में सल्फर बहुत कम हो जाता है तो इसकी तलब लगती है बाहर से पूर्ति करने के लिए तो वह अदरक से पूर्ति कर लो एक टूथपेस्ट ₹ का 100 ग्राम आता है 00 किलो अब 00 किलो का पेस्ट रड़ते हैं और थूकते हैं उसको 00 किलो का घी रोटी पर लगाकर खाते हैं 00 केलो का पेस्ट वस फशन में थूक के चले जाते हैं कहते हैं हम बड़े स्मार्ट मैं उनसे कहता हूं और स्मार्ट बनो तो कहते क्या करें मैं कहता हूं यह 00 किलो का पेस्ट इतना महंगा इसको थूकते क्यों हो रोटी पर लगा लगा के खा लो क्योंकि घी से तो महंगा है फालतू खर्चा पेस्ट का हमारे देश में 20 25 साल पहले तक कोई नहीं करता था यह पेस्ट यह टीवी के विज्ञापन में देख देख देख के हमारा दिमाग खराब हो गया ब्रश ले आते हैं पेस्ट ले आते हैं आपको मैं एक गहरी बात कहना चाहता हूं व यह अमेरिका और यूरोप के देशों में यह टूथपेस्ट जब बिकता है ना तो उस पर चेतावनी लिखी रहती है अंग्रेजी भाषा में क्या लिखा रहता है इट इज कार्सिनो जैनिक माने कैंसरस सभी टूथपेस्ट कैंसर करते हैं क्यों टूथपेस्ट बनाने में केमिकल डाला जाता उसका नाम है सोडियम लोरेल सल्फेट वो कैंसर करता है और यह केमिकल डाले बिना पेस्ट नहीं बन सकता टूथपेस्ट जब आप घिसते हो तो झाग बनता है ना वो झाग बनाने वाला केमिकल यही है सोडियम लोरेल सल्फेट यही केमिकल होता है शेविंग क्रीम में यही केमिकल होता है वाशिंग पाउडर में यही केमिकल है डिटर्जेंट पाउडर में वही केमिकल है टूथपेस्ट में वही केमिकल है शैंपू में सब में एक ही केमिकल है सबकी क्वालिटी एक ही है अब हम पढ़े लिखे लोगों को क्या लगता है जो पेस्ट में झाग ज्यादा बने वो उतना ही अच्छा तो शैंपू से दांत साफ करो फिर बहुत झाग बनता है उसम शेविंग क्रीम लगाओ दांतों में खूब झाक देगी यह झाक बनाने वाला केमिकल बहुत खराब है अमेरिका में तो दांतों के डॉक्टर है ना वो पेशेंट को जब समझाते हैं तो एक ही बात कहते हैं डोंट यूज टूथपेस्ट वो कहते हैं यूज ओनली टूथ ब्रश वो कहते हैं खाली ब्रश से दांत साफ कर लो इस पर पेस्ट मत लगाओ क्योंकि कैंसरस है तो आप छोड़ दो इसको कुछ अच्छा नहीं और एक महत्व की बात है कि सब टूथपेस्ट कॉल गट क्लोज अप पेप्सोडेंट सिबाका फॉरन जितने भी हैं यह मरे हुए जानवरों की हड्डियों से बनते हैं हमारे देश में हजारों कतल खाने चलते हैं 36000 कतल खाने हैं इस देश में जो चलते हैं उनमें साढ़े करोड़ जानवर कटते हैं हर साल उनका मांस बाजार में बिकता है उनकी जो हड्डियां है वो पेस्ट बनाने वाली कंपनियां खरीदते हैं हड्डियों को सुखाकर पाउडर बनाते हैं फिर उससे पेस्ट बनता है और रोज सुबह हम दांतों पर घिसते हैं धर्म का नाश करते बंद कर दो आप अच्छा नहीं तो आप बोलोगे क्या होगा पैसे बचेंगे आपके देश के पैसे बचेंगे अब आप दांत कैसे साफ करेंगे दांत साफ करो नीम के दांतों से बबूल के दातुन से करंज के दातुन से पाकड़ के दातुन से टैक्स फ्री कॉस्ट फ्री साइड इफेक्ट नहीं है एक्सपायरी डेट कुछ भी नहीं हर गांव में दातुन मिलती है गली गली मिलती है आसानी से उपलब्ध है तो वही आप करो आप बोलोगे जी दातुन करेंगे तो पेड़ खत्म हो जाएंगे उसका भी हिसाब बताता हूं एक दातुन को सात दिन करना तो पेड़ कभी भी खत्म नहीं होंगे क्यों दातुन के लिए जो डंडी तोड़ते हैं ना तो जितनी आप तोड़ते हैं सात दिन में उतनी बड़ी फिर हो जाती है वो मेंटेन रहता है वह साइकिल तो एक दातुन तोड़ो सात दिन चलाओ कैसे दातुन को चबा लिया आगे का हिस्सा चाकू से काट दिया रात को पानी में डाल के रखा दूसरे दिन फिर चबा लिया छ सात दिन तक चल जाएगा अब कुछ लोग मुझे कहते हैं कि ये तो बड़ी गंदी बात है एक ही दातुन को सात दिन कैसे करें तो आप यह बताओ एक टूथ ब्रश को कितने दिन कर लेते हो एक एक साल ब्रश रगड़ लेते हैं तो दातुन सात दिन करने में क्या बुराई और दातुन तो फ्रेश है ना क्योंकि आगे का काट दिया दातुन आप करो और दातुन करना है तो दो फायदे एक तो दांत मजबूत मसूड़े स्वस्थ और फोकट में हो जाएगा सब काम खर्चा बच गया और मैंने एक दिन सोचा कि हम पेस्ट बंद ही कर दें और उतने ही पैसे दातुन खरीदने लगे और एक दातुन 50 पैसे का ही बिके मान लो तो 35 से 40 लाख लोगों को तो रोजगार दातुन बेचने से ही मिल सकता है पूरे देश आप कभी बंबई जाओ तो बंबई के सभी रेलवे स्टेशन पर दातुन मिलता है एक रुपए का दो दो रुपए का तीन तीन रुपए का चार जो बंबई में मिल सकता है तो होशंगाबाद में भी मिल सकता है रोजगार बढ़ा सकते हैं तो पेस्ट बंद करके ब्रश बंद कर के दातुन करें दातुन कभी नहीं मिले कोई मजबूरी हो जाए तो दंतमंजन कर ले बहुत सारे दंतमंजन भारत में बनते हैं और दंतमंजन घर में बना सकते हैं थोड़ा हल्दी ले लो थोड़ा नमक ले लो थोड़ा तेल ले लो तीनों को मिलाओ दांत प घिस लो बहुत अच्छा है खर्चे बचाने और खर्चा कहां बचा सकते हैं शेविंग क्रीम मत लगाओ खर्चा बचेगा बहुत पूरे देश का 50 करोड़ मर्द हैं जो शेविंग क्रीम में हजारों करोड़ खर्च करते हैं या तो स्वामी रामदेव जी की तरह से दाढ़ी रख लो तो खर्चा बचेगा दाढ़ी नहीं है तो बिना शेविंग क्रीम के दाढ़ी बनाओ खर्चा बचेगा आप बोलेंगे कैसे बनाए मैं आपको तरीका बताता हूं थोड़ा दूध ले लो दूध कच्चा दूध उसको चेहरे में लगाओ चेहरा एकदम सॉफ्ट हो जाता है स्किन फिर रेजर चलाओ बहुत चिकनी दाढ़ी बनती है मैं 10 साल से बनाता हूं चार फायदे हैं इसके पहला फायदा है ब्लेड का खर्चा कम क्योंकि जब दूध लगाते हैं ना तो चिकनाई बढ़ जाती है तो रेजर आसानी से चलता है तो ब्लेड कम घिस है तो ब्लेड का फायदा दूसरा फायदा दूध लगाओ तो गंदगी निकल जाती है चेहरे की दूध जो है ना बेस्ट क्वालिटी क्लींजिंग एजेंट है जितने बड़े-बड़े ब्यूटी पार्लर्स है ना वहां सब मिल्क क्लींजिंग ही होता है दूध से ही चेहरा साफ करते हैं तो रोज दूध लगाएंगे चेहरा साफ रहेगा कील मुहा से नहीं निकलेंगे चेहरा चमकेगा आप सब स्मार्ट हो जाएंगे फोकट में स्मार्ट बनने का तरीका बता रहा हूं दूध से दाढ़ी बनाओ दूध ना मिले तो दही से बना लो थोड़ा दही लगा लिया रेजर चला लिया नहीं तो गर्म पानी ले लो गर्म पानी से भी दाढ़ी बनती है नहीं तो नहाते समय दाढी बना लो नहीं तो सबसे आसान तरीका है कि एक बूंद तेल ले लो पानी में मिलाकर चेहरे पर लगाकर रेजर चलाओ एकदम डीप कट होता है क्लीन शेव होती शेविंग क्रीम का फालतू खर्चा बंद कर दो फिर और एक फालतू खर्चा आप बंद कर सकते हो साबुन का फालतू साबुन ज्यादा मत लगाओ तो कैसे नहाए बेसन से नहाओ चने के आटे से मुल्तानी मिट्टी से नहाओ नहीं तो तौलिया भिगा लो पानी में गीले तौलिया से शरीर रगड़ लो पानी से नहा लो नहीं तो दूध से नहा लो हमारे देश में महाशिवरात्रि का त्यौहार आता है शंकर भगवान को दूध से ही नहला हैं तो भक्त क्यों नहीं दूध से नहा सकते जब भगवान नहा सकते तो भक्त नहा सकते हम जब बुजुर्गों के पांव छूते हैं ना तो वह आशीर्वाद देते हैं दूधो नहाओ पूतो फलो कभी किसी ने ऐसा आशीर्वाद दिया लक्स लगाओ पूतो फलो या लाइफ बॉय लगाओ पुत्रियां फलो हमेशा कहते हैं दूधो नहाओ पूतो फलो तो बुजुर्गों की इतनी तो मानो कि दूध से नहा अब दूध से नहाने के फायदे क्या हैं दूध से नहाने का फायदा एक तो दूध की बिक्री बढ़ेगी मुनाफा किसानों को मिलेगा गाय पालनी पड़ेगी भैंस पालनी पड़ेगी पशुधन बढ़ेगा पशुधन ही देश का धन है वह कहते थे ना गोधन गज धन बाज धन और रतन धन खान तो गाय पशु यह सब धन है देश का संपत्ति है बोझा नहीं है कोई दूध की डिमांड बढ़े तो यही होने वाला है और दूध से ना आएंगे तो और एक फायदा है साबुन का खर्चा कम दूध से ना आए तो और एक फायदा गंदगी निकल जाती है आप थोड़ा दूध ले लो चेहरे पर लगाओ फिर रुई से चेहरा पूछो एकदम काला काला रोई हो जाता है क्योंकि गंदगी सब निकल आती है उ दूध एक अकेली चीज है पूरी दुनिया में जो लगाने के दो मिनट बाद ही गंदगी को खींच लेता है इसलिए ब्यूटी पार्लर में मिल्क क्लींजिंग होता है सोप क्लींजिंग कहीं नहीं होता तो आप सोचो नहाना दूध से शुरू करो एक दो चम्मच दूध लगता है एक दो चम्मच कच्चा दूध लेकर तेल की तरह से रगड़ लो पानी से नहा लो तो त्वचा एकदम नरम रहती है त्वचा नरम रहेगी तो कोल्ड क्रीम का खर्चा बचेगा पाम ओलिव नहीं लगाना पड़ेगा ओल्ड स्पाइस नहीं लगाना पड़ेगा फेयर एंड लवली नहीं लगाना पड़ेगा वो हजारों करोड़ का खर्चा बचेगा लोग फेयर एंड लवली लगा लगा के परेशान है कहते हैं इससे गोरापन आता है मैंने एक भैंस को 4 साल लगा के देख लिया वो अभी भी काली की काली है दुनिया में ऐसी कोई क्रीम नहीं है जो काले को गोरा बना दे जो काला है काला है जो गोरा है वो गोरा है और जो काला गोरा हो जाता फेयर एंड लवली से तो अफ्रीका वाले तो सब गोरे होते कोई क्रीम काले को गोरा नहीं बना सकते यह तो मूर्ख बनाते हैं वो विज्ञापन और हम कितना खर्चा करते हैं 25 ग्राम फेयर एंड लवली 0 की है 50 ग्राम 80 की 100 ग्राम 160 की एक किलो 00 रप की अब 00 रप किलो की क्रीम लगाते हैं 00 किलो बादाम नहीं खाते क्या मूर्खता है बंद करो यह क्रीम पाउडर लिपस्टिक नेल पॉलिश सब बंद कर दो फालतू का बहुत खर्चा बचेगा फिर आप कहेंगे जी सुंदरता नहीं आएगी सुंदरता गुण कर्म और स्वभाव से आती है क्रीम पाउडर लिपस्टिक से नहीं आती जिसके गुण अच्छे हैं कर्म अच्छे हैं भा अच्छा है वह सबसे ज्यादा सुंदर है यह हमेशा याद रखो और हम किसी को भी याद करते हैं ना तो गुण कर्म स्वभाव पर याद करते हैं सुंदरता से किसी को याद नहीं किया जाता इस देश हम झांसी रानी लक्ष्मीबाई को याद करते हैं इसलिए कि बहुत गोरी थी या कित्तूर नम्मा को इसलिए याद करते हैं कि बड़ी गोरी थी सुंदर थी नहीं उसने काम ऐसा किया देश के लिए इसलिए याद करते कर्म किया गुण उसमें ऐसे थे तो गुण याद रखे जाते कर्म याद रखा कभी कोई आदमी मरता है ना तो ऐसे कोई याद नहीं करता ओ मर गया कितना गोरा था बेचारा मर कोई याद नहीं कर हमेशा याद करते हैं ओ कितना गुणी था देशभक्त था राष्ट्र भक्त था धर्म प्रेमी था मर गया ऐसे याद करते गुण याद होते हैं कर्म याद होते हैं स्वभाव याद होता है सुंदरता याद नहीं रहती क्योंकि सुंदरता क्षणिक है नश्वर है हमेशा नहीं रहती क्यों फस गए इसमें फिर क्रीम पाउडर लिपस्टिक हम तो हिंदुस्तानी लोग कहते हैं आत्मा की सुंदरता की बात है शरीर में कहां फसे तो यह थोड़ा आप बदलने की कोशिश करो बहुत देश का धन बचेगा मैंने एक दिन छोटे छोटे यह हिसाब निकाले तो पता चला कि दो लाख बज करोड़ रुपए हम बचा सकते हैं अगर जिंदगी में एक सूत्र पालन करें सिंपल लिविंग हाई थिंकिंग जीवन सरल हो विचार उच्च से उच्चतम इतने से ही 232 हज करोड़ बचा सकते तो आप बचाने की कोशिश करो अगर आपकी जिंदगी एक जोड़े जूते में चलती है तो दूसरा मत खरीदो तब तक जब तक वह फटे नहीं एक जोड़े चप्पल में जिंदगी चलती है तब तक मत खरीदो जब तक वह फटे नहीं दो शर्ट दो पैट जब तक चल रहे हैं तब तक दूसरा मत बनवाओ जब तक पहला फटे नहीं इस तरह का सोचना अगर हम शुरू कर दें भगवान ने हमें गरीब नहीं बनाया लेकिन हम गरीबी को समझकर सोचकर अपने जीवन में धारण करें ताकि 84 करोड़ हमारे गरीब अमीर हो जाएं समृद्ध शली हो जाए वैभवशाली हमें उनके लिए यह सोचना है आप बस अपने जीवन में करो और भारत का हर महान व्यक्ति यही किया गांधी जी को देखो बैरिस्टर पास एलएलबी एलएलएम सब किया टाई लगाने वाले सूट पहनने वाले कोट पहनने वाले सब छोड़ दिया लंगोटी धारण कर लिया उसी दिन से देश ने उनको महात्मा कहना शुरू कर दिया श्रीराम ने घर छोड़ दिया महल छोड़ दिया सुख छोड़ दिया सुविधाएं छोड़ दी वन में चले गए कष्ट झेलना शुरू किया तभी उनको मर्यादा पुरुषोत्तम कहना हमने शुरू किया महावीर ने जब अपना घर छोड़ा परिवार छोड़ा वैभव छोड़ा संसार छोड़ा तो हमने उसको तीर्थंकर कहना शुरू कर दिया भगवान मान गौतम बुद्ध ने जब सब कुछ छोड़ा महल सुख सुविधाएं तब उनको महात्मा कहा गया इस देश में जिसने जितना ज्यादा त्याग किया वह उतने ही ऊंचे सिंहासन पर बैठा यही हमारी परंपरा है भोग करना हमारी परंपरा नहीं त्याग करना और त्याग करना तो के लिए समाज के लिए अपने भाई बांधव के लिए यह सोचकर अगर हम अपने जीवन को फिर से रीडिजाइन करें तो बहुत लाभ इस देश को होता है और एक छोटी सी बात और कि आप कुछ अपने जीवन में ऐसा करो खर्चा और कम हो सकता बीमार पड़ना बंद कर दो बहुत खर्चा बचे हर साल हम साढ़े लाख करोड़ रुपए खर्च करते हैं बीमारियों के इलाज पर और इलाज नहीं हो पाता कोई बीमारी ठीक नहीं हो रही ना ब्लड प्रेशर ठीक हो रहा है ना डायबिटीज ठीक हो रही है ना हार्ट अटैक ना कार्डियक अरेस ना ब्रेन एमरे एक भी बीमारी ठीक नहीं हो रही 65 लाख करोड़ खर्च कर रहे हैं हर साल तो रास्ता क्या है बीमार पड़ना बंद करो तभी बीमारी ठीक होगी बीमार पड़कर इलाज करें और पैसा खर्च करें यह तो मूर्खता है बीमार ना पड़े तो क्या करें थोड़ा योग कर लो थोड़ा प्राणायाम कर लो स्वामी रामदेव जी रोज सवेरे फोकट में सिखाते हैं पाच से 6:30 रास्ता चैनल प कोई पैसा नहीं लगता कोई फीस नहीं लगता शुरू करो चालू हो जाओ थोड़ा वस्त्रिका कर लिया थोड़ा कपाल भाती कर लिया थोड़ा अनुलोम विलोम कर लिया थोड़ा उदगी कर लिया थोड़ा प्रणव कर लिया छह सात प्राणायाम वो बताते हैं वह आप ध्यान से कर लो आधा पौना घंटे ही रोज कर लो तो आपका ब्लड प्रेशर आपका डायबिटीज आपका अर्थराइटिस ऐसी बीसीओ नहीं पचास नहीं सैकड़ों बीमारियों से आप बचेंगे और दूसरों को करवा दो इसके लिए क्लास चलती है योग कक्षाएं चलती हैं यहां होशंगाबाद में भी होती होंगी यहां भी योग शिक्षक हैं उनके शरण में चले जाओ उनको बुलाओ वह सिखाएंगे आप सीख लो उनके पास जाकर यह सब निशुल्क है इसमें कोई फीस नहीं लगती यह सारे हमारे पदाधिकारी पहले योग शिक्षक हैं बाद में पदाधिकारी हैं यह सब कक्षाएं लेते हैं सब सिखाते हैं प्राणायाम हमारे यहां नियम ही है कि पदाधिकारी वही हो सकता है जो खुद सीखा हुआ हो और दूसरों को सिखाता तो आप इनसे कभी भी सीख सकते और खुद कर सकते हैं महीने में कुछ स्पेशल क्लास भी यह लोग आपकी करा सकते हैं चार दिन पांच दिन महीने में और सामान्य कक्षाएं तो रोज चल सकती हैं तो योग प्राणायाम से आप स्वस्थ रहना सीख लो और थोड़ा आयुर्वेद के मोटे मोटे कुछ नियम अपने जीवन में आप जान लो तो बीमारियां आएंगी ही नहीं आयुर्वेद में एक बड़े महान व्यक्ति हुए उनका नाम था बाग भट्ट जैसे चरक थे ना सुश्रुत वैसे ही भागवत उन्होंने कुछ नियम बनाए और उनका यह कहना है कि जो व्यक्ति इन नियमों का पालन करे बीमार नहीं पड़ सकता आप उन नियमों का पालन कर लो बहुत आसान नियम है महर्षि भागवत कहते हैं बात पित्त कफ तीनों को संतुलित रखो तो बीमारी आएगी नहीं बस इ इतनी सी बात है अब वात पित्त कफ को संतुलित रखने के लिए क्या-क्या करें तीन चार उनके छोटे छोटे नियम अगर कर लो तो बहुत अच्छा है उनका पहला नियम है कि खाना खाने के तुरंत बाद पानी मत पियो पानी एक से डेढ़ घंटे के बाद पियो क्योंकि जैसे ही हम खाना खाते हैं ना पेट में अग्नि जलती है उसको जठर अग्नि कहते हैं वही खाने को पचा है अब आप खाना खाते ही पानी पी लेते हैं तो व अग्नि शांत हो जाती है फिर खाने के पचने का काम बंद हो जाता है फिर खाना सड़ता है और सड़ा हुआ खाना 100 से ज्यादा रोग पैदा करता है इसलिए कहा गया भोजना विषम वारी भोजन के अंत में पानी जहर के जैसा है मत पियो एक डेढ़ घंटे बाद दूसरा उनका नियम है पानी घूंट घूट भर के पियो एक एक सिप क्यों मुंह की लार है ना वह पूरी पानी में मिलकर अंदर जानी चाहिए क्योंकि यह मु की लार ना यह क्षारीय है और पेट में अम्ल बनता है क्षार और अम्ल अगर मिलता रहे तो न्यूट्रल कर देता है एक दूसरे को तो पेट न्यूट्रल रहे तो जिंदगी में बीमारी नहीं आती इसलिए पानी घूंट घूंट पियो एक एक सिप करके आप पशुओं को देखो पक्षियों को देखो एक एक घूंट पानी पीते चिड़िया को देखो पानी पीते हुए एक एक ड्रॉप पानी का उठाती है एक बूंद फिर ऐसे ऐसे मुंह चलाती है फिर पीती है सभी जानवरों को देखो कुत्ता पानी चाट चाट के पीता है शेर चीता लकड़ भग्गा यह सब पानी को सिप करके पीते और किसी चिड़िया को आपने ओवर वेट नहीं देखा होगा किसी जानवर को डायबिटीज नहीं है कोई ओवर वेट नहीं है क्यों सब सिप करके पानी पीते मनुष्य है जो गटागट गटागट गटागट पीता है और वजन के लिए डायबिटीज के लिए परेशान है अर्थराइटिस से परेशान आप पानी सिप सिप पीने लगो बहुत फायदा है इसका इतना फायदा है कि आप सोच नहीं सकते तो पहला नियम है खाने के एक डेढ़ घंटे बाद पानी पियो दूसरा नियम पानी घूट घूट पियो तीसरा नियम है वाग भट्ट जी का सवेरे सोकर उठो तो सबसे पहले पानी पियो दिन की शुरुआत पानी से करो बिना मुंह धोए पानी पियो बिना कुल्ला किए पानी पियो रात की मुंह की लार जो जमा हो गई ना वह सब पेट में लेकर जाओ थू को मत क्योंकि वह बहुत कीमती है सुबह-सुबह क्या होता है पेट खाली होता है तो उस समय एसिड सबसे ज्यादा पेट में बनता है तो मुंह की लार पेट में जाए तो उसको शांत करती है इसलिए उठते ही पानी पियो कम से कम दो-तीन गिलास फिर उसके बाद टॉयलेट में जाओ चौथा नियम है ठंडा पानी कभी मत पियो गलती से भी मत पीना कितनी भी प्यास लगे तेज गला सूखता हो ठंडा नहीं पीना सादा पानी पीना या गुनगुना पीना क्यों ठंडा पानी पीते ही सारी गड़बड़ होती है पेट तो गर्म है पानी तो ठंडा है गर्म पेट में ठंडा पानी डालेंगे तो पेट पानी को गर्म करेगा नहीं तो आप मर जाएंगे पानी अगर पेट में ठंडा बना रहे 3 मिनट तक तो लीवर किडनी सारे फंक्शन बंद कर देते हैं क्योंकि लीवर और किडनी को फंक्शन करने के लिए गर्मी चाहिए ठंडा पन नहीं चाहिए हार्ट फंक्शन बंद कर देता है तो तीन मिनट में वह पानी को गर्म करना पड़ता है पेट को और पानी गर्म करने के लिए ऊर्जा चाहिए गर्मी चाहिए गर्मी कहां से आएगी खून में से तो सारे शरीर का खून पानी को गर्म करने में लग जाता है तो न मिनट तक शरीर के सभी अंगों में खून की कमी आ जाती है और एक दिन में 10 गिलास आपने ठंडा पानी पिया तो 3 मिनट के हिसाब से सोचो 30 मिनट और एक साल में हजारों गिलास पानी पी पिया तो सोचो कोई अंग हमेशा के लिए आपका खत्म हो जाएगा अगर ब्लड की कमी ज्यादा हो गई तो फिर बदल नहीं पाएंगे उसको लीवर खराब हो गया तो ट्रांसप्लांट करने में 15 लाख का खर्चा है किडनी खराब हो जाए तो ढाई तीन लाख का खर्चा हार्ट खराब हो जाए तो सात आ लाख का खर्चा क्यों आप रिस्क ले रहे हैं मत पियो ठंडा पानी फ्रिज में पानी रखना बंद कर दो फ्रिज पानी रखने के लिए नहीं है दवा रखने के लिए तो आप मत पियो दूसरे को मत पिलाओ हमेशा सादा पानी पियो गुनगुना पानी पियो सर्दियों में तो बहुत अच्छा है गर्मियों में मिट्टी के घड़े का पी सकते हैं बारिश में तो पानी को उबाल कर ही पीना सबसे अच्छा जॉन्डिस से भी बचे तो यह छोटे-छोटे नियम है खाने के एक घंटे बाद पानी पीना पानी घूंट घूट पीना सवेरे उठते ही पहले पानी पीना ठंडा पानी कभी नहीं पीना पानी को हमेशा बैठ के पी खड़े खड़े नहीं खड़े-खड़े पिया हुआ पानी सब अर्थराइटिस का तकलीफ बढ़ाता है घुटने का दर्द कमर का दर्द हमेशा बैठ के पीना ऐसे ही खाना खाओ तो खाने को इतना चबा जितने आपके दांत 32 दांत है तो 32 बार चबा रोटी का टुकड़ा मुंह में रख के 32 बार चबा लार के साथ घुल के पानी जैसा होकर अंदर जाएगा बहुत अच्छी जिंदगी में सेहत रहेगी आपकी खूब चबा के खाना और एक दो छोटी-छोटी बातें कि खाना खाते समय दो चीजें ऐसी साथ में ना हो जो एक दूसरे की विरोधी है जैसे दूध और दही साथ में नहीं हो प्याज खाना है तो दूध मत खाओ दही खाना है तो प्याज नहीं होना चाहिए दही में नमक डाल के मत खाओ मीठी चीज डाल के खाओ नहीं तो सादा दही खाओ दही में नमक डालना माने दही का सत्यानाश करना दही जो है ना छोटे-छोटे जीवाणुओं का घर है लैक्टो बैक्टीरिया सबसे ज्यादा दही में है वह जीवित चाहिए शरीर को जैसे ही एक चुटकी नमक डालते हैं सब मर जाते हैं फिर दही खा रहे हैं तो जीवाणुओं की लाश खा रहे इसलिए आयुर्वेद कहता दही में कभी भी नमक नहीं डाल के खाना बुरा डाल के खा सकते हैं मिठाई डाल के खा सकते हैं नमक नहीं और नमक डालने की कोई मजबूरी हो तो सदा नमक डाले काला नमक सादा नमक नहीं तो ऐसी छोटी-छोटी बातें अगर हम हमारे जीवन में पालन करते हैं तो बीमारी आती नहीं तो खर्चा बच है तो देश की आमदनी बढ़ती है तो यह एक रास्ता है देश को बेहतर बनाने का अपने जीवन को सुखी बनाए हमारे देश में ही यह कहा जाता है सर्वे भवंतु सुखिन सर्वे संतु निरामया सर्वे भद्राणि पश्यंतु मा कश दुख भाग सब सुखी हो सब निरोगी हो यह भारत में ही है प्रार्थना और कहीं नहीं तो इस प्रार्थना को हम हमारे जीवन में उतारे हम सुखी बने दूसरों को सुखी बनाए यह छोटी-छोटी ज्ञान की बातें आपने सीखी दूसरों को सिखाएं सारे देश में घर-घर में गली-गली गांव-गांव यह जानकारी लोगों तक पहुंचाए यह एक बड़ा काम और आप कर सकते हैं व्यक्तिगत रूप से तो यह मेरी आपसे व्यक्तिगत अपील है कि थोड़ा जीवन बदलिए सिंपल लिविंग एंड हाई थिंकिंग में जाइए फालतू खर्चे मत करिए और जो काम करने से देश का पैसा बेकार होता हो विदेश में जाता हो तो बिल्कुल मत करिए माने विदेशी वस्तु गलती से भी मत खरी आपको स्वामी जी बार-बार कहते हैं टीवी में आता रहता है कि एक भी विदेशी वस्तु आपने खरीदी तो देश का पैसा गया और वह पैसा फिर आएगा नहीं वापस देश में उसने पैसे की कमी जिंदगी भर रहेगी इसलिए आप अपने जीवन में एक स्वदेशी वस्तुओं के अपनाने का सिद्धांत अब आप यह पूछोगे पता कैसे चलेगा कौन सी वस्तु विदेशी कौन सी स्वदेशी उसके लिए एक पत्रक बनाया है जीवन दर्शन एक पुस्तक है उसमें पीछे छपा हुआ है आप ले सकते हैं योग समिति वाले आपको दे सकते हैं छाप के अलग से भी दे सकते हैं वह जानकारी आपको हो जाएगी बस मन में संकल्प आप करें तो यह छोटे-छोटे कुछ संकल्प आप करें देश के लिए समाज के लिए यह निवेदन करने आया इतनी देर मैंने आपसे यह सब बातें की आपने बड़े ध्यान से सुनी मैं आपका आभारी हूं आप इन बातों को दूसरों को सुनाएंगे और भी आभारी रहूंगा अब मेरी बातों पर अगर आपके मन में कोई प्रश्न आता हो कोई जिज्ञासा होती हो तो आप जरूर पूछे मैं उत्तर देने की कोशिश करूंगा मेरी एक ही विनम्र प्रार्थना है कि अगर हम सब बैठे हैं यहां एक साथ तो प्रश्न पूछे एकएक उठक जाने लगे तो फिर प्रश्न करना ठीक नहीं होगा तो आप सब बैठेंगे मैं भी बैठूंगा प्रश्न करना है तो साथ में सुने हो सकता है वह प्रश्न आपके भी काम आ जाए आपके जीवन में देश में जो काला धन है से चोरी का ब उसके लिए भी अपने पास योजना हां पीछे से प्रश्न आया है वो यह है कि अपने देश में जो काला धन है जिसकी मात्रा मैंने बताई ना 36 लाख करोड़ का इसके लिए कोई योजना है हां इसके लिए योजना यह है कि इस काले धन को सफेद बनाना है और इसको सफेद बनाने का एक ही मिनट का काम है कि आप इनकम टैक्स कानून को जिस दिन रद्द कर देंगे यह सारा काला धन अपने आप सफेद हो जाएगा और यह 36 लाख करोड़ कहीं छुपा हुआ रखा है लोग के घरों में यह अपने आप बाहर आ जाएगा या तो लोग उसे बैंक में जमा कर देंगे या तो उसको कारखाने लगाने में उद्योग लगाने में इस्तेमाल करेंगे या उस पैसे का खर्चा करेंगे तीनों ही स्थिति में यह पैसा इकॉनमी में घूमेगा अर्थव्यवस्था में आ जाएगा अब 3 लाख करोड़ रुपए अगर अर्थव्यवस्था में आता है तो इससे तो कितनी प्रोडक्टिविटी हम बढ़ा सकते हैं पूरे देश की तो काला धन जो पहले से तैयार है जमा पड़ा है इसको भी बाहर निकालना है इसी के लिए इनकम टैक्स एक्ट में बड़ा संशोधन और फेर बदल करवाना वह एक बड़ी योजना है उसकी भी कोशिश हमारी चल रही और कोई प्रश्न भारत स्वाभिमान अभियान यह कर रहा है कि जो शिक्षा व्यवस्था हमारी इस समय है वह अंग्रेजों की है मैले नाम का एक अंग्रेज आया उसने शिक्षा का पाठ्यक्रम बनाया उसके आधार पर स्कूल चलते हैं सारे के सारे हम उस पाठ्यक्रम को बदलना चाहते हैं नया पाठ्यक्रम लाना चाहते हैं उसके लिए एक स्वदेशी शिक्षा का मॉडल हम बना रहे हैं और उसमें गुरुकु की व्यवस्था शुरू करने फिर से जा रहे पहले जो गुरुकुल हमारे यहां होते थे उनकी विशेषता सबसे बड़ी यह थी कि वह निशुल्क होते थे माने शिक्षा सभी के लिए उपलब्ध होती थी वह गरीब हो या अमीर हो आपको मालूम है श्री कृष्ण और सुदामा एक ही जगह पढ़ते थे सुदामा के पास तो पैसे ही नहीं थे कृष्ण तो करोड़पति थे करोड़पति का बेटा या रोडपति का सब एक साथ पढ़ते थे क्योंकि फीस नहीं लगती थी तो शिक्षा तो निशुल्क की होनी चाहिए दूसरा उस शिक्षा में जो ज्ञान होता था वह ऐसा होता था जो जीवन के काम का अभी जो शिक्षा है इसमें ज्ञान ऐसा है जो जिंदगी में कभी काम नहीं आता जैसे मैं खुद मेरे से प्रश्न करता हूं मैंने गणित पढ़ा मॉडर्न अलजेब्रा पढ़ा उसमें x प्वा स्क्वा पढ़ा x माइवाल स्क्वा पढ़ा x प्वा क्यूब पढ़ा x माइवाल क्यूब पढ़ा खूब पढ़ा खूब रटा इम्तिहान में लिखा नंबर भी लाया लेकिन वह आज तक मेरी जिंदगी में काम नहीं आया एक भी दिन काम नहीं आया x प्वा स् जब काम नहीं आया तो क्यों पढ़ा मैंने मेरे टीचर कहते हैं काम उनको भी नहीं आया लेकिन उन्होंने मुझे पढ़ाया क्योंकि उनको किसी ने पढ़ाया तो यह भेड़िया धसान क्यों चलाना तो जो ज्ञान काम नहीं आता उसको पूरा हटा देना ही अच्छा है वो बोझा है और जो हमें याद नहीं रहता वह भी हटा देना अच्छा है हमें बहुत सारी चीजें याद नहीं है हमारी पढ़ाई की क्योंकि वह काम की नहीं है इसलिए याद नहीं है जो चीजें रोज काम आती है वो याद रहती है जो रोज काम नहीं आती वो बेकार है तो जो याद नहीं रहने वाला वो हटा दे जो काम नहीं है वो हटा द परिणाम जानते हैं क्या होगा 12वीं तक की शिक्षा किसी भी विद्यार्थी को दो-तीन साल में ही मिल जाएगी उसका समय बच जाएगा उसका नॉलेज बढ़ जाएगा और फिर प्रोफेशनल एजुकेशन में भी हम यही कर सकते हैं इंजीनियरिंग और मेडिकल साइंस में तो यह हम करना चाहते हैं और हम क्या करना चाहते हैं सारी शिक्षा मातृभाषा में या स्थानीय भाषा में मराठी तमिल तेलुगु मलयालम कन्नड़ गुजराती उड़िया आसामी या हिंदी इनमें पूरी पढ़ाई हो अंग्रेजी बिल्कुल खत्म हो अंग्रेजी किसी को सीखनी है भाषा के रूप में तो सीखे जिनको विदेश जाना है विदेश व्यापार करना है वो अंग्रेजी सीखे सबको मार मार के अंग्रेजी क्यों सिखाना उससे उसका दिमाग कुंठित होता है हमारे देश में पता है बहुत प्रतिभाशाली बच्चे हैं लेकिन अंग्रेजी में हमेशा फेल होते हैं इसलिए आगे नहीं बढ़ पाते उनका गणित अच्छा है उनका फिजिक्स अच्छा उनका केमिस्ट्री अच्छा अंग्रेजी खराब है और अंग्रेजी खराब होने में हैरानी क्या है क्योंकि अंग्रेजी हमारी भाषा नहीं है खराब तो होनी चाहिए हमें अंग्रेजी क्यों आनी चाहिए इंग्लैंड में किसको हिंदी आती है जो हमें अंग्रेजी आनी चाहिए जब वह हिंदी सीखने के लिए परेशान नहीं है तो हम अंग्रेजी सीखने के लिए क्यों मारामारी कर रहे और हम ऐसे मूर्ख लोग हैं जो अंग्रेजी का बाजा बजाते र हमेशा अंग्रेजी राष्ट्र भाषा अंग्रेजी अंतरराष्ट्रीय भाषा दुनिया में 200 देश हैं सबका मैंने पता कर लिया सिर्फ 14 देशों में अंग्रेजी चलती है बाकी कहीं नहीं चलती फ्रांस में फ्रेंच चलती है जर्मनी में जर्मन चलती है स्वीडन में स्वीडिश चलती है डेनमार्क में डेनिस चलती है रूस में रशियन चलती है जापान में जापानीज चलती है चीन में चाइनीज चलती है सब देशों की अपनी भाषाओं में शिक्षा होती है भारत में ही अंग्रेजी चलती है और ऐसी मूर्खतापूर्ण भाषा जिसका कोई और कु छोर नहीं है प्यूटी पुट तो ब्यूटी बुट और ब्यूटी बट तो प्यूटी पट सी यूटी कट ब्यूटी बट तो प्यूटी पट होना चाहिए कि नहीं और अगर प्यूटी पुट है तो ब्यूटी बुट सी यूटी कुट होना चाहिए क्या मूर्खता पूर्ण भाषा है अंग्रेजी में लिखते हैं चोपड़ा सी एच ओ पी ए आर ए चोपड़ा लिखते हैं ना अच्छा कहीं पर सी एच चोपड़ा कर देते हैं कहीं सीच कोपड़ कर देते अब कहां कर देते केमिस्ट्री लिखते हैं तो सी एच ई एम आई एस टी आर वाई वहां सी एच है यहां सीच है यहां चोपड़ा हो गया वहां केमिस्ट्री क्यों नहीं है और अगर वहां केमिस्ट्री है तो यहां कोपड़ क्यों नहीं है कोई जवाब है मूर्खता पूर्ण भाषा जिसका जिसका कोई ग्रामर नहीं है उधार लिया हुआ सारी दुनिया से शब्द नहीं है उनके पास सब उधार लिया हुआ है शब्दों की इतनी कमी है अंग्रेजी में एक शब्द है अंकल ले दे के चाचा हो मामा हो मौसा हो फूपा हो ताऊ हो सब अंकल हमारे यहां हो सकते हैं चाची हो ताई हो मामी हो मौसी हो सब आंटी क्योंकि शब्द ही नहीं है जिस भाषा में शब्दों का इतना अकाल हो उसको हम कहे कि बड़ी अच्छी भाषा है हमारे पास हर बात के लिए एक खास शब्द है उनके पास है ही नहीं और अंग्रेजी के मूल शब्द तो बहुत कम है लैटिन से उधार ले लिए फ्रेंच से उधार ले लिए जर्मन से ले लिए फिर रशियन से ले लिए फिर इनसे ले लिए खिचड़ी बना लिया उन्होंने अपना हम उसको बावा करते रहते इसमें मत फस और अंग्रेजी के कुछ शब्द तो इतने खराब है जिनको हम जानते नहीं बोलते रहते हैं फालतू में हमारे देश में अध कचरे लोग बहुत है अध कचरे लोग पता है कैसे पिताजी हैं राम दयाल माता जी है गायत्री देवी बेटा है टिंकू अब रामदयाल और गायत्री देवी का टिंकू कहां से आया अब उनसे मैं पूछता हूं भाई आपने इसका नाम टिंकू क्यों रखा कुछ मालूम नहीं फिर उनको दिखाता हूं कि देखो टिंकू का अर्थ होता है आवारा लड़का अंग्रेजी में टिंकू उसको कहते हैं जो आवारा हो बाप की ना सुने मां की ना सुने आप अपने अच्छे खासे बच्चे को टिंकू टिंकू बोल बोल के आवारा करना चाहते हैं नाम रखे हुए बबली डबली डिंक टंपल पपल पता नहीं क्या क्या नाम कुछ मतलब नहीं जिन नामों का उनको रख के क्यों अपना दिमाग खराब बच्चों का करते खराब और कुछ कुछ लोग तो ऐसे विचित्र हैं कभी मैं उनसे मिलता हूं अकच रे लोग कैसे ना तो अंग्रेज हुए ना हिंदुस्तानी रह गए बीच के रह गए त्रिश को हां वो कभी मिलेंगे कहेंगे राजीव दीक्षित शी इज माय मिसेस मैं कता शी र मिसेस क्योंकि उनको मिसेस का मतलब नहीं मालूम मिसेस का मतलब जानते मिसेस का मतलब होता है धर्म पत्नी को छोड़कर कोई भी स्त्री वह मिसेस होती है और यहां धर्म पत्नी को मिसेस बनाने में सब लगे र ऐसे ही बोलते हैं ही इज माय मिस्टर तो पूछता रियली पति को छोड़कर कोई भी पुरुष मिस्टर होता है और सबसे खराब अंग्रेजी का शब्द है मैडम यह अंग्रेजी का तो है नहीं यह फ्रेंच का शब्द है फ्रेंच में शब्द है मा दम एम ए मा डी ए एम ई दाम मां माने मेरा या मेरी दाम माने महिला स्त्री लड़की मां दाम मेरी महिला मेरी स्त्री मेरी जो भी कुछ है वह आपकी है तो सब हो सकती है क्या आपकी मैडम मैडम मैडम जिसको देखो उसको मैडम आप कहते रहते हो क्या मूर्खता आप सब कर यह सब बंद करो यह मैडम कहना मिस्टर कहना मिसेस कहना बंद करो मालूम ही नहीं है आपको आप बगते जाते हैं कहते जाते हैं मुझे तो इतनी खुंदक होती है कि कोई महिला अपने को मैडम कहलवान है उनको मैडम का अर्थ क्या है और यह तो बहुत ही खराब शब्द है जैसे अंग्रेजी में हेड मास्टर हेड मिस्ट्रेस आप तो सुन नहीं पाएंगे उनकी डेफिनेशन जो है मैं थोड़ी अंग्रेजी और अमेरिकी सभ्यता पर बहुत काम कर रहा हूं रिसर्च बहुत किया है हर शब्द का एक इतिहास है अंग्रेजी में मिस्टर शब्द कहां से आया मिसेस कहां से आया मैडम कहां से आया इसका अपना पूरा हिस्ट्री है अगर वह जान ले तब इस्तेमाल करें तब तो समझ में आता है बिना जाने बुझे हम इस्तेमाल करते बंद कर करिए ये सब इसमें कोई शान की बात नहीं है श्रीमान श्रीमान कहिए श्रीमती क श्रीमती कितना सुंदर शब्द है श्री माने लक्ष्मी मति माने बुद्धि लक्ष्मी और सरस्वती माने बुद्धि और लक्ष्मी जहां एक साथ हो वो श्रीमती वो मिसेस नहीं है दोनों अलग-अलग चीज है तो गर्व करिए अपनी भाषा पर भाव रखिए अपनी भाषा जो व्यक्ति अपनी भाषा पर गर्व नहीं कर सकता वो किस पर करेगा भाषा भूषा भोजन भजन भेषज यह सब गर्व करने की चीज है अंग्रेजी में यह नहीं मिलेगा आपको अंग्रेजी सीखिए भाषा के रूप में उसमें बुराई नहीं है लेकिन उसको जीवन में ओड़िए और बिछाए मत कभी दूर रखिए थोड़ा जबरदस्ती किसी पर रोब झाड़ने के लिए अंग्रेजी बोलने लगे वोह बहुत खराब आप उसका अपमान कर रहे हैं तो यह कुछ बातें ध्यान रखिए हम चाहते हैं भारत स्वाभिमान की शिक्षा व्यवस्था ऐसी जिसमें अंग्रेजी की जरूरत ना पड़े मातृभाषा में सारी पढ़ाई हो पाठ्यक्रम हमारा अपना हो मैकौले वाला पाठ्यक्रम हम हटा दें गुरुकुल पद्धति फिर से आए जहां शिक्षा निशुल्क मिले क्या करोड़पति क्या रोडपति और विद्यार्थियों को जो पढ़ाया जाए वह ऐसा हो जो उनके जीवन में काम आए जो जीवन में काम नहीं आता वह पढ़ाने का कोई फायदा उसके लिए हम एक अभ्यासक्रम बना रहे हैं बहुत जल्दी तैयार हो जाएगा आपको मैं दे दूंगा आपकी इच्छा हो तो उस अभ्यासक्रम को आधार बना के यहां होशंगाबाद में भी गुरुकुल शुरू कर सकते हैं एक नहीं 10 कर सकते हैं उसके लिए पहले शिक्षकों को तैयार करेंगे जैसे अभी हम योग शिक्षक तैयार करा रहे हैं वैसे ही इन गुरुकुल के लिए शिक्षक तैयार करेंगे उनके भी प्रशिक्षण शिविर होंगे आप चाहे तो अपना गुरुकुल चला सकते हैं समूह में चला सकते हैं पू शिक्षा व्यवस्था को हम बदलना चाहते हैं और इस शिक्षा व्यवस्था में इम्तिहान नहीं होगा परीक्षा नहीं होगी क्योंकि ज्ञान की परीक्षा नहीं ली जा सकती ज्ञान असीमित है कोई परीक्षा नहीं ले सकता उसकी ज्ञान तो सीखना और सिखाने का काम होता है हमारे गुरुकुल चला करते थे कोई परीक्षा नहीं होती थी उ और सर्टिफिकेट के लिए कोई कुछ नहीं करता था ज्ञान के लिए सारा होता तो हम चाहते हैं कि वह शिक्षा पद्धति आए उसके लिए हमारी कोशिश है कि अलग से बोर्ड बने इस देश में जैसे एक सीबीएससी बोर्ड है आईसीएससी बोर्ड है ऐसे ही हम अपना अलग बोर्ड बनाएंगे उसके नीचे सब गुरुकुल चलाएंगे और उनकी मान्यता वहीं से होगी तो अभी एक पतंजलि विश्वविद्यालय तो बन ही रहा है थोड़े दिन में तैयार हो जाएगा उसके नीचे यह सब काम चलेगा तो आपकी इच्छा होगी तो आप भी इसमें जुड़ पाएंगे यह बहुत बड़ा अभियान होगा जैसे योग और प्राणायाम का है ना वैसे ही शिक्षा के स्वदेशी करण का अभियान लगभग दो साल में शुरू होगा बहुत बड़ा अभियान होने जा रहा क्योंकि शिक्षा अगर नहीं बदलेगी तो नया भारत नहीं बनेगा मूल से जड़ से तो हमें करना ही पड़ेगा तो वह भी कोशिश है अब इस विषय पर अगर मैं व्याख्यान देता हूं तो तीन घंटे लगता है आपने प्रश्न पूछा तो मैंने संक्षेप में बताया अगर आपकी इच्छा हो तो संपर्क कर सकते हैं मेल कर सकते हैं पत्र डाल सकते हैं फोन कर सकते जी आपने अभी कहा था वोट देकर ट का लाइसेंस तो क्या अपने वोट का अधिकार का इस्तेमाल या उपयोग नहीं करें नहीं जरूर करें बस यह चेतना के साथ करें ध्यान के साथ करें कि हमारा वोट कितना कीमती है आपका एक वोट किसी को 6 144000 करोड़ रुपए लूटने का लाइसेंस दे देता है इसको ध्यान रखें हम हमारे वोट का इस्तेमाल करते हुए यह ध्यान नहीं रखते हम चुपचाप जाते हैं और बिना किसी कदर के देकर चले आते हैं सोचते नहीं विचार से नहीं कि जिस व्यक्ति को हमने दिया है वह इस लायक है भी या नहीं भी क्योंकि हम यह विचार नहीं करते इसलिए गुंडे बदमाश चोर उचक्के लुचे लफंगे मवाली जीत के पार्लियामेंट में पहुंच जाते बड़े-बड़े हिस्ट्री शीटर पार्लिमेंट में पहुंचे हुए जिनके ऊपर बलात्कार के मुकदमे चल रहे हैं मर्डर के केस चल रहे हैं वह पार्लिमेंट में पहुंचे हुए यह हमारी बेकद्र का नतीजा है तो हम ध्यान रखें वोट देते समय कि यह कितना ना कीमती है मेरा यह कहने का मतलब है आप वोट जरूर करें बिना वोट करे नहीं रहे लेकिन जिसको वोट दे रहे हैं वह आपके वोट का पात्र है या नहीं इसको जरूर ध्यान में रखें उसका चरित्र कैसा है चाल चलन कैसा है देशभक्ति कितनी है राष्ट्रभक्ति कितनी है किस लिए वह जा रहा है संसद और विधानसभा में यह सब चीजें आपकी ध्यान में होनी चाहिए उनको देखकर वोट करें और मैं आपसे स्पष्ट कहना चाहता हूं खुल के पार्टी को कभी भी वोट ना करें प्रत्याशी को वोट करें हमारे यहां क्या होता है ना पार्टी एक साथ टिकट बांट देती है चोर उचक्के लुचे लफंगे गुंडों को और एक पार्टी ने गुंडों को दिया दूसरी उससे बड़े गुंडे को देती है क्योंकि गुंडा ही गुंडे को टक्कर दे सकता है ये उनके तर्क है कुतर्क हां व्यक्ति को वोट दें नहीं दोन गुंडे हां तो तीसरा अपना खड़ा करें अगर आपके यहां ऐसी मजबूरी आ जाए कि दो गुंडे हैं बड़े-बड़े तो तीसरा अपना प्रत्याशी खड़ा करें यह मेरा कहना जो चरित्रवान है जो आपके वोट की कदर कर सकता है जो देश और समाज के लिए काम कर सकता उसको आप खड़ा करें और जिता के विधानसभा या लोकसभा में पहुंचाए पार्टियों के खड़े कियो हो को हराए ध्वस्त करें उनको क्योंकि पार्टियां कई बार इतने घमंड और गुरूर में होती है वह क्या सोचते हैं हमने खड़ा कर दिया जीतने ही वाला है अभी इनका यह घमंड तो तोड़ ही देना है कि तुमने खड़ा किया हुआ हमेशा जीतेगा गारंटी नहीं है लोगों ने खड़ा किया हुआ भी जीत सकता है और ऐसा मध्य प्रदेश में हुआ है मुझे सुनाई दिया रतलाम में हुआ है बड़े-बड़े दिग्गजों को धराशाई कर दिया लोगों ने तो अगर यह एक जगह हो सकता तो सब जगह होना चाहिए यह चुनाव में खड़े होने वाले प्रत्याशियों को बड़ा घमंड है बड़ा गुरुर है कि मैं तो जीत के ही आने वाला हूं मुझे कौन हराने वाला है मैंने यहां मैनेज किया है मैंने वहां इनका ंड और गुरुर तो टूटना बहुत जरूरी है नहीं तो यह बहुत खतरनाक होता है यही घमंड और गुरुर पूरे देश को इमरजेंसी तक लेकर चला जाता है जिसमें सारे अधिकार लोगों के खत्म करने पड़ते हैं यही घमंड हो गया था श्रीमती गांधी को कि मेरी सत्ता को कौन चुनौती दे सकता मैं तो सर्वे सर्वा इस देश की और वह काले दिन उन्होंने दिखाए इस देश को जो भगवान ना करें दोबारा देखने पड़े इसी देश की जनता ने उनका घमंड तोड़ा था गुरु तोड़ा था जो गांधी श्रीमती गांधी हारती नहीं थी कहीं से चुनाव उनको पानी पिला दिया था उनकी जमानत जप्त हो गई थी इस देश में आपको मालूम है तो इस देश की जनता में उतनी चेतना और उतना विश्वास हमेशा रहना चाहिए कि कोई सिर चढ़ के ना बैठ जाए वह आपका प्रतिनिधि है मालिक नहीं है वह आपका सेवक है नौकर है वह मास्टर नहीं है इस देश का उसको उसकी जगह दिखा के रखो हमने इनको बहुत ज्यादा सिर चढ़ा लिया है अपने जनप्रतिनिधियों को हर बड़े छोटे काम में हम लेकर पहुंच जाते हैं आओ नेता जी आओ नेता जी हमारा यह उद्घाटन हमारा वो क्या दिमाग खराब कर रखा है आपने वो इस काम के लिए थोड़ी है जो आपका उद्घाटन करते फिरे हैं वो कानून बनाने के लिए भेजे गए हैं विधायिका में लोकसभा में वही काम करने देना चाहिए हरी झंडी हला रहे हैं जैसे कोई गार्ड खड़ा हो गया ट्रेन का उद्घाटन इसका उद्घाटन कहीं मृत्यु देने वाला जो शमशान है वहां भी उद्घाटन करने पहुंच जाते हैं नल का उद्घाटन मैंने मजाक बना दिया पूरी लोकसभा पूरी विधानसभा को हर छोटे बड़े काम में होटल का उद्घाटन करने पहुंच गए किसी कहीं ऐसी स्थिति हमने बना रखी है क्यों दिमाग खराब किया हमारे पास क्या विद्वानों की कमी हो गई है जो उद्घाटन करने को हमें नहीं मिलते या हमारे पास अच्छे लोगों की कोई कमी हो गई है अपने जीवन में थोड़े परिवर्तन लाइए इनको इनकी जगह रहने दीजिए देखिए पॉलिटिक्स बहुत जरूरी है लेकिन कितनी जरूरी है एक मेरा सूत्र है इस पर आप हंसिए मत चिंतन करिए विचार करिए हमारा पूरा घर होता है ना उसमें एक टॉयलेट होता है एक टॉयलेट के बराबर पूरी पॉलिटिक्स है बस वो पूरा घर नहीं है टॉयलेट में जाते हैं क्योंकि बिना जाए काम नहीं चलता उतना ही है पॉलिटिक्स इससे ज्यादा नहीं है हमने इसको पूरा घर बना दिया है हमारे घर का पूजा घर हमारे घर का रसोई घर हमारे घर का ड्राइंग सब पॉलिटिक्स पॉलिटिक्स पॉलिटिक्स कर दिया मैंने समाज के हर अंग में इसको फैला दिया यह गड़बड़ हो गई है इससे संतुलन टूट गया हमारा विचार करने का आचरण करने का इस संतुलन को वापस लाने की जरूरत है पॉलिटिक्स आपके जीवन का छोटा सा हिस्सा है शायद 5 पर 10 पर बहुत अधिक तो 15 पर उसको उतना ही रखिए पूरा जीवन उसमें आपका डूब जाए ऐसा मत करिए समाज में उसके अलावा भी बहुत कुछ है करने के लिए और करवाने के लिए हम लोग भारत स्वाभिमान की तरफ से यही करना चाहते पॉलिटिक्स को थोड़ा सा हिस्सा मानकर बाकी काम उससे ज्यादा बड़े हैं इस देश में उनको करने की तैयारी इस भारत स्वाभिमान की मदद से हो रही क्योंकि कोई पार्टी यह काम नहीं करेगी हमें ही करना पड़ेगा जानना चाहता आपने बताया करना है सरकारी काचा आदमी की मानसिकता ल करने की ति बनना चाहता है तो जब तक वो मानसिकता नहीं तब तक इसमें मानसिकता बनती है व्यवस्था से ये जो व्यवस्था है ना वह लोगों को मजबूर करती है इस व्यवस्था में क्या है जो पैसे वाला है वही जिंदा रह सकता है जो गरीब है उसके जिंदा रहने के रास्ते बंद है इसलिए हर आदमी पैसे वाला बनना चाहता है क्योंकि व्यवस्था उसको जिंदा नहीं रहने देती आप व्यवस्था को बदल दो और ऐसी कर दो कि गरीब से गरीब भी सम्मान के साथ जिंदा रह सके इस व्यवस्था में तो किसी की आका नहीं लखपति होने की व तो व्यवस्था की मजबूरी उसको तकलीफ देती है तो हम इस व्यवस्था को बदलना चाहते हैं जिसमें गरीब से गरीब भी सम्मान के साथ जी सके रह सके अमीर गरीब तो सभी समाज में रहेंगे क्योंकि हाथ की पांच उंगलियां है पांचों बराबर नहीं है थोड़ा बहुत अंतर तो रहेगा वह उतना ही रहना चाहिए जितना उंगलियों का है यह नहीं कि एक आदमी को रोज रप भी नहीं है और एक को एक मिनट में 200 हज तो व्यवस्था बदल के आदमी के मन में आश्वस्त ज्यादा हम पैदा कर सकते हैं तब वह लखपति बनने का ख्वाब छोड़ देगा क्योंकि उसे मालूम है कि रोडपति होकर भी वह सम्मान के साथ रह सकता है तो सम्मान बढ़ाना है उसका ऐसी व्यवस्था बनानी जी दो तीन छोटे काम है एक तो यह काला धन खत्म कर दीजिए भ्रष्टाचार खत्म हो जाएगा इनकम टैक्स की मदद से दूसरा काम यह कर दीजिए कि जो भ्रष्टाचार करने वाले हैं उनको फांसी और मृत्यु दंड की सजा कानून बना के जैसे आपने कानून बनाया ना बलात्कारी आदमी है उसको 14 साल की जेल या बलात्कार करने के बाद मर्डर कर दिया तो फांसी ऐसे ही आप बना दो कि आपने सरकारी पद पर रहते हुए भ्रष्टाचार किया जैसे चीन में है वहां फांसी की सजा है एक ही मिनट लगता गोली मार देते हैं चीन में सरकारी पद पर रहते हुए आपने रिश्वत खाई और आप पकड़े गए तो भगवान भी नहीं बचा सकता तीन दिन नहीं लगते उनको तीसरे दिन तो गोली मार देते में तो बहुत ज्यादा करप्शन हां यह भी सही है कि करप्शन है लेकिन उनका करप्शन और हमारे करप्शन में जमीन आसमान का अंतर है उनका करप्शन वैसा ही है जैसे अमेरिका में ऊपर के लेवल पर टॉप में हमारे यहां जैसे ये तहसीलदार के पास जाओ अपनी जमीन के कागज निकलवा तो कहेगा 50 दे दो 00 दे दो बाबू के पास जाओ क्लर्क के पास कहेगा एक चाय प्याला पिला दो दो चाय पिला दो यह नीचे के स्तर पर छोटी-छोटी यह चीन में नहीं वहां आदमी बहुत आराम से जिंदा रहता है चीन में क्या है ऊपर के लेवल पर करप्शन है लेकिन पकड़ गए तो सजा इतनी कठोर है कि रूह कांप जाती है चीन में और इसी तरह का है मिलावट आपने की पकड़े गए तो कोई बचा नहीं सकता फांसी से अभी चीन में मिलावटी दूध पकड़ आ गया केस आ गया तीन महीने में फैसला हो गया एक साथ 543 लोगों को फांसी पर चढ़ा दिया चीन की सरकार ने मिलावटी दूध पकड़ एक साथ बिना मुरब्बे अब हमारे यहां मिलावटी काम करने वाले सालों साल जिंदा रहते हैं कोई उनको फर्क ही नहीं पड़ता क्योंकि कानून ऐसे तो आप कानून कुछ जगह थोड़े कठोर बना दो भ्रष्टाचार के मिलावट खोरी के आप देखो इस पर बहुत कंट्रोल आ जाएगा और समाज में गरीब से गरीब आदमी को सम्मान के साथ जिंदा रहने का रास्ता खोल दो व्यक्तिगत भ्रष्टाचार उसी दिन खत्म हो जाए हर आदमी पैसा कमा के जिंदा रहना चाहता है क्योंकि उसे मालूम है इससे सम्मान बढ़ता है आप दूसरी चीजों में सम्मान बढ़ा दो उसका कारीगरी का सम्मान बढ़ा दो ज्ञान का सम्मान बढ़ा दो उसके नॉलेज का सम्मान बढ़ा दो वह पैसे की तरफ जाएगा नहीं क्योंकि पैसा तो उतना ही चाहिए खाने पीने के लिए सम्मान दूसरी चीजों से मिलने लगे पैसे के अलावा तो उस रास्ते पर लोग चल पड़े यह तो हम जैसी व्यवस्था बनाए वैसे बनने की बात जी लाका बनाने की ह जी अ को सम एक ही बात है हमारे देश की सरकारें यह कहती है कि कृषि अगर लाभकारी हो गई तो नेताओं की राजनीति डूब जाएगी नेता यह कहते हैं कि राजनीति चलाने के लिए गरीबी रहनी ही चाए भुखमरी होनी ही चाहिए बेरोजगारी होनी मैं आपको बिना किसी लाग लपेट के कहता हूं एक भूतपूर्व प्रधान मंत्री थे जो अब जीवित नहीं है उनका नाम था चंद्रशेखर एक बार मैंने उनसे यह बात की जो आपने मुझसे की कि कृषि को लाभकारी क्यों नहीं बना सकते क्या मुश्किल है आसान काम है तो उन्होने कहा आसान तो है बनाना भी है आसान है कोई मुश्किल नहीं है कुछ कानून में फेर बदल करने की जरूरत है एक एग्रीकल्चरल प्राइस कमीशन एक्ट है उसको हटा दो पूरी कृषि लाभकारी हो जाएगी आराम से हो जाए फिर मैंने कहा क्या मुश्किल है उन्होंने कहा हमें मुश्किल एक ही है कि अगर यह लाभकारी मूल्य में आ गए सारे किसान तो इनकी गरीबी खत्म यह गरीब नहीं रहेंगे तो हमको नहीं पूछेंगे हमारी राजनीति नहीं चलेगी हमको माला कौन डालेगा हमारी जय जयकार कौन करेगा हमारी जिंदाबाद कौन करेगा यह तो नहीं करेंगे क्योंकि यह तो हमारे जैसे हो जाएंगे फिर इसलिए हम चाहते हैं कि ये गरीब के गरीब ही रहे इसलिए हम नहीं चाहते कि इनको लाभकारी मूल्य मिले तो मैंने कहा ये आप कह रहे हैं उन्होंने कहा ये मैं नहीं कह रहा हूं सभी प्रधानमंत्री यही कहते हैं बस अंतर इतना है कि मैं खुल के कह रहा हूं बाकी पर्दे के पीछे कहते तो कोई सरकार नहीं चाहती कि गरीबी भुखमरी बेकारी खत्म हो क्योंकि उससे उनका आधार ही खत्म होता है उनका तो इमोशनल ब्लैकमेलिंग है ना गरीबी भुखमरी बेकारी वह खत्म नहीं होने देना चाहते इसलिए वो इसी व्यवस्था को चलाना चाहते हैं अब आपके ऊपर है कि आप इसको ताकत लगा के खत्म कर तो व्यवस्था आपके हिसाब से चलेगी यह हमारे लिए है मुख्य बात समझने बहुत आसान है कृषि लाभकारी हो सकती है आप सिर्फ इतना कर दो कि जैसे उद्योगपति अपने कोई भी उत्पाद का भाव तय करता है वैसे किसान अपने हर उत्पाद का भाव खुद तय करेगा बस बात खत्म हो गई उसको जो लगता है गेहूं बेचेगा उस भाव में उसको जो लगता है चावल बेचेगा उस भाव में अगर जूता बनाने वाला मोची अपने जूते का भाव त कर सकता है तो गेहूं पैदा करने वाला किसान क्यों नहीं कर सकता अपने गेहूं का भाव तय अपने हिसाब से तय कर लेगा जिसको खरीदना है खरीदे नहीं खरीदना ना खरीदे जैसे जूता होता है चप्पल होता है टूथपेस्ट होता है टूथब्रश होता है इनके भाव सरकार तय करती है क्या वह अपने भाव खुद तय करते हैं किसान को भी छोड़ दो अपने भाव तय कर लेगा तो उसमें सब चीजें जोड़ेगा वो जी हा तो आप ये जो क्रेता का किस्सा है यह विक्र का कर दो जैसे पूरी इकॉनमी में विक्रेता भाव फिक्स करता है ऐसे ही किसान की इकॉनमी में विक्रेता फिक्स करेगा इतना ही करना है पूरी कृषि लाभकारी हो जाएगी आपकी सभी बातो से सहमत हं और जीवन में उतारा एक ही दूध थोड़ा सा आपका दूध का हमारा अधिकार कैसे पीने का हा बहुत अच्छा सवाल है केला बहुत बढ़िया बहुत बढ़िया सवाल है इस सवाल को मैं थोड़ा और अच्छे से कहता हूं इन्होंने नहीं कह पाया मैं कहता हूं इनका ये कहना है और इस देश में कुछ लोगों का यह कहना है विशेष रूप से मेनका गांधी जैसे लोगों का यह कहना है कि दूध तो जानवरों के बच्चों के लिए है जैसे मां का दूध अपने बच्चे के लिए है वैसे ही जानवरों का दूध अपने बच्चे के लिए है यह उनका कहना है मैंने इसमें थोड़ा काम किया थोड़ा जानने की कोशिश की कि हमारे देश में गाय होती है बैल होती है भैंस होती है तो हमारे देश में ऐसी भी गाय है है जो 60 लीटर 70 लीटर 80 लीटर दूध देती हैं थर पारकर साहीवाल कांकरेज अमृत महल राठी कुछ ज्यादा दूध देने वाली गाय हैं अब बछड़े का दूध जो होता है जो वह रोज पी सकता है वह उसके वजन का एक दसवा हिस्सा होता है यह विज्ञान का नियम बता रहा हूं आपको कोई भी बछड़ा या बछड़ी उसका जो कुल वजन है उसका 1 ब 10 हिस्सा ही वो दूध पी सकता है मान लो बछड़े का वजन है 10 किलो कल्पना करो जब वो पैदा होता है 15 किलो कल्पना करो तो वो एक दिन में डेढ़ लीटर ही दूध पी सकता है ज्यादा पिलाओगे दस्त हो जाएंगे उसको टियां हो जाएंगी अब सुनो अब वो डेढ़ दो लीटर तो पी सकता है अब उसकी मां को दूध उतरता है 15 लीटर तो आप क्या करेंगे आप यह करेंगे या तो बछड़े को ज्यादा पिलाएंगे तो व बीमार होकर मर जाएगा या बछड़े को दूध 10 डेढ़ दो लीटर ही पिलाएंगे बाकी दूध मां को उसके थन में ही छोड़ देंगे तो मां मर जाएगी क्योंकि दूध जो है ना वह प्रोटीन है और जब वह सूखे तो वही ट्यूमर में कन्वर्ट होगा और कैंसर होगा और वह गाय मर जाएगी आपको मालूम है जिस गाय का दूध नहीं निकाल पाते उसको इतनी वेदना होती है इतनी पीड़ा होती है चिल्लाना शुरू कर देती है कई बार क्या होता है ना मां जैसे वैसे ही गाय कोई मां है ना जन्म देते ही उसका बच्चा मर गया तो अंदाजा लगा लो उस मां को कितनी तकलीफ होती है उसका दूध नहीं निकलता वैसे ही गाय का बच्चा मर गया अब दूध तो बच्चे के लिए है वह तो मर गया आप तो निकालो ग नहीं क्योंकि आप नैतिक मानते हो अनैतिक मानते हो तो तो मर जाएगी इसलिए हमारे शास्त्रों में कहा गया कि बछड़े और बछिया के लिए वजन के अनुपात के हिसाब से दूध छोड़िए तो हमारे किसान अक्सर यह करते रहे कि एक थन का दूध बछड़े और बछड़ी के लिए तीन थन का दूध अपने लिए तो यह बले की व्यवस्था है पूरा दूध निकलता भी रहे मां भी जिंदा रहे बछड़े भी जिंदा रहे बछिया भी जिंदा रहे अब क्या हुआ इस देश में कुछ लोगों ने कहना शुरू किया दूध बच्चे का अधिकार है आप पी रहे हो तो आप अनैतिकता कर रहे हैं तो अब फैल गया दूध पीना बंद कर दो क्या पियोगे आपके पास कैल्शियम का दूसरा स्रोत क्या है दूध के अलावा हिंदुस्तानियों के पास कैल्शियम का दूसरा स्रोत क्या है दूध है दही है मक्खन है मट्ठा है घी है यह कैल्शियम का सबसे बड़ा भंडार है इसके अलावा है क्या आपके पास दालों में प्रोटीन है गेहूं में चावल में कार्बोहाइड्रेट्स बसा और दूसरी चीजें हैं कैल्शियम नहीं मिलेगा हड्डी बनेगी नहीं हड्डी बनेगी नहीं शरीर चलेगा नहीं कैल्शियम का एक ही भंडार है दूध और दूध की बनी हुई चीजें इसलिए भारतीय भोजन व्यवस्था में दूध सबसे महत्त्वपूर्ण स्थान पर है और बच्चों के लिए तो सबसे बड़ा भोजन यही है क्योंकि बढ़ते हुए बच्चे को कैल्शियम सबसे ज्यादा चाहिए अमेरिका और यूरोप में दूध की जरूरत नहीं है क्यों क्योंकि उनके कैल्शियम की पूर्ति के लिए उनके पास दूसरी कई चीजें हैं वह बी फीटर है मांस खाते हैं गाय का मांस खाते हैं गाय के दूध में कैल्शियम है गाय के शरीर में कैल्शियम है उसके मास में बहुत कैल्शियम है तो गाय का मांस खाके कैल्शियम की पूर्ति कर लेते हैं सूअर का मांस खाके और ज्यादा कैल्शियम की पूर्ति हो जाती है पोर्क ईटर है बीफ ईटर है मटन खाते हैं य सब खाते हैं वो पूर्ति कर लेते हैं हम शाकाहारी हैं हमारे पास तो एक ही चीज है दूध और दूसरी कोई चीज नहीं है इसलिए भारतीय व्यवस्था में तो दूध की सबसे बड़ी जरूरत है आप नहीं पिएंगे जानवर मर जाएंगे दूध नहीं निकालेंगे तो उनका इसलिए दूध तो निकाल भैंस में भी सामान्य रूप से 10 12 लीटर दूध होता है एक दिन में उसके बछड़े को डेढ़ दो लीटर की ही जरूरत है इससे ज्यादा जरूरत है नहीं बाकी तो निकाल के आपके लिए ही है अभी मैं चलते चलते आपको मेरा पता दे देता हूं कभी भी आपके मन में सवाल आए तो आप पूछ सकते हैं पतंजलि योगपीठ हरिद्वार राजीव दीक्षित पतंजलि योगपीठ हरिद्वार आप मुझे पत्र लिख 

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